राजीव गांधी के हत्यारों की नहीं होनी चाहिए रिहाई, बीजेपी सांसद राष्ट्रपति को लिखेंगे पत्र

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 22 मई 2021, 05:30 AM Updated: 22 मई 2021, 05:30 AM
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देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के 30 साल से ज्यादा का वक्त बीत गया। बीते दिन शुक्रवार को उनकी 30 वीं पुण्यतिथि थी। इस मौके पर देश के तमाम बड़े नेताओं ने उन्हें याद किया। वहीं, तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के दोषियों की रिहाई की सिफारिश की। 

जिसपर बीजेपी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई नहीं होनी चाहिए। बीजेपी नेता ने इस मामले में राष्ट्रपित रामनाथ कोविंद को पत्र लिखने की भी बात कही है।

18 पुलिसवालों की हो गई थी मौत

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, ‘मैं एमके स्टालिन के ख़त के विरोध में राष्ट्रपति को पत्र लिखूंगा। LTTE के लोगों ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची थी और इस आत्मघाती हमले में 18 पुलिसवालों की भी मौत हो गई थी।‘ 

दरअसल, डीएमके चीफ और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने अपने पत्र में कहा, दोषी पिछले 30 साल से सजा काट रहे हैं इसलिए तमिलनाडु की जनता की इच्छा है कि उन्हें रिहा कर दिया जाए। खबरों के मुताबिक यह पत्र 19 मई को लिखा गया था। तमिलनाडु सरकार इससे पहले राज्यपाल को पत्र लिखकर दोषियों की माफी की सिफारिश भेजी थी। जिसपर राज्यपाल ने कहा था कि इस संबंध में राज्यपाल की कोई फैसला ले सकते हैं।

26 दोषियों को सुनाई गई थी मौत की सजा

बता दें, 21 मई 1991 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हो गई थी। बताया जाता है कि श्रीलंका में शांति सेना भेजने से तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे खफा हो गया था। जिसके बाद राजीव गांधी लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए तमिलनाडु पहुंचे तो फूलों के हार पहनाने के बहाने उनपर आत्मघाती हमला कर दिया गया। इस हमले में राजीव गांधी समेत 18 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि कई लोग बूरी तरह से घायल हो गए।

इस घटना के बाद देश में मातम पसर गया था। चौकस सुरक्षा के बावजूद देश के प्रधानमंत्री की हत्या से भी कई तरह के सवाल खड़े हुए। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में 26 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। साल 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने 19 लोगों को बरी कर दिया। मौजूदा समय में 7 दोषी हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं।

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