सिखों को जीने की राह दिखाने वाला वो पवित्र ग्रंथ, जिसके बारे में आज भी लोग हैं अंजान – Guru Granth Sahib

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 06 Jun 2026, 07:40 AM | Updated: 06 Jun 2026, 07:40 AM

Guru Granth Sahib: हिंदू धर्म में भविष्यपुराण के जरिये लोगों के भविष्य के बारे में गणना की जाती है, जिसमें ज्योतिषविद्या भी उसका ही हिस्सा माना जाता है, लेकिन कई बार ये ज्योतिषविद्याएं गलत भी साबित हुए मगर सिख धर्म में एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें सिखो के भविष्य के लिए न केवल भनिष्यवाणी की गई बल्कि सिखो को कैसा आचरण रखना चाहिए औऱ उन्हें कैसे जीना चाहिए उसकी भी सीख दी गई है। सिखों के पवित्र ग्रंथो में से एक है सौ साखी.. जो पिछले 300 सालों से सिख धर्म को और आगे बढ़ाने औऱ मजबूती से खड़ा करने की सीख देती है। अपने इस लेख  में हम सौ साखी के बारे में पूर्ण इतिहास के बारे में जानेंगे, जिसके बारे में आज भी लोग अंजान है। क्या है सौ साखी का इतिहास, और कैसे ये पांच टुकड़ो में बंट गया.. क्या हुआ इसके बटने का नतीजा.. सौ साखी की वो भविष्वाणियां, जो सच हुई.. और कौन सी भविष्य अभी पूरी होनी बाकी है।

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100 साखी का इतिहास

दरअसल 100 साखी शुरुआत में 100 साखी थी ही नहीं बल्कि ये 500 कहानियों का एक संग्रहित किया हुआ ग्रंथ था, और इस ग्रंथ का शीर्षक ‘पंज सौ साखी’ हुआ करता था।  जिसे बाद में 5 अलग अलग हिस्सों में बांटा गया था, और इसे सौ साखी कहा गया, जिसके आज भी पांच अलग अलग भाग है। सौ साखी को  गद्य के लिए हिंदी और पद्य के लिए पंजाबी भाषा का इस्तेमाल करके लिखा गया था, जो कि लगभग  1724-1734  मध्य में लिखा गया था. हालांकि कई इतिहासकार मानते है कि सौ साखी दसवी पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी ने खुद लिखी थी, लेकिन इस बात में दो मत है.. इतिहासकार  प्रतिभा चावला मानती है कि सौ साखी की कृति असल में गुरु साहिब की शैली से मेल ही नहीं खाती, जैसा कि उनके लिखे ग्रंथो की शैली है।

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दसवे गुरु गुरु गोविंद सिंह जी के अनुयायी

भले ही इसकी लिखित रचना की डेटिंग 1724 के आसपास की हो, लेकिन इसे लिखने का श्रैय जाता है 15वी सदी में प्रथम गुरु के पहले सिखों में से एक बाबा बुद्ध के वंशज भाई राम कंवर की रचनायें है। जिसे उन्होंने लेखक साहिब सिंह के लिखवाया था। दरअसल भाई गुरबख्श सिंह, जिन्हें भाई राम कुंवर के भी नाम से जाना जाता है जो कि 1672 में जन्मे थे और वो दसवे गुरु गुरु गोविंद सिंह जी के अनुयायी और विद्वान सदस्य में से एक थे, जिन्होंरे करीब से गुरु साहिब के बाणियों को सुना और समझा था..उन्होंने ये साखी अपने मुंशी  साहिब सिंह से लिखवाया था।

इसलिए सौ साखी को भाई राम कुंवर के व्यक्तिगत ज्ञान पर आधारित ग्रंथ माना जाता है। सौ साखी में दसवे गुरु के जीवन से जुड़े कई वृतांत को शामिल किया गया, जो धार्मिक सिद्धांतों, आचार संहिता और राजनीतिक घटनाओं के बारे में बताते है। इसके अलावा कई भविष्यवाणियां को बारे में भी बताई गई थी, जो काफी हद तक सही भी साबित हुई। इन साखियों को  गुरु रतन मल जिसका अर्थ है  गुरु के रत्नों की माला के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि समय के साथ इसमें हुए बदलावो के कारण कई हिस्से खो गए या नष्ट हो गये है। जिसके कारण इसके  मौजूदा पांडुलिपियों के साखियों में काफी भिन्नतायें आ गई है, जिसके कारण इसकी विश्वसनियता को 100 प्रतिशत प्रमाणित नहीं किया गया है।

हालांकि पांडुलिपियों में 1724 या 1734 का ही जिक्र है, इसलिए इसे उस समय ही लिखा गया होगा ऐसा माना जाता है। लेकिन इन साखियों में गुरु गोविंद सिंह के भविष्यवाणियों के बारे में भी लिखा गया है जिसमें 1801 में सिख सम्राज्य की स्थापना करने वाले महाराजा रणजीत सिंह जी का,  रानी सदा कौर और रणजीत सिंह की मुस्लिम पत्नी मोरन के बारे में लिखा हुआ है। साथ ही रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र दलिप सिंह द्वारा फिर से सिख सम्राज्य की स्थापनी की भविष्यवाणी  सर अत्तर सिंह ने भदौर ने 1873 में सौ साखी के भविष्वाणियों के कुछ अंश का इंग्लिश संस्करण करवाया था और इसे वाराणसी में प्रकाशित भी करवाया था।

जिसके कारण अंग्रेजो ने कभी दलीप सिंह को भारत न आने देने और न उनकी मां से मुलाकात करने देने की कोशिश की थी।  साहित्यिक दृष्टि से, सौ सखी एक मिश्रित रचना है जिसमें भविष्वाणी का अंश काफी कम है, जबकि कई कहानियाँ उपदेशात्मक उद्देश्य से हैं, जो सिखों को सही रास्ते पर चलने और धर्म का साथ देने के लिए प्रेरित करता है, साथ ही कुछ कहानियों में  गुरु गोविंद सिंह के नेतृत्व में सिख लड़ाको द्वारा लड़े गए कई युद्धों का वर्णन है, जो सिखों की बहादुरी और साहस को दर्शाने के लिए है। साथ ही सिख आचार संहिता है, सांसारिक ज्ञान और कूटनीति पर चर्चा है।

दुख की बात ये है ये कि समय के साथ कुछ लेखको ने इसमें मनगढ़ंत कहानियां दर्शाई गई, गलत बातें बता कर छापी गई.. इसलिए सौ साखी का इस्तेमाल बेहद सावधानी पूर्वक होना चाहिए, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इसमें कई ऐसे बदलाव किये गए है जो स्वीकार्य है ही नहीं। क्या आपने सौ साखी पढ़ी है, तो हमें कमेंट करके बतायें कि आपको कौन सी बात सहीं और कौन सी बात गलत लगी।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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