PM Modi Punjab visit: 4 मई 2026, ये वो तारीख है जो न केवल पश्चिम बंगाल के राजनैतिक इतिहास में बल्कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा पाई गई स्वर्णिम जीत के इतिहास में भी एक ऐसी तारीख बन गई.. जिसे बंगाल औऱ बीजेपी दोनो की दिशा और दशा को बदल कर रखा दिया। बीजेपी ने आखिरकार ड़ेढ़ दशक के संघर्ष को जीत के जश्न में बदल दिया और बंगाल से ममता बनर्जी वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार को जड़ से उखाड़ फेंका.. दे आये दुरुस्त आये.. लेकिन अब भी एक राज्य की लड़ाई है जिसमें बीजेपी को केवल एंट्री करने में ही जूते घिसने पड़ रहे है, वहां पैर जमाने की बात फिलहाल के लिए तो मुद्दा ही नही है.. जी हां, हम बात कर रहे पंजाब की, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव है, फिलहाल पंजाब में पहली ही बार में विधानसभा चुनाव में उतरी और बहुमत के साथ विजयी हुई आम आदमा पार्टी की सरकार है, वहीं उससे पहले कांग्रेस की बाद्शाहत थी.. ऐसे में जहां कांग्रेस फिर से वापसी करना चाहती है तो बीजेपी पंजाब में अपनी नाक बचाना चाहती है.. जिसके लिए अब तो खुद बीजेपी का प्रमुख चेहरा पीएम नरेंद्र मोदी भी चुनावी मैदान में उतर गए है.. मगर सवाल ये है कि क्या बीजेपी पंजाब की जनता को लुभा पायेगी.. आईये एक विश्लेषण करते है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा और मिशन आत्मनिर्भर
आज के समय में बीजेपी पूरे भारत में एक ऐसी पार्टी है जो विजयी मानी जाती है, लेकिन बावजूद इसके 2022 में जब पहली बार करीब 35 सालो के बाद बीजेपी शिरोमणि अकाली दल के बिना विधानसभा चुनाव में खड़ी हुई तो बुरी तरह से औंधे मुंह गिर पड़ी.. अकाली दल के साथ मिलकर सरकार चलाने वाली बीजेपी को 2020 के किसान आंदोलन के बाद अकाली ने दरकिनार कर दिया और किसानों के साथ खड़ी हो गई.. बुरी तरह से नाराज पंजाब की जनता ने बीजेपी को अच्छा सबक सिखाया और बीजेपी को 117 विधानसभा सीटो में से मात्र 2 सीटे मिली। संदेश साफ था पंजाब की जनता का, हमसे टकराना भारी पड़ेगा। फिर से 5 साल बीतने वाले है और जनता का भरोसा जीतने के लिए बीजेपी ने कई दाव खेले है.. जिसमें से एक 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा और मिशन आत्मनिर्भर भी शामिल है।
110 साल पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन’ का उद्घाटन
पीएम मोदी करीब 110 साल पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन’ का उद्घाटन करेंगे, जिसका करीब 125 करोड़ रूपय की लागत से रिडेवलेपमेंट किया गया… पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धरोहर के साथ साथ आधुनिकता की मेल जोड़े इस स्टेशन की ऐतिहासिक पहचान को कायम रखा गया है। इसके जिर्णोधार से पंजाब की जनता को लुभाने में क्या वाकई में मदद मिलेगी। पंजाब को विकास की राह पर ले जाने की पहल तो काफी अच्छी है, लेकिन इसके अलावा बीजेपी की तैयारियां इस बार और मजबूत है। पंजाब में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन चुनावी तैयारियों को देखने के लिए तीन दिनों का दौरा किया था, जहां केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू मिशन आत्मनिर्भर की कमान सौंपी गई। मिशन आत्मनिर्भर, को हम पंजाब की जनता से ज्यादा बीजेपी के आत्मनिर्भर बनने के संघर्ष के तौर पर देख सकते है।
पंजाब में बीजेपी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी
बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है.. बीजेपी ने इन 5 सालों में पंजाब में अपनी नींव मजबूत करने के लिए ऐड़ी से चोटी कै जोर लगा दिया, आज उनके खेमे में कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता कहलाने वाले सुनील जाखड़ है तो वहीं पंजाब की जनता की पसंद कैप्टन अमरिंदर सिंह भी है। बीजेपी ने इन 5 सालो में सबसे ज्यादा चोट कांग्रेस को ही पहुंचाई है, और पंजाब चुनाव की कमान सभालने वाले रवनीत बिट्टू से लेकर पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों भी कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में आये हुए है। यानि की बीजेपी की चाल साफ है कि खुद का चेहरा मजबूत नहीं होगा तो मजबूत चेहरे को ही अपने पाले में ले लिया जाये.. मिशन आत्मनिर्भर के तहत बीजेपी का चलाया जा रहा अभियान दोआबा, माझा और मालवा क्षेत्रों के एससी एसटी वर्ग पर, पंजाब के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और किसानों, और व्यापारियों के साथ साथ जो पहले बार मतदाता बने है, उनपर फोकस किया जा रहा है।
117 सीट पर बीजेपी उमीदवार खड़े करेगी
इन लोगो को बूथ स्तर तक जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इसी बीच पिछले 5 महीनों में पीएम मोदी का ये दूसरा दौरा होने वाला है, वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी पंजाब का दौरा किया.. जो आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का शंखनाद ही माना जा सकता है.. सूत्रों की माने तो बीजेपी इस बार पंजाब की 117 विधानसभा सीटो पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी.. यानि की बीजेपी का पंजाब विजय का मिशन काफी बड़ा है, और तैयारियों भी उसी स्तर पर शुरु हो चुकी है।
पंजाब की सत्ता की चाभी वहां के सिखों और वहां रहने वाले दलितों पिछड़ो और बहुजनों के हाथों में है, जो सरकार बनाने और गिराने की ताकत रखते है, ऐसे में पीएम मोदी का फरवरी में संत रविदास जी के 649वी जयंति के मौके पर जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां का दौरा करना, आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदल कर श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट करना, वहीं जून में के डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास जी महाराज को पद्म श्री से सम्मानित किया जाना, कहीं न कहीं पंजाब में पिछड़े और दलितो को साधने की अच्छी कोशिश हो सकती है। हालांकि अब देखना ये होगा कि 2027 में बीजेपी की इन कोशिशों के बाद चुनाव के फैसले क्या रंग लाते है.. वैसे आपको क्या लगता है क्या बीजेपी वाकई में बंगाल की तरह प्रचंड वापसी कर सकती है?































