Mamata Banerjee News: ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। 293 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और राज्य में पहली बार अपनी सरकार बना ली। चुनाव नतीजों के बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।
हालांकि चुनाव हारने के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। आमतौर पर यह परंपरा रही है कि चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री खुद राज्यपाल से मिलकर कैबिनेट का इस्तीफा सौंपते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। बाद में राज्यपाल ने ममता सरकार और उनकी कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव, लेकिन ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ नहीं लिखा
शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण के कुछ समय बाद ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव किया। उन्होंने ‘X’ और फेसबुक से “माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल” हटाकर नया परिचय जोड़ा। अब उनके प्रोफाइल में उन्हें अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की 15वीं, 16वीं और 17वीं विधानसभा की मुख्यमंत्री बताया गया है।
दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने कहीं भी खुद को “पूर्व मुख्यमंत्री” नहीं लिखा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
2011 में खत्म किया था वाम दलों का लंबा शासन| Mamata Banerjee News
ममता बनर्जी ने साल 2011 में पश्चिम बंगाल में वाम दलों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी। इसके बाद लगातार तीन विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की और ममता राज्य की सबसे मजबूत राजनीतिक नेता बनकर उभरीं। लेकिन इस बार भाजपा ने चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार भाजपा राज्य की सत्ता तक पहुंची है।
चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि करीब 100 सीटों पर धांधली और हेरफेर हुई, जिसकी वजह से उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी मतदान और मतगणना के दौरान केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए। हालांकि चुनाव आयोग और भाजपा ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कराए गए।
विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील
राजनीतिक हार के बावजूद ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का संकेत दिया है। भाजपा सरकार के गठन वाले दिन ही उन्होंने सभी विपक्षी दलों से एक मंच पर आने की अपील की। रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर कालीघाट स्थित अपने आवास के बाहर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि वामपंथी, धुर-वामपंथी दलों, छात्र संगठनों और गैर सरकारी संस्थाओं को भाजपा के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह सोचने का समय नहीं है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त है। हमारा पहला राजनीतिक विरोधी भाजपा है।” ममता ने यह भी कहा कि अगर कोई भी राजनीतिक दल उनसे बातचीत करना चाहता है तो वह चर्चा के लिए तैयार हैं। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब राज्य की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है।
और पढ़ें: जब दुश्मन बने साथी! तमिलनाडु में विजय को रोकने के लिए DMK–AIADMK गठबंधन की आहट | Tamil Nadu Politics




























