Israel Surgical Strike: मिडिल ईस्ट में हालिया घटनाओं के बाद एक बार फिर इजरायल की सर्जिकल स्ट्राइक क्षमता चर्चा में है। माना जाता है कि इजरायल का हमला सिर्फ बम गिराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह खुफिया नेटवर्क, एडवांस टेक्नोलॉजी और लंबी रणनीतिक तैयारी का नतीजा होता है। यही वजह है कि उसके ऑपरेशन अक्सर बेहद सटीक माने जाते हैं।
खुफिया नेटवर्क: ऑपरेशन की असली नींव| Israel Surgical Strike
इजरायल की बाहरी खुफिया एजेंसी Mossad और सेना की इंटेलिजेंस शाखा सालों तक दुश्मन देशों में जानकारी जुटाने का काम करती हैं। एजेंट्स की तैनाती, स्थानीय नेटवर्क, सिग्नल इंटरसेप्ट और डिजिटल जासूसी… ये सब मिलकर एक बड़ा डेटा बैंक तैयार करते हैं।
बताया जाता है कि कई बार लक्ष्य पर हमला करने से पहले महीनों, बल्कि वर्षों तक निगरानी रखी जाती है। हथियारों और ड्रोन सिस्टम को पहले से छिपाकर रखने, स्थानीय स्रोतों से रीयल-टाइम इनपुट लेने और दुश्मन की एयर डिफेंस को समझने का काम चुपचाप चलता रहता है।
जॉइंट प्लानिंग: अमेरिका-इजरायल का तालमेल
हालिया हमलों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति सामने आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना और इजरायली डिफेंस फोर्सेज ने महीनों तक खुफिया जानकारी साझा की।
सूत्रों के मुताबिक, यह ऑपरेशन “टारगेट ऑफ ऑपर्च्युनिटी” पर आधारित था यानी जब शीर्ष नेतृत्व एक ही जगह मौजूद हो, तभी वार किया जाए। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हमला सुबह 8:15 बजे दिन के उजाले में किया गया, क्योंकि रात में एयर डिफेंस ज्यादा सतर्क रहती है।
कौन-कौन सी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल हुई?
इजरायल ने अपने F-35I “अदिर” स्टेल्थ फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया, जो रडार से बचते हुए दुश्मन के एयरस्पेस में घुस सकते हैं। इनके साथ F-15I जेट्स ने भी भागीदारी की।
बमों में GBU-28 जैसे बंकर बस्टर शामिल थे, जो मजबूत इमारतों और भूमिगत कमरों को भेद सकते हैं। SPICE और JDAM जैसे प्रेसिजन गाइडेड म्यूनिशन GPS जाम होने की स्थिति में भी इमेज-गाइडेंस के जरिए टारगेट पहचान लेते हैं।
अमेरिका की ओर से टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों और कम लागत वाले कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। टॉमहॉक कम ऊंचाई पर उड़कर रडार से बचती हैं, जबकि ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करने में मदद करते हैं।
AI और रीयल-टाइम डेटा की भूमिका
आज के दौर में सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि डेटा असली ताकत है। इजरायल और अमेरिका AI-आधारित टारगेटिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं, जो हजारों संभावित लक्ष्यों को तेजी से स्कैन कर सकते हैं।
सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्विलांस, सिग्नल इंटरसेप्ट और ह्यूमन इंटेलिजेंस इन सबको जोड़कर रीयल-टाइम लोकेशन की पुष्टि की जाती है। जैसे ही मीटिंग का समय और जगह कन्फर्म हुई, ऑपरेशन को हरी झंडी मिल गई।
जमीन, आसमान और अंतरिक्ष से एक साथ वार
यह पूरा ऑपरेशन मल्टी-डोमेन था।
जमीन से: एजेंट्स और स्पेशल फोर्सेज ने पहले से एयर डिफेंस या मिसाइल लॉन्चर को निष्क्रिय करने की तैयारी की। जरूरत पड़ने पर छिपाए गए ड्रोन और विस्फोटक सिस्टम सक्रिय किए गए।
आसमान से: स्टेल्थ जेट्स ने सटीक बमबारी की। ड्रोन ने पहले सर्विलांस किया, फिर स्ट्राइक सपोर्ट दिया। 200 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने 500 से अधिक टारगेट्स पर एक साथ हमला किया, जिससे जवाबी कार्रवाई की गुंजाइश कम हो गई।
अंतरिक्ष से: इजरायल के ओफेक सीरीज के स्पाई सैटेलाइट्स और अमेरिकी सैटेलाइट्स ने हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें और बम डैमेज असेसमेंट उपलब्ध कराए। इससे हमले की सटीकता और बाद की समीक्षा आसान हुई।
ऑपरेशन में कितना समय लगा?
हालांकि असली हमला कुछ ही मिनटों में पूरा हो गया, लेकिन उसकी तैयारी में महीनों की जासूसी, हजारों घंटे की निगरानी और संयुक्त अभ्यास शामिल थे। जैसे ही सही मौका मिला, पूरा सिस्टम एक साथ सक्रिय हो गया ड्रोन, मिसाइलें, जेट्स और सैटेलाइट डेटा सब कुछ एक ही समय पर काम करने लगा।
