1 मई को करें ये काम, चमकेगी सोई हुई किस्मत और दूर होंगे सारे कष्ट! Buddha Purnima 2026

Rajni | Nedrick News India Published: 30 अप्रैल 2026, 11:09 AM Updated: 30 अप्रैल 2026, 11:09 AM
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Buddha Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा को हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे भगवान विष्णु के नौवें अवतार (बुद्ध) के रूप में पूजा जाता है, वहीं बौद्ध अनुयायियों के लिए यह ‘त्रिविध पावन’ दिन है क्योंकि इसी तिथि को बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण हुआ था। इस साल यह पर्व 1 मई को मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ हिंदू धर्म ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।

मान्यता है कि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ था। वहीं हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपना नौवां अवतार बुद्ध के रूप में इसी दिन लिया था।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, रवि योग का बनना इस बुद्ध पूर्णिमा के महत्व को और बढ़ा देता है। रवि योग को शास्त्रों में बहुत प्रभावशाली माना गया है क्योंकि इसमें सूर्य की ऊर्जा का विशेष प्रभाव होता है, जो कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर कर सफलता और सिद्धि दिलाता है। इसके साथ ही आपने डॉ. अनीष व्यास के संदर्भ से जो तिथि और योग की बात कही है, वह इस जानकारी को और भी विश्वसनीय बनाती है।

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क्या है इस दिन का महत्व?

बुद्ध पूर्णिमा के दिन लोग पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य करते हैं। कई लोग सत्यनारायण कथा करवाते हैं, चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति मिलती है। इस दिन लोग गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। जो लोग वहां नहीं जा पाते, वे घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं।

क्या करें बुद्ध पूर्णिमा पर? (Buddha Purnima 2026)

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • भगवान बुद्ध और भगवान विष्णु की पूजा करें
  • गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें
  • रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें

धार्मिक मान्यता है कि इन कामों को करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

खास मान्यताएं

स्कंद पुराण के अनुसार, वैशाख मास के अंतिम तीन दिनों को ‘पुष्करिणी’ कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग पूरे वैशाख माह में नियम-संयम नहीं रख पाते, वे यदि इन अंतिम तीन दिनों (त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा) में भी पवित्र स्नान और दान करते हैं, तो उन्हें पूरे महीने की भक्ति के समान पुण्य प्राप्त होता है।

कब है पूर्णिमा तिथि? (Buddha Purnima 2026)

इस बार पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 को रात 9:13 बजे से शुरू होकर 1 मई को रात 10:53 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, पर्व 1 मई को ही मनाया जाएगा। कुल मिलाकर बुद्ध पूर्णिमा आस्था, शांति और दया का संदेश देने वाला पर्व है। इस दिन लोग भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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