Ancient Punjab Geography: आपने कई विदेशी आक्रमणकारियों की कहानी भारतीय इतिहास की किताबों में पढ़ी होगी..जिसमें इस्लामिक, अफगानी शासको के साथ साथ विश्व विजेता के नाम से विख्यत सिकंदर महान भी शामिल है। सिकंदर, जिसने यूनान से चल कर एक एक करके एशिया के की हिस्सों में अपना कब्जा जमाया था लेकिन जब वो भारत में घुसा तो उसे पहली बार समझ आया कि भारत का प्रवेश द्वार किस वीर शासक की निगरानी में है। हालांकि ये बेहद ही दुख की बात है कि पंजाब हमेशा से ही विदेशी आक्रमणकारियों का प्रवेश द्वार रहा,.. अपने इस लेख में हम पंजाब के जरिये विदेशी आक्रमणकारियों की कहानी को जानेंगे साथ ही ये भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर पंजाब की भौगोलिक स्थिति कैसी है जिसके विदेशियों के भारत में इनती आसानी से एंट्री मिलती रही थी।
पंजाब की भौगोलिक स्थिति
जब पंजाब के भौगोलिक स्थिति के बारे में समझेंगे तो आप पाएंगे कि पंजाब असल में उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है। यहां मौजूद दर्रे , खासकर खैबर दर्रे और बोलन दर्रे जैसे दर्रे ऐसे दर्रे है जहां से विदेशी आक्रमणकारियों को मौका मिलता रहा था भारत के आने का। इन दर्रो को बनावट ऐसी है कि उनपर तब सुरक्षा लगाना लगभग नामुमकिन ही था। वहीं पंजाब के दर्रे चीन के सिल्क रूट से जुड़ने का भी सबसे बेहतर जरिया रहे थे, व्यापारिक दृष्टि से पंजाब काफी उपयोगी था।खासकर संसाधनो से परिपूर्ण होने के कारण पंजाब सबसे ज्यादा निशाने पर रहा था।
सिल्क रूट के कारण पंजाब से व्यापार होता था जिसके कारण लुटेरों को इस बात का अंदाजा था कि पंजाब में धन संपदा भी पूरी होगी.. जिससे अक्रमणकारियों ने पंजाब को निशाना बनाना शुरु कर दिया। वहीं पंजाब मध्य एशिया, फारस, अफगानिस्तान के जुड़ा हुआ था, जिसके कारण ये इस्लामिक शासकों, सिकंदर जैसे हमलावरो के लिए भारत में घुसने का पहला पड़ाव भी बना था। ये हमलावरों के लिए सबसे आसान रास्ता बन गया था भारत में लूटपाट मचाने का..साथ ही पंजाब को लूट कर हमलावरो के पास शुरुआत में ही पर्याप्त संसाधन हो जाते थे, कि वो भारत के आंतरिक हिस्सों पर आसानी से हमला कर सकें।
पोरस और सिकंदर के बीच की जंग
सिकंदर महान जिन्हें पूरी दुनिया अलेक्जेंडर द ग्रेट के नाम से जानती है, उसने मात्र 23 साल की उम्र में 334 ईसा पूर्व में अपनी विश्व विजेता बनने का सफर जब यूनान से शुरु किया तो उसने इस अभियान में भारत पहुंचने से पहले मैसिडोनिया, ग्रीस, एशिया माइनर तुर्की, सीरिया, फोनीशिया लेबनान, मिस्र, मेसोपोटामिया, फारस वर्तमान में ईरान, बैक्टीरिया और अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर 326 ईसा पूर्व तक लगभग 10,000 मील की दूरी तय करते हुए 3 महाद्वीपों को जीत लिया था और 326 ईसा पूर्व में भारत में एंट्री करने की तैयारी शुरू की थी।
सिकंदर पोरस से युद्ध करें तो उन्हें हराया
सिकंदर ने भी हिंदूकुश दर्रे को पार करके भारत की धरती पर कदम रखा था, जो कि आज के समय में पाकिस्तान का हिस्सा है। कहा जाता है कि जब सिकंदर काबुल पहुंचा था तब तक्षशिला के राजकुमार ने सिकंदर से मैत्री करके ने लिए 65 हाथियों समेत मंहगे उपहार भेंट किये थे ताकि सिकंदर पोरस से युद्ध करें तो उन्हें हराये। तक्षशिला ने जानबूझ कर सिकंदर की सेना को अनाज से लेकर 5,000 भारतीय सैनिक भी दिये थे… कहते है कि सिकंदर करीब 2 महीनो तक तक्षशिला में रह था, सिकंदर ने अपनी सेना को दो हिस्सो में बांटा..एक हिस्सा गया खैबर दर्रे के पार कबायली विद्रोहियों को कुचलने के लिए भेज दिया और दूसरे हिस्से को सिंधु नंदी पर पुल बनाने के लिए लगा दिया… ताकि सेना आगे बढ़ सकें.. सिकंदर के आगे जो भी नहीं झूका, उसे कुचल दिया गया।
सिकंदर के प्रशिक्षित सेना झेलम नदी पार
लेकिन सिकंदर ने जब राजा पोरस को हथियार डालने को कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया..लेकिन मानसून होने के कारण नावों से भी नदी को पार करना आसान नहीं थी… ऊपर से सिकंदर को खबर लगी थी पोरस के पास अच्छी खासी सेना थी। लेकिन फिर भी सिकंदर पोरस की सेला को चकमा देने में सफल हो गया और तेज आँधी तूफान के बीच सेना से नदी पार करवा दिया। जब तक पोरस संभल पाते तब तक सिकंदर के प्रशिक्षित सेना झेलम नदी पार गई थी। सिकंदर की सेना ने पोरस के हाथियो के आंखो पर हमला कर दिया..जिससे वो पोरस की सेना को नुकसान पहुंचाने लगे थे।
ये लड़ाई पंजाब के जलालपुर में हुई थी। पोरस हाथी पर सवार था लेकिन तब भी सेना के हताहत होने के बाद पोरस ने हथियार डाल दिये..और आत्मसमर्पण स्वीकार कर लिया। लेकिन सिकंदर ने पोरस के साथ कैदियों की तरह नहीं बल्कि एक राजा की तरह बर्ताव किया था, और उन्हें फिर से गद्दी लौटा दी थी..लेकिन पोरस के जवाबी कार्यवाई से सिकंदर की सेना को काफी नुकसान हुआ और यहीं से सिकंदर के सैनिकों का सब्र भी टूट गया। वो सालो से लड़ रहे थे और अब वापिस जाना चाहते थे। सबकी इच्छा को जानने के बाद सिकंदर को गंगा पार करने की इच्छा अधूरी रही और उसे सेना समेत लौटना पड़ा।
पंजाब की धरती पर राज करने वाले पोरस ने पहले ही सिकंदर को इतना कमजोर कर दिया कि वो भारत की धरती में आगे बड़ ही नहीं सका.. नहीं तो शायद तबाही और ज्यादा होती। हालांकि अब काफी हद तक सुरक्षा मजबूत कर दी गई है, ताकि बाहरी हमलो से बचा जा सकें, लेकिन पंजाब के ये हिस्से आज भी सेंसिटिव है, और भारतीय सेना की कड़ी सुरक्षा में है। जिससे पंजाब अब सुरक्षित है।
