Guru Granth Sahib: अगर आपसे पूछे कि सिख धर्म असल में क्या है? क्यों सिख धर्म दुनिया के बाकि धर्मों से अलग है और आखिर क्यों सिख धर्म सबसे खास है.. तो आपको जवाब क्या होगा.. सवाल जितना आपको उलझा सकता है इसका जवाब उतना ही साधारण और आसान है। सच तो ये है कि सिख धर्म कोई धर्म को प्रदर्शित करने के बजाय एक ऐसी सोच को दर्शाता है, जिसने एक सामाजिक बराबरी वाले समाज की नींव रखी थी.. जिसने अँधविश्वास से उठ कर वास्तविकता को बढ़ावा दिया था। जिसने आंडबरो से उठकर केवल मानवता को ही सबसे बड़ा धर्म माना था.. पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में बताया गया कि गुरु साहिबानों की विचारधारा को मानने के लिए व्यक्ति का क्या सिख बनना जरूरी है..सिख असल में है कौन और क्या दी है गुरु साहिबानों ने सिखों की परिभाषा। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे बिना सिख धर्म अपनाये भी कोई व्यक्ति सिख बन कर जी सकता है।
सिख कौन है? – Who is a Sikh?
गुरु साहिब ने बताया कि सिख का मतलब होता है सिखने वाला.. छात्र..हर वो छात्र जो गुरु साहिबानों की, गुरु ग्रंथ साहिब में बताये गुरु के रास्ते का अनुसरण करके उसपर चलें, वो ही सिख है। इसके लिए विशेष रूप से सिख धर्म में परिवर्तिन होने की बात कही भी मेंशन नहीं है। यहीं कारण था कि दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के पंज प्यारों में बिना शर्त के हिंदू शिष्यों को भी शामिल किया गया था। जरूरी था कि उसमें सिख धर्म के लिए, मानवती की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने का जूनून हो। वो केवल वैचारिक तौर पर भी सिख हो सकता है। सिख धर्म में गुरु साहिबानो की बात मानने के लिए कभी भी न तो उन पर दवाब डाला गया और न ही धर्म बदलने के लिए.. लेकिन फिर भी सिख धर्म दुनिया का सबसे खास धर्म बनता जा रहा है।
सिख बनने के लिए क्या जरूरी बताया गया
गुरू ग्रंथ साहिब में सिख धर्म को मानने के लिए कुछ अवधारणायें तय की गई है.. जो ये बताते है कि सही मायने में सिख वो नहीं है जो किसी धर्म को छोड़ कर सिख धर्म में आये और फिर सिख धर्म अपना कर कहे कि वो सिख है.. गुरु नानक देव जी ने कभी भी धर्म परिवर्तन करके धर्म बदलने के बजाये उस विचारधारा को अपना के लिए कहा था जो उन्होंने एक सच्चे सिख के लिए बताई थी। गुरु ग्रंथ साहिब कहता है कि चाहे कोई किसी भी धर्म का हो, किसी भी संप्रदाय का हो, अगर वो गुरु परंपरा को फॉलो कर रहा है।
गुरुओ की उन बातों का शब्द ब शब्द अनुसरण कर रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति सच्ची श्रद्धा रखता है, कीरत करता है, नाम सिमरन करता है, ईमानदारी से कमा कर सबके साथ बांटकर खाता है, अपने धर्म में रह कर भी रेगुलर गुरुद्वारा जाकर संगत सेवा करता है, और सिख धर्म की सबसे बड़ा पिलर.. जो व्यक्ति जातपात पर भरोसा न करता हो, और मूर्ती पूजा छोड़कर इक ओंमकार के कॉंसेप्ट को फॉलो करता है, सबको बराबर समझता हो.. वो बिना अपना धर्म त्यागे भी सच्चा सिख कहलाता है। इस लिए हम कह सकते है कि सिख धर्म एक धर्म होने से पहले एक मजबूत विचारधारा रही है.. जिसे फॉलो करने वाले खुद ही सिख बन जाते है।
गुरु नानक देव जी क्या ज्ञान
अक्सर लोगो को ये गलत फहमी हो जाती है कि गुरु साहिब ने सिख धर्म के प्रचार प्रसार के लिए अलग अलग देशों में यात्रायें की थी, लेकिन सच ये है कि वो किसी धर्म का प्रचार प्रसार नहीं कर रहे थे.. वो तो केवल उस विचारधारा का प्रचार कर रहे थे, जिनसे लोग भटक गए थे। उन्होंने किसी से धर्म बदलने को नहीं कहा…उन्होंने तो सहीं मायने में उनके धर्म का सही अर्थ बताया था.. जैसे कि इस्लाम का सही अर्थ क्या है..इस्लाम क्या सिखाता है, वाकई में कैसे आप नमाज करें या कैसे फास्टिंग करना चाहिए।
जैसी कई बातें बता कर उन्होंने लोगो का मार्गदर्शन किया था। केवल इस्लाम को लेकर ही नई गुरु ग्रंथ साहिब में हिंदू धर्म को सही मायने में समझाने की भी कोशिश की है.. उन्होंने बताया है कि कैसे आप अपने आराध्य कृष्ण, राम और शिव को देखियें। कुल मिलाकर हम ये कह सकते है कि जरूरी नहीं कि सिख विचारधारा को मानने के लिए सिख धर्म अपनायें, गुरु साहिबानों के रास्ते पर चल कर भी व्यक्ति सच्चा सिख कहला सकता है।































