Raghav Chaddha News: गिग वर्कर्स की कमाई से लेकर मोबाइल रिचार्ज के 28 दिन वाले झंझट तक, आम लोगों के मुद्दे जोर-शोर से उठाने वाले राघव चड्ढा अब खुद सियासी हलचल के केंद्र में आ गए हैं। आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर बड़ा फैसला लिया है, जिससे पार्टी के अंदर चल रही खामोश खींचतान अब खुलकर सामने आती नजर आ रही है।
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सदन में बोलने पर भी लगी रोक | Raghav Chaddha News
राघव चड्डा के खिलाफ लिए गए इस फैसले की जानकारी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र के जरिए दी। पार्टी की ओर से भेजे गए पत्र में साफ कहा गया है कि अब राघव चड्ढा को सदन में पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए। यह फैसला अपने आप में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी संसदीय भूमिका सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
राघव चड्ढा 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक जारी रहेगा। हालांकि, पार्टी ने उन्हें पद से हटाने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।
लंबे समय से पार्टी से दूरी की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा काफी समय से थी कि राघव चड्ढा पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं। वे न तो AAP के पक्ष में खुलकर बयान दे रहे थे और न ही किसी बड़े राजनीतिक मुद्दे पर सक्रिय नजर आ रहे थे। 27 फरवरी को जब दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को CBI कोर्ट से राहत मिली थी, तब भी राघव चड्ढा की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इस चुप्पी ने उनके रुख को लेकर सवाल खड़े किए।
फैसले के बाद राघव का वीडियो पोस्ट
AAP के इस फैसले के कुछ ही देर बाद, शाम 6:56 बजे राघव चड्ढा ने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उनके संसद में दिए गए भाषणों और उठाए गए जनहित के मुद्दों के क्लिप्स शामिल थे। वीडियो के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि वे लगातार आम जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाते रहे हैं।
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 2, 2026
सदन में बोलने की मांग भी हुई खारिज
इसी बीच, न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा सचिवालय ने जन विश्वास संशोधन विधेयक पर राघव चड्ढा की बोलने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया। इसकी वजह यही बताई गई कि पार्टी की ओर से उनके लिए बोलने का समय तय नहीं किया गया था।
संसद में उठाए आम लोगों से जुड़े मुद्दे
हालांकि पार्टी से दूरी की चर्चा के बीच, राघव चड्ढा संसद में लगातार सक्रिय रहे। पिछले दो सत्रों में उन्होंने कई जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए।
शीतकालीन सत्र 2025 में:
- गिग वर्कर्स का मुद्दा उठाया, जिसमें ब्लिंकिट, जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स की कम सैलरी, 10 मिनट डिलीवरी के दबाव और सामाजिक सुरक्षा की कमी पर सवाल उठाए।
- डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कॉपीराइट एक्ट 1957 में बदलाव की मांग की, ताकि शिक्षकों और इन्फ्लुएंसर्स को एल्गोरिदम और गलत टेकडाउन से बचाया जा सके।
- ‘वन नेशन, वन हेल्थ ट्रीटमेंट’ की बात करते हुए सरकारी अस्पतालों की हालत पर चिंता जताई।
बजट सत्र 2026 में:
- खाद्य मिलावट, खासकर यूरिया के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया।
- देश के 150 से ज्यादा एयरपोर्ट्स पर सस्ता खाना उपलब्ध कराने के लिए किफायती कैफे खोलने की मांग की।
- मोबाइल रिचार्ज को 28 दिन की बजाय पूरे महीने का करने और बचा डेटा आगे जोड़ने का सुझाव दिया।
- बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को खत्म करने का प्रस्ताव रखा।
- विवाहित जोड़ों के लिए संयुक्त इनकम टैक्स फाइलिंग का विकल्प देने की मांग की।
- पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने की बात कही।
संकेत देता है यह फैसला
बता दें, AAP का यह कदम पार्टी के अंदर चल रही हलचल और रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि राघव चड्ढा आगे पार्टी में किस भूमिका में नजर आते हैं और यह फैसला आने वाले समय में पार्टी की राजनीति को किस तरह प्रभावित करता है।
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