Manmohan Singh News: भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी की नई किताब ‘इंडिया एंड आई’ इन दिनों चर्चा में है। इस किताब में उन्होंने अपने कार्यकाल से जुड़े कई ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए थे। कुरैशी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बातचीत और चुनावी व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी है।
मनमोहन सिंह से जुड़ा भावुक किस्सा| Manmohan Singh News
कुरैशी ने किताब में उस दौर का जिक्र किया है, जब वह चुनाव आयुक्त के पद पर थे। उस समय चुनाव आचार संहिता को लेकर तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और चुनाव आयोग के बीच विवाद हुआ था। इस विवाद के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से कुरैशी के खिलाफ बयानबाजी भी की गई थी। कुरैशी के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम से वह काफी आहत हुए थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने मीडिया के सामने सरकार की पूरी स्थिति रख दी, तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।
कुरैशी ने बताया कि जब यह बात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक पहुंची तो उन्होंने उन्हें मिलने के लिए बुलाया। बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह काफी भावुक हो गए और उन्होंने कहा, “अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं सुसाइड कर लूंगा।” कुरैशी के अनुसार, एक प्रधानमंत्री के मुंह से ऐसी बात सुनना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला और भावनात्मक पल था।
‘मेरे कार्यकाल में विपक्ष के लिए दरवाजे खुले थे’
किताब में कुरैशी ने चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता को लेकर भी अपनी बात रखी है। मौजूदा चुनाव आयोग पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में विपक्ष को खास महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि विपक्षी दलों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहें। कुरैशी ने बताया कि उस समय विपक्ष में बीजेपी थी और निष्पक्ष रवैये का फायदा उसे भी मिला।
उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली भी एक समय उनके आलोचक थे, लेकिन बाद में उनके काम को देखकर उनके समर्थक बन गए थे। कुरैशी ने मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आज 20 से 23 विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं, तो यह संकेत है कि उन्हें आयोग में पर्याप्त सम्मान और जगह नहीं मिल रही है।
IIIDEM को लेकर मोदी सरकार की तारीफ
कुरैशी ने चुनाव प्रबंधन से जुड़ी संस्था IIIDEM (India International Institute of Democracy and Election Management) को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनके रिटायर होने से कुछ समय पहले अमेरिकी संस्था IFES के साथ एक समझौता (MOU) हुआ था। बाद में अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान इस समझौते को लेकर विवाद सामने आए, लेकिन भारत सरकार ने इसे जारी रखा और IIIDEM को और मजबूत किया।
पंजाब ड्रग्स मामले का भी किया जिक्र
कुरैशी ने 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उस समय राज्य में ड्रग्स का मुद्दा काफी बड़ा चुनावी विषय बना हुआ था। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था और पंजाब में बढ़ती ड्रग्स समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।































