Guru Gobind Singh Jora Sahib: 11 जुलाई 2026 को भारत के पीएम नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड के ऑकलैंड दौरे पर थे, जहां उन्होंने प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए स्पेशियली सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ी धरोहर जोड़ा साहिब का जिक्र किया.. उन्होंने न्यूजीलैंड में रहने वाले प्रवासियों को विशेष आग्रह किया कि जब भी वो भारत घूमने आये तो उन्हें पटना में दसवे पातशाह की जन्मस्थल और पांच अकाल तख्तों में से तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के दर्शन करने जरूर जायें। जहां कुछ समय पहले ही करीब 300 साल पुरानी गुरु साहिब की धरोहर को शुशोभित किया गया है, और ये धरोहर है गुरु साहिब के पवित्र चरण पादुका। जिसे पटना साहिब में स्थापित किया गया औऱ नाम है जोड़ा साहिब। अपने इस लेख में जोड़ा साहिब की कहानी को जानेंगे.. कैसे ये गुरु साहिब के जोड़ा साहिब को बचाने के लिए उनके रक्षको ने अपनी जान पर खेल कर रक्षा करते हुए पाकिस्तान से भारत पहुंचाया था।
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300 सालों से हो रही है जोड़ा साहिब की रक्षा
दरअसल जोड़ा साहिब की करीब 300 सालों से रक्षा करने वाला परिवार किसी और का नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का ही है। जिनके पूर्वज गुरु साहिब के खालसा सेना का हिस्सा थे और गुरु साहिब के साथ उन्होंने भी धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने में कोई कसर नही छोड़ी थी। पीएम मोदी ने खुद इस बात का जिक्र किया कि हरदीप सिंह पुरी का परिवार पीढ़ियों से गुरुघर साहिब का सच्चा सेवल रखा है, और उनकी गुरु भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु साहिब ने उनके पूर्वजो को अपना और गुरु साहिब की तीसरी जीवन संगनी माता साहिब कौर जी, जिन्हें खालसा पंथ की आध्यात्मिक माता का दर्जा प्राप्त था, के चरण पादुका भेंट किए थे।
कौन करता है जोड़ा साहिब की रक्षा
इन चरण पादुका को ही जोड़ा साहिब कहा गया और जिन्हें करीब 300 सालों से साक्षात गुरु साहिब का आर्शिवाद मानकर पुरी परिवार इस अनमोल और पवित्र धरोहर को सहेज कर रख रहे थे। ये गुरु साहिब और माता साहिब कौर को एक एक पैर के चरण पादुका है। हरदीप सिंह पुरी का परिवार जोड़ा साहिब की हिफाजत करने, उनकी सेवा करने और उसे सहेज कर रखने का काम पिछले 3 सदियों से कर रहा है, लेकिन बीते साल पुरी परिवार ने इस प्रस्ताव रखा कि गुरु साहिब की इतनी प्रमुख धरोहर के दर्शन केवल एक उनका परिवार ही क्यों करें, वो तो सभी आम जन के लिए होना चाहिए, इसलिए ये धरोहर सिख संगत को सौंपने का फैसला किया।
पटना में जोड़ा साहिब
जिसके बाद ये फैसला किया जाना था कि जोड़ा साहिब स्थापित कहां किया जाना चाहिए.. काफी सोच विचार कर समिति ने तय किया कि गुरु साहिब की ये धरोहर उस स्थान पर स्थापित होना चाहिए, जहां पहली बार उनके चरण पड़े थे, यानि की पटना में.. पटना में ही 1666 में गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। जहां तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब स्थापित है, .इसी स्थान पर गुरु साहिब के जोड़ा साहिब को स्थापित किया जायेगा, और 1 नवंबर 2025 को पटना में जोड़ा साहिब को सिख परंपरा और संस्कृति के साथ स्थापित किया गया। जहां गुरु साहिब और माता साहिब कौर के चरण पादुको को स्थापित करके अब से केवल भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया भर के सिख संगत जोड़ा साहिब का दर्शन करके गुरु साहिब के साक्षत होने का अनुभव महसूस कर सकते है।
जब रक्षा करने के लिए लगाई जान की बाजी
भारत पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त हरदीप सिंह पुरी का परिवार पंजाब के पश्चिमि हिस्से में रहता था, जब बंटवारा हुआ तो उन्होने पाकिस्तान में रहने के बजाय भारत को चुना,, उनका सबकुछ वहीं छूट गया लेकिन अपने साथ लेकर आये गुरु साहिब की अंतिम धरोहर। उस हिंसा के बीच भी उनके परिवार का एक ही मकसद था कि गुरू साहिब की धरोहर को कुछ नहीं होना चाहिए.. वो चोरी छिपे जोड़ा साहिब को दिल्ली ले कर ये और अपने ही घर में सहेज कर रखा। शुरुआत के कई सालों तक वो शरर्णाथी कैंप में रहा करते थे। हरदीप सिंह पुरी का जन्म भी दिल्ली के दरियागंज में स्थित शरणार्थी कैंप में ही 15 फरवरी 1952 को हुआ था। समय के साथ स्थिति बदली और आखिरकार 300 सालो के बाद हर एक सिख को गुरु साहिब की ये अनमोल धरोहर के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। जिसका आग्रह खुद पीएम मोदी ने भी किया है। गुरु साहिब के जोड़ा साहिब के स्थापित होने के बाद सिखों के लिए गुरु साहिब का जन्म स्थान की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है।































