ममता के नारे पर शुभेंदु का सर्जिकल स्ट्राइक! 16 अगस्त से खत्म होगा ‘खेला होबे’, बीजेपी ने बनाया नया प्लान| West Bengal politics

Nandani | Nedrick News West Bengal Published: 13 जुलाई 2026, 11:36 PM Updated: 13 जुलाई 2026, 11:36 PM
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West Bengal politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नारे सिर्फ चुनावी हथियार नहीं होते, बल्कि कई बार वही सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक लड़ाई का मैदान बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के चर्चित नारे ‘खेला होबे’ के साथ हुआ था। यह नारा इतना लोकप्रिय हुआ कि बंगाल से निकलकर देश के कई राज्यों तक पहुंच गया। लेकिन अब इसी नारे को लेकर बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा राजनीतिक पलटवार किया है।

शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि अब 16 अगस्त को पश्चिम बंगाल में ‘खेला होबे दिवस’ नहीं मनाया जाएगा, बल्कि इस दिन को ‘आयुष्मान दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में अब किसी तरह का ‘खेला-वेला’ नहीं होगा।

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‘खेला होबे’ से ‘आयुष्मान दिवस’ तक की सियासी लड़ाई| West Bengal politics

2021 के चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ‘खेला होबे’ नारे के जरिए बीजेपी के खिलाफ आक्रामक चुनावी अभियान चलाया था। चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 16 अगस्त को आधिकारिक तौर पर ‘खेला होबे दिवस’ घोषित किया था। इस मौके पर सरकारी स्तर पर फुटबॉल बांटे जाने और खेल आयोजनों की शुरुआत की गई थी। अब शुभेंदु अधिकारी ने इसी फैसले को निशाने पर लेते हुए कहा है कि 16 अगस्त का दिन उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि इतिहास को याद करने का दिन है।

16 अगस्त 1946 की घटना का किया जिक्र

शुभेंदु अधिकारी ने अपने बयान में 16 अगस्त 1946 की घटना का जिक्र किया, जिसे इतिहास में ‘द ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह दिन कोलकाता के इतिहास का एक बेहद दर्दनाक अध्याय है। उन्होंने कहा कि उस समय अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी थे और उनके शासनकाल में हुए सांप्रदायिक दंगों ने देश के विभाजन की पृष्ठभूमि को और भयावह बना दिया था। शुभेंदु का कहना था कि ऐसे ऐतिहासिक दिन को किसी राजनीतिक उत्सव के रूप में मनाना सही नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार जाने-अनजाने में बंगाल के इतिहास के एक काले अध्याय वाले दिन को ‘खेला होबे’ के नाम से जोड़ रही थी। अब बीजेपी की सरकार बनने पर इसे बदला जाएगा।

महिलाओं और गरीबों को साधने की कोशिश

शुभेंदु अधिकारी ने सिर्फ ‘खेला होबे दिवस’ का विरोध नहीं किया, बल्कि इसके साथ ही ममता बनर्जी के मजबूत जनाधार यानी महिलाओं और गरीब वर्ग को साधने की कोशिश भी की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार बदलने के बाद भी जनता की कल्याणकारी योजनाएं बंद नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि 70 साल से ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिन लोगों की उम्र 70 साल से कम है और जो किसी कारण से आयुष्मान भारत योजना के दायरे में नहीं आ पाएंगे, उनके लिए राज्य सरकार अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करेगी। यानी लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

अन्नपूर्णा योजना को लेकर भी बड़ा दावा

शुभेंदु अधिकारी ने महिलाओं के लिए चल रही अन्नपूर्णा योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 35 से 40 हजार महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त तक योजना के लाभार्थियों का सत्यापन किया जाएगा और जो लोग वास्तव में पात्र पाए जाएंगे, उन्हें आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।

फिलहाल 16 अगस्त को लेकर शुरू हुई यह सियासी बहस सिर्फ एक दिन के नाम बदलने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए बीजेपी और टीएमसी दोनों ही बंगाल के इतिहास, योजनाओं और वोट बैंक की राजनीति को अपने-अपने तरीके से साधने की कोशिश कर रहे हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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