राजाराम मोहन राय से कई सौ साल पहले ही इस सिख गुरु ने उठाई थी सती प्रथा के खिलाफ आवाज

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Published: 16 Oct 2023, 12:00 AM | Updated: 16 Oct 2023, 12:00 AM

सिखों के तीसरे गुरु अमरदास जी हरिद्वार नगरी जाना अच्छा लगता था, जो हिन्दू, मुस्लिम, सिख धर्म के लोगो के लिए पावन नगरी मानी जाती है. जब सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमरदास जी के पांव हरिद्वार की पावन धरती पर पड़े, उन्हें देख कर कई साधुओं ने कहा कि यह एक बड़े विद्वान् और सिध्द साधक बनेंगे. जब गुरु अमरदास जी को पता चला कि पावन नगरी हरिद्वार में सती घाट पर सती प्रथा का प्रचलन है तो वह पंजाब से अपने शिष्यों के साथ सती घाट के लिए निकल पड़े थे. वहां जाकर गुरु जी ने सती प्रथा के लिए लोगो को जागरूक किया. गुरु जी ने साधू संतो और पुरोहितों को सती प्रथा बंध करने के लिए प्रेरित किया था. साथ ही विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह के लिए भी प्रोहत्साहन किया था.

दोस्तों, आईये आज हम आपको बताएंगे कि पहली बार सती प्रथा के बारे में बात करने वाले सिख गुरु, गुरु अमरदास जी है, जिन्होंने अपने जीवन में 22 बार हरिद्वार का दौरा किया था.

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सती प्रथा खत्म करने वाले गुरु

हम आपको बता दे कि आज से करीब 500 साल पहले सिखों के गुरु, गुरु अमरदास जी ने सती प्रथा को बंद करने की बात कही थी. जब गुरु जी को पता चला कि पावन नगरी हरिद्वार में सती घाट पर सती प्रथा का प्रचलन है. जिसके बाद गुरु जी अपने शिष्यों के साथ सती घाट के लिए निकल पड़े थे. गुरु जी ने सती घाट पर पुरोहितों और साधुओं को सती प्रथा को रोकने के लिये प्रेरित किया था. जिसके चलते गुरु जी हरिद्वार में 22 बार आए. 21 बार गुरु बने से पहले और 1 बार गुरु बने के बाद. गुरु जी सती घाट पर विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह के बारे में जागरूक किया और कई शादियां भी करवाई थी.

सिखों के गुरु अमरदास जी 1552 से 1575 तक गुरु जी की गद्दी पर विराज मान रहे थे, वह एक विद्वान् बने, और उन साधुओं कीई भविष्यवाणी सच हो गयी. गुरु जी पहले ऐसे इंसान थे, जिन्होंने सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई थी. सती प्रथा में किसी महिला का पति मर जाता है तो उस महिला को भी उसके पति की चिता में ही जिन्दा जला दिया जाता था, जिसका विरोध करने वाले पहले ब्यक्ति सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमरदास जी थे.

गुरु जी ने अपने जीवन में कई ऐसे महान कामों को अंजाम दिया था, जिनकी इतिहास में गिना जाता है. गुरु जी ने हरिद्वार के सती घाट पर ही ध्यान लगाते थे, जिसके चलते वहां पर एक गुरुद्वारा भी बनाया गया था. उस जगह को अब सिखों के पवित्र स्थलों में गिना जाता है.

सती प्रथा को कानूनी तौर पर बंद करवाने वाले व्यक्ति

इसके साथ ही भारत में कानूनी तौर पर सती प्रथा को बंद करने का श्रेय राजा राम मोहन राय को जाता है, जो भारतीय समाज के समाज सुधारक होने के साथ साथ आधुनिक भारत के जनक भी मने जाते है. इन्होने भारत में सती प्रथा खत्म करने और समाज में महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के साथ भारतीय समाज की रूढ़ीवाद विचारधारा को बदलने के लिए भी काम किया है. इन्होने 4 दिसम्बर 1829 को उस समय के वायसराय जनरल लार्ड विलियम के सती रेगुलेटिंग एक्ट पर करवाया था और भारतीय समाज के महिलाओं को उनके जीवन का अधिकार दिलाया था.

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