Mizoram News: मिजोरम से सामने आया एक मामला अब राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अवैध तरीके से सीमा पार करने और कथित आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है, जिससे जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को विस्तार से खंगाल सके।
क्या हैं आरोप और कौन हैं गिरफ्तार लोग (Mizoram News)
NIA के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक के अलावा यूक्रेन के हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिंस्की विक्टर शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि ये सभी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को हथियार, सैन्य उपकरण और ट्रेनिंग देने में लगे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों में बिना अनुमति दाखिल हुए और भारत-म्यांमार सीमा को अवैध तरीके से पार किया।
ड्रोन ट्रेनिंग और उग्रवाद से जुड़े गंभीर आरोप
NIA का कहना है कि आरोपी म्यांमार पहुंचकर वहां सक्रिय विद्रोही समूहों को ड्रोन आधारित युद्ध की ट्रेनिंग दे रहे थे। इतना ही नहीं, एजेंसी को शक है कि यूरोप से ड्रोन की खेप म्यांमार भेजी जा रही थी, जिसका इस्तेमाल भारत में उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता था।
पूछताछ के दौरान यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी अज्ञात आतंकियों के संपर्क में थे और जातीय सशस्त्र समूहों के साथ जुड़े हुए थे। इस आधार पर सभी सातों के खिलाफ यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं।
यूक्रेन का कड़ा विरोध और रिहाई की मांग
दूसरी तरफ, अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर यूक्रेन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने भारत को आधिकारिक विरोध-पत्र सौंपते हुए अपने नागरिकों की तुरंत रिहाई और कांसुलर एक्सेस की मांग की है।
यूक्रेन का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि उसके नागरिक किसी आतंकी या अवैध गतिविधि में शामिल थे। मंत्रालय के अनुसार, 13 मार्च 2026 को इन नागरिकों को मिजोरम में हिरासत में लिया गया था।
दूतावास को नहीं मिला सीधा एक्सेस
यूक्रेनी दूतावास के मुताबिक 16 मार्च को NIA की विशेष अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें उनके प्रतिनिधि मौजूद थे। हालांकि, उन्हें गिरफ्तार लोगों से सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। अदालत ने हिरासत की अवधि 27 मार्च तक बढ़ा दी है।
यूक्रेन ने यह भी आरोप लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं किया गया और गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना समय पर साझा नहीं की गई।
राजनयिक स्तर पर बढ़ी हलचल
भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेकसांद्र पोलिशचुक ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज से मुलाकात की और विरोध-पत्र सौंपा। उन्होंने अपने नागरिकों की रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की।
यूक्रेन का यह भी कहना है कि मिजोरम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशियों के लिए विशेष परमिट जरूरी होता है और कई बार सीमा की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण अनजाने में गलती हो सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला
फिलहाल यह मामला काफी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भारत की सुरक्षा, सीमा पार गतिविधियां और म्यांमार में चल रहे संघर्ष का पहलू जुड़ा हुआ है। एक तरफ NIA इसे बड़े आतंकी नेटवर्क से जोड़कर देख रही है, वहीं यूक्रेन अपने नागरिकों के साथ अन्याय का आरोप लगा रहा है।
