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Diwali 2023: यहां जानिए पूजा का शुभ समय और संपूर्ण पूजा विधि

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 08 Nov 2023, 12:00 AM | Updated: 08 Nov 2023, 12:00 AM

दिपावाली हिन्दुओं का प्रमुख त्योहर है और इस साल 2023 में दिवाली का पर्व 12 नवंबर को मनाया जायेगा. दिवाली के  त्योहार को लेकर मान्यता है कि इस दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास खत्म करके अपनी नगरी अयोध्या लौटे थे और अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में घी के दिए जलाये थे जिसके बाद से दिवाली का पर्व मनाया जाता है. वहीं इस दिन लोग प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करते हैं और कहा जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने से धन की कमी नहीं होती साथ ही माता लक्ष्मी और गणेश जी का आशीर्वाद भी बना रहता है. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

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दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

जानकारी के अनुसार, दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है और इस पूजा की तयारी कई दिनों से होने वाली है. इस दिन पूरे घर को दीयों और रंगबिरंगी लाइटों से सजाया जाता है साथ ही घर के हर कोने में दिए जलाते हैं ताकि अंधकार न रहे. इसी के साथ इस दिन लोग सम्पूर्ण तरीके से लक्ष्मी पूजन करते हैं और इस बार लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त कई सारे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल का समय सबसे अच्छा माना जाता है और 12 नवंबर 2023 को दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर प्रदोष का शुरू हो जाएगा.

वहीं दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का पहला शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 40 मिनट से शाम 07 बजकर 36 मिनट तक है तो वहीं दूसरा शुभ मुहूर्त 11:39 से 12:31 तक है. वहीं तीसरा शुभ मुहूर्त रात को रात्रि मुहूर्त्त (लाभ)- 01:44 से 03:23 तक है.

ऐसे करें लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा 

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन करने से पहले पूरे घर को गंगाजल का छिड़काव करके पवित्र कर दें। इसके बाद पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं। चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें।

माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें।इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें और ये पूजा पूरा परिवार को एकत्रित होकर करें. वहीं महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें. वहीं पूजा करने के बाद सभी आरती ले और प्रसाद भी ग्रहण करें.

 एक ही दिन मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली

इस साल छोटी और बड़ी दिवाली दोनों ही एक दिन यानी 12 नवंबर को ही मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार 12 नवंबर को सुबह तक रूप चौदस रहेगी फिर दोपहर ढाई बजे के बाद कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी. शास्त्रों के अनुसार दिवाली पर लक्ष्मी पूजन हमेशा अमावस्या की रात को होती है. इस वजह से दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा 12 नवंबर को रात को होगी. अमावस्या तिथि 13 नवंबर को दोपहर 3 बजे तक ही रहेगी.

आपको बता दें, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की शाम माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की पूजा करने से सुख, संपत्ति, धन, वैभव और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है. पूरे वर्ष माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे धन का संकट नहीं रहता.

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