India–Maldives Relation: मालदीव ने भारत को दिए गए 50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल का भुगतान कर दिया है। इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने की है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश पर बढ़ते बाहरी कर्ज के बोझ को कम करने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। यह भुगतान ऐसे समय में हुआ है जब कुछ समय पहले तक भारत और मालदीव के बीच राजनीतिक रिश्तों में हल्की तल्खी देखने को मिल रही थी। हालांकि अब दोनों देशों के बीच सहयोग और समझदारी फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही है।
कैसे मिली थी मालदीव को मदद| India–Maldives Relation
दरअसल, भारत ने मालदीव को ट्रेजरी बिल्स (T-Bills) के जरिए आर्थिक सहायता दी थी। ये सहायता भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के माध्यम से दी गई थी, जिसने मालदीव सरकार के T-Bills खरीदे थे। ट्रेजरी बिल एक तरह का अल्पकालिक सरकारी कर्ज होता है, जिसके जरिए सरकारें अपनी तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करती हैं। मालदीव के मामले में यह मदद विदेशी मुद्रा संकट और बजट घाटे से निपटने के लिए काफी अहम साबित हुई।
राष्ट्रपति मुइज्जू का बयान
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने बताया कि उनकी सरकार ने इस कर्ज को चुकाने की प्रक्रिया तेज की है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 2019 में भारत से 50 मिलियन डॉलर के T-Bills लिए थे और बजट घाटे को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल किया था।
उनके मुताबिक, पिछली सरकार के अनुरोध पर इन बिलों का भुगतान हर साल आगे बढ़ाया जाता रहा, जिससे देश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता गया। मुइज्जू ने बताया कि उनकी सरकार ने जनवरी 2024 में पहला 50 मिलियन डॉलर का T-Bill चुका दिया था और अब दूसरा भी चुका दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में एक और भुगतान किया जाएगा।
पिछली सरकार पर आरोप
राष्ट्रपति मुइज्जू ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “हमने देश को उस 150 मिलियन डॉलर के कर्ज के जाल से बाहर निकालने की कोशिश की है, जिसे पिछली सरकार ने बढ़ाया था।” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से ज्यादा स्थिर बनाना है, ताकि भविष्य में इस तरह की वित्तीय निर्भरता कम हो सके।
भारत की लगातार मदद
भारत ने 2019 से मालदीव को लगातार वित्तीय सहायता दी है। इस सहायता के तहत SBI ने बिना भारी ब्याज के T-Bills को रोल ओवर किया, जिससे मालदीव को विदेशी मुद्रा संकट और राजकोषीय दबाव से राहत मिलती रही। यह कदम भारत की पड़ोसी देशों के साथ सहयोग नीति का हिस्सा माना जाता है, जिसमें छोटे देशों को आर्थिक स्थिरता देने पर जोर दिया जाता है।
रिश्तों में सुधार के संकेत
मुइज्जू के कार्यकाल की शुरुआत में भारत और मालदीव के रिश्तों में तनाव देखा गया था, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। कर्ज भुगतान और आर्थिक सहयोग जैसे कदम दोनों देशों के बीच भरोसा फिर से मजबूत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक वित्तीय भुगतान नहीं, बल्कि भारत और मालदीव के रिश्तों में स्थिरता और नए भरोसे की दिशा में एक अहम कदम है। कुल मिलाकर, 50 मिलियन डॉलर का यह भुगतान दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है।




























