ये है वो दलित क्रिकेटर्स, जिन्होंने मचाया था क्रिकेट में कोहराम

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 18 नवम्बर 2023, 05:30 AM Updated: 18 नवम्बर 2023, 05:30 AM
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कहा जाता है क्रिकेट अमीरों का खेल है, गरीब तो आपनी रोजीरोटी कमाने में व्यस्त है उन्हें कहा फुर्सत खेलों की… शायद इसीलिए भारतीय क्रिकेट टीम में जो गिने चुने दलित खिलाड़ी रहे, वो भी गुमनाम ही रहे है… क्या आप जानते है कि हमारे इतिहास में एक किताब लिखी गयी है, जिसमें लेखक ने क्रिकेट का एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण करने की कोशिश की है, इस किताब का नाम ‘विदेशी खेल अपने मैदान पर’ है जो इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने लिखी है. इन्होंने आपनी इस किताब में भारतीय क्रिकेट के इतिहास के गुमनाम क्रिकेटरों के बारे में जानकारी इकट्ठा की. आजादी के बाद से अब तक कुछ गिने चुने दलित ही क्रिकेट के खिलाड़ी बने है, लेकिन उन्हें वो शोहरत हासिल नहीं हुई जिसके वे हक़दार थे. ऐसा लग रहा है कि हमारे क्रिकेट टीम में ऊंची जातियों और उच्च वर्गों का ही दबदबा है.

और पढ़ें : समाज में दलितों की वास्तविक स्थिति को दर्शाने वाली कविता, ‘कौन जात हो भाई?’ 

भारतीय क्रिकेट टीम के कुछ गुमनाम क्रिकेटर्स – Dalit Cricketers

वीनू मांकड़

वीनू मांकड का जन्म जामनगर, बॉम्बे के एक दलित परिवार में 12 अप्रैल 1917 को हुआ था, वीनू मांकड बाएं हाथ के शानदार स्पिन गेंदबाज थे. उनकी गिनती भारत के महान ऑलराउंडरों क्रिकेटर्स में होती है. वीनू मांकड आईसीसी के ‘हॉल ऑफ फेम’ में जगह पाने वाले वह 7वें भारतीय खिलाड़ी हैं, 1973 में, खेल के क्षेत्र में वीनू मांकड को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. इन्होंने अपने क्रिकेट करियर में ऐसा रिकॉर्ड बनाया था जिससे 52 सालों तक कोई नहीं तोड़ पाया, वीनू मांकड़ ने पंकज रॉय के साथ मिलकर 1956 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 413 रनों की ओपनिंग पार्टनरशिप की थी, जिससे लोग आज भी याद करते है.

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सीके नायडू

इस लिस्नाट में दूसरा नाम है नायडू का, इनका जन्म 1895 में नागपुर, मध्य प्रांत के एक तमिल दलित परिवार में हुआ था. यह दांए हाथ से बल्लेबाज थे और बाएं हाथ के गेंदबाज थे. इन्होने अपने 40 साल से भी अधिक क्रिकेट करियर में हिंदुओं, मद्रास, हैदराबाद, मध्य प्रांत-बरार, मध्य भारत, होल्कर, आंध्र और उतार प्रदेश टीमों के लिए क्रिकेट खेला है, फिर भी इनके हाथ गुमनामी के अलावा कुछ नहीं लगा.

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विजय मर्चेंट

दलित खिलाडियों में तीसरा नाम विजय मर्चेंट है,  इनका 12 अक्टूबर 1911 को इनका जन्म बॉम्बे के एक दलित परिवार में हुआ था. विजय मर्चेंट दाएं हाथ के बल्लेबाज और कभी-कभार दाएं हाथ के मध्यम गति के गेंदबाज भी करते थे. इससे अलग भारत के लिए टेस्ट मैचबल्लेबाजी औसत 1929 से 1951 के बीच ब्रैडमैन के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रथम श्रेणी औसत है. इन्होने अपने क्रिकेट करियर में इंग्लेंड के दो दौरे किए जिनमे इनके रंग 800 से अधिक थे.

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भुवनेश्वर कुमार

दलित खिलाडियों में चौथा नाम भुवनेश्वर कुमार है इनका जन्म 5 फरवरी 1990 को मेरठ के दलित परिवार में हुआ था. भुवनेश्वर कुमार  भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं जो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेल रहे हैं. भुवनेश्वर वर्तमान में इंडियन प्रीमियर लीग में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हैं. इन्हें दुनिया के सबसे लगातार स्विंग गेंदबाजों में से एक माना जाता है. यह एक शानदार खिलाड़ी है. जो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए महत्वपूर्ण है.

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कुलदीप यादव

दलित खिलाडियों में पांचवा नाम कुलदीप यादव का है जिनका जन्म 14 दिसंबर 1994 को कानपुर के दलित परिवार में हुआ था. यह एक भारतीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, कुलदीप यादव गेंदबाजी ऑलराउंडर क्रिकेटर है, जो बाएं हाथ सेस्पिन गेंदबाजी करते हैं और बल्लेबाज भी है. ये वर्तमान में इंडियन प्रीमियर लीग के लिए दिल्ली के साथ नेशनल स्तर पर उत्तर प्रदेश के लिए भी खेलते है.

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और पढ़ें : आखिर क्यों बाबा साहेब ने अपने भाषण को दिया था किताब का रूप?

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