Anurag Sharma Congress: राजनीति में हर पार्टी की यही कोशिश होती है कि उसके पसंदीदा और भरोसेमंद चेहरे ही सत्ता के शीर्ष पदों पर काबिज रहें, ताकि संगठन से लेकर सरकार तक उनका वर्चस्व कायम रहे। हिमाचल की राजनीति में अनुराग शर्मा का चयन भी कुछ इसी रणनीति की ओर इशारा करता है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। पार्टी ने इस बार कई बड़े और चर्चित नेताओं को पीछे छोड़ते हुए कांगड़ा के नेता अनुराग शर्मा को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। गुरुवार को जैसे ही उनके नाम का ऐलान हुआ, राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। तो चलिए इस लेख के जरिए बताते है कि आखिर कौन हैं अनुराग शर्मा और क्यों आलाकमान ने उन पर इतना बड़ा दांव खेला?
दिग्गजों को पछाड़कर मारी बाजी
राज्यसभा की इस महत्वपूर्ण सीट के लिए कांग्रेस के भीतर कई कद्दावर नेताओं के नाम रेस में थे। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा या प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जैसे कद्दावर चेहरों को मौका मिल सकता है। हालांकि, तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए पार्टी हाईकमान ने ‘भारी-भरकम’ नामों को दरकिनार कर अनुराग शर्मा के नाम पर मुहर लगाकर सबको हैरान कर दिया। यह फैसला संगठन में एक नए शक्ति समीकरण के उदय का संकेत है।
मुख्यमंत्री सुक्खू के करीबी
अनुराग शर्मा फिलहाल कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। उन्हें सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी भी माना जाता है। वह लंबे समय से संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं और 1995 से कांग्रेस के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता का उन्हें इनाम मिला है। विशेष रूप से कांगड़ा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले में संगठन को मजबूती देने में उनकी भूमिका अहम रही है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
कांगड़ा जिले के बैजनाथ से संबंध रखने वाले अनुराग शर्मा का सियासी सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने एनएसयूआई से अपनी राजनीति की शुरुआत की और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में अपनी पहचान बनाई। संगठन में लंबे समय तक काम करने के कारण उन्हें जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है। वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव भी रह चुके हैं और हाल ही में उन्हें कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था।
राजनीति के साथ खेल और पर्यटन से भी जुड़ाव
अनुराग शर्मा सिर्फ राजनीति तक ही सीमित नहीं हैं। वह इंटरनेशनल बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। बीड़-बिलिंग दुनिया के मशहूर पैराग्लाइडिंग स्थलों में गिना जाता है। इस वजह से उनका जुड़ाव पर्यटन और खेल गतिविधियों से भी रहा है। शिक्षा की बात करें तो वे बीए पास हैं और पेशे से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से भी जुड़े रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनका सामाजिक नेटवर्क काफी मजबूत माना जाता है।
परिवार से भी मिली राजनीतिक विरासत
अनुराग शर्मा का राजनीतिक झुकाव उनके परिवार से भी जुड़ा रहा है। उनके पिता प्यारे लाल शर्मा पहले बीडीसी चेयरमैन रह चुके हैं और लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने अनुराग शर्मा को राजनीति में शुरुआती आधार दिया।
आखिर क्यों मिला मौका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने इस बार एक जमीनी और संगठन में लंबे समय से काम कर रहे नेता पर दांव लगाया है। साथ ही कांगड़ा क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने और संगठन में संतुलन बनाने की रणनीति भी इस फैसले के पीछे मानी जा रही है।
इसके अलावा पिछले अनुभव से भी पार्टी ने सबक लिया है। साल 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बनाए जाने के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। उस समय पार्टी के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर दिया था। ऐसे में इस बार कांग्रेस ने राज्य के ही एक जमीनी नेता को मौका देकर कार्यकर्ताओं को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
