PM की मन की बात ना सुनने पर 36 स्टूडेंट्स को 7 दिन के लिए कहां बंद कर दिया?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 May 2023, 12:00 AM | Updated: 13 May 2023, 12:00 AM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 100वें एपिसोड  पूरे हो चुके हैं. लेकिन पीएम का ये 100वां एपिसोड इस समय चर्चा का विषय बना है. दरअसल, चंडीगढ़ के नर्सिंग इंस्टीट्यूट PGIMER के स्टूडेंट्स को पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के कार्यक्रम सुनने का आदश दिया गया था लेकिन इंस्टीट्यूट के 36 बच्चे कार्यक्रम में नहीं गए जिसके बाद इन स्टूडेंट्स को सजा दी गयी है.

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जानिए क्या है मामला 

जानकरी के अनुसार, चंडीगढ़ की PGI ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 100वें एपिसोड को नहीं सुनने पर 36 नर्सिंग छात्राओं को 7 दिन के लिए हॉस्टल और PGI से बाहर जाने पर रोक लगा दी है. पीजीआई चंडीगढ़ ने आदेश जारी कर कहा है कि स्टूडेंट्स को ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुनने के लिए कहा गया था, लेकिन कुछ स्टूडेंट्स ने इसे नहीं सुना. जिसके बाद आदेश जारी कर इन सभी 36 छात्राओं की आउटिंग 7  दिनों के लिए बंद कर दी है.

पीजीआई ने जारी किया आदेश 

वहीं पीजीआई ने जो आदेश जारी किया है, उसमें कहा है कि 30 अप्रैल को नर्सिंग स्टूडेंट्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुनने के लिए कहा गया था. यह निर्देश नियमित पाठ्यक्रम गतिविधियों के रूप में शामिल होने के इरादे से दिया गया था. इस कार्यक्रम के पहले के एक एपिसोड में प्रधानमंत्री ने अंगदान के नेक काम को बढ़ावा देने पर बात की थी, जो मनोबल बढ़ाने वाला था. कार्यक्रम के दौरान लेक्चर थियेटर से अनुपस्थित रहीं छात्राएं आदेश में कहा गया है कि चूंकि इस बार के एपिसोड को कुछ स्टूडेंट्स ने नहीं सुना और न सुनने की कोई वजह भी नहीं बताई, लेक्चर थियेटर से कार्यक्रम से अनुपस्थित रहे, इसलिए कॉलेज के अधिकारियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है. उन्हें पीजीआईएमईआर प्रशासन की नाराजगी से अवगत करा दिया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लेटर में लिखा है कि स्टूडेंट्स को पहले ही बताया गया था कि मन की बात के 100वें कार्यक्रम में जाना अनिवार्य है. कहा गया था कि कार्यक्रम में शामिल नहीं होने वाले छात्रों का बाहर जाना कैंसिल कर दिया जाएगा.

प्रिंसिपल ने मामले पर सफाई  

वहीं पीजीआई चंडीगढ़ के प्रिंसिपल डॉक्टर कौर ने इस मामले को लेकर कहा गया कि अखबार को बताया कि ये एक्शन अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया है. उन्होंने कहा कि ये फैसला सिर्फ इसलिए नहीं लिया गया क्योंकि स्टूडेंट्स किसी एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. बल्कि इसलिए भी लिया गया है कि क्योंकि स्टूडेंट्स के लिए कई गेस्ट लेक्चर अटेंड करना जरूरी है. डॉक्टर कौर ने कहा कि संस्थान में हर कोई पूरी ईमानदारी के साथ एक टीम के रूप में काम करता है. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस कार्रवाई को गलत समझा जा रहा है.

देहरादून के छात्रों पर भी हुई ऐसी करवाई 

वहीं इससे पहले खबर आई थी कि देहरादून के एक प्राइवेट स्कूल ने मन की बात प्रोग्राम में ना जाने वाले छात्रों से कथित तौर पर 100 रुपये का जुर्माना लिया. आरोप है कि उन छात्रों से मेडिकल सर्टिफिकेट देने और कार्यक्रम में ना पहुंचने के लिए सफाई भी मांगी गई. हालांकि, स्कूल ने इन आरोपों से इनकार किया था.

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