Petrol Diesel Excise Duty Cut 2026: अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत पर भी दिखने लगा है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी ने भारत में महंगाई को हवा दी है। जहाँ एक तरफ चारों ओर से महंगाई की मार ने आम आदमी को घेर रखा है, जिससे घर की रसोई से लेकर बाहर वाहन चलाने तक का बजट बिगड़ गया है। चौतरफा आर्थिक दबाव झेल रही जनता को बड़ी राहत देते हुए भारत सरकार ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) घटाकर सरकार ने जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने की कोशिश की है। एक्साइज ड्यूटी में कटौती के इस फैसले से न सिर्फ पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा, बल्कि आम आदमी को महंगाई के इस हमले से थोड़ी सांस लेने की फुर्सत मिलेगी।
क्या बदला है?
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि सरकार के नए फैसले के मुताबिक पेट्रोल पर एक्स्ट्रा एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, डीजल पर यह टैक्स 10 रुपये से घटाकर पूरी तरह 0 रुपये कर दिया गया है। यानि कागज पर देखें तो सरकार ने काफी बड़ी राहत दी है।
ऐसा फैसला क्यों लेना पड़ा?
दरअसल, ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच चल रहे तनाव की वजह से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) पर नाकाबंदी कर दी है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल सप्लाई रास्ता है, जहां से रोजाना करीब 20–25 मिलियन बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में गैस भेजी जाती है। इस रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश पर पड़ता है।
ATF पर नया टैक्स और इसका असर
सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी ‘स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी’ (SAED) लगाने का फैसला किया है।
- टैक्स का गणित: शुरुआत में यह टैक्स काफी अधिक प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे संशोधित कर ₹5 प्रति लीटर (कुछ विशेष परिस्थितियों में बदलाव के साथ) के स्तर पर देखा जा रहा है।
- हवाई सफर पर असर: चूंकि किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का करीब 40% हिस्सा सिर्फ ईंधन (ATF) पर खर्च होता है, इसलिए टैक्स बढ़ने का सीधा असर हवाई टिकटों की कीमतों पर पड़ सकता है।
- सर्ज चार्ज: हाल ही में एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए घरेलू उड़ानों पर 400 तक का फ्यूल सरचार्ज लगाने का ऐलान किया है।Petrol Diesel
तेल कंपनियों के लिए बड़ी राहत
सरकार ने कुछ और फैसले भी लिए हैं, पेट्रोल और डीजल पर कुछ टैक्स कम या खत्म किए गए एक्सपोर्ट (निर्यात) पर भी राहत दी गई, 2022 में लागू विंडफॉल टैक्स को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। इन फैसलों से सबसे ज्यादा फायदा तेल कंपनियों को होगा, जो इस समय भारी नुकसान झेल रही हैं। सरकार के इन फैसलों का सबसे बड़ा फायदा देश की तेल कंपनियों (जैसे Reliance, ONGC, IOCL) को मिलने वाला है:
- विंडफॉल टैक्स का अंत: सरकार ने जुलाई 2022 में घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर लगाए गए विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को अब पूरी तरह खत्म कर दिया है।
- एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती: पेट्रोल और डीजल के निर्यात (Export) पर लगने वाले टैक्स को भी हटा दिया गया है, जिससे कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगी।
- घाटे की भरपाई: कच्चे तेल की कीमतें $120 के पार होने से सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) प्रति लीटर भारी नुकसान उठा रही थीं। टैक्स में कटौती से उनके इस ‘अंडर-रिकवरी’ (घाटे) की भरपाई हो सकेगी।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
अब सबसे बड़ा सवाल क्या आपको पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलेगा? सीधी बात करें तो अभी इसकी संभावना कम है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बहुत महंगा हो चुका है, भारतीय तेल कंपनियां हर लीटर पर करीब 48.8 रुपये का नुकसान उठा रही हैं, सरकार ने जो टैक्स कम किया है (करीब 10 रुपये), उससे कंपनियां अपना घाटा कम करेंगी। यानी आम आदमी के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आग लगी होने के बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रहेंगे और बढ़ेंगे नहीं।
आम आदमी के लिए इसका मतलब
सरकार के इस बड़े कदम का सीधा मतलब यह है कि फिलहाल आपकी जेब से पेट्रोल-डीजल के लिए ज़्यादा पैसे नहीं निकलेंगे, लेकिन तुरंत दाम कम होने की उम्मीद भी कम है। सरकार ने यह सुरक्षा कवच (Tax Cut) इसलिए तैयार किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की आग घरेलू कीमतों को न झुलसाए। अब असली राहत तभी मिलेगी, जब खाड़ी देशों में तनाव कम होगा और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आएंगी। कुल मिलाकर यह फैसला आम लोगों से ज्यादा तेल कंपनियों को राहत देने वाला माना जा रहा है, ताकि देश में सप्लाई बनी रहे और बड़ा संकट न आए।































