देश में अब ब्लैकफंगस से मचा कोहराम, केंद्र ने राज्यों से की महामारी घोषित करने की मांग

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 21 May 2021, 12:00 AM | Updated: 21 May 2021, 12:00 AM

पूरा देश खतरनाक कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। हर रोज लाखों नए मामले सामने आ रहे हैं और हजारों लोगों की मौते हो रही है। कोरोना के साथ-साथ देश में अब ब्लैक फंगस का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। खबरों के मुताबिक ब्लैक फंगस से होने वाला मृत्यु दर, कोरोना से होने वाली मृत्यु दर से काफी ज्यादा है। 

देश के कई राज्यों में इसके मामले सामने आए हैं और अभी तक 126 लोगों की मौत हो गई है। इसी बीच केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों से ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने की बात कही है।

कोरोना मरीजों की मौत की वजह बन रहा ब्लैकफंगस

केंद्र सरकार ने कहा है कि ब्लैक फंगस को महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत नोटिफाइड डिजीज श्रेणी में डाला जाए। ये कोरोना मरीजों की मौत का कारण बन रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में यह बात कही। 

उन्होंने कहा, ‘हाल के दिनों में म्यूकरमाइकोसिस नाम का एक फंगल इन्फेक्शन नई चुनौती के रूप में सामने आया है। कई राज्यों में यह कोविड-19 के मरीजों में देखने को मिल रहा है, खासकर उन मरीजों में जिन्हें स्टेरॉयड थेरेपी दी गई और शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं है।‘ लव अग्रवाल ने लिखा, ‘यह फंगल इन्फेक्शन कोविड 19 मरीजों को लंबे समय तक बीमारी और मौतों की वजह बन रहा है।’

केंद्र को सारी जानकारी उपलब्ध कराएं राज्य

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सभी सरकारी, प्राइवेट स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल कॉलेजों को म्यूकरमाइकोसिस की स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस, और मैनेजमेंट के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की ओर से जारी गाइडलाइंस का पालन करना होगा। 

संयुक्त सचिव ने राज्यों से कहा, हर पुष्ट और संभावित केसों की जानकारी भी केंद्र सरकार को उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद इन्हें इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रॉजेक्ट (आईडीएसपी) सर्विलांस सिस्टम में अपडेट किया जाएगा। 

उन्होंने कहा, ‘ब्लैक फंगस एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है जो म्यूकोर्मिसेट्स नामक मोल्डों के समूह के कारण होता है। ये मोल्ड पूरे वातावरण में रहते हैं। यह खास तौर से उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हैं या ऐसी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेते हैं जो शरीर की रोगाणुओं और बीमारी से लड़ऩे की क्षमता कम करती हैं।‘ उन्होंने मरीजों को सलाह दी गई है कि वे शीघ्र उपचार कराएं, मधुमेह नियंत्रित करें, स्टेरॉयड तभी लें जब ये आवश्यक हों।

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