US-Iran War effect on India: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है। शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है, जिसका मकसद ईरानी शासन से जुड़े संभावित खतरों को खत्म करना है। इस नई स्थिति ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में हलचल पैदा कर दी है, लेकिन भारत पर इसका असर फिलहाल सीमित नजर आता है।
भारत-ईरान व्यापार पर प्रभाव: सीमित लेकिन स्थिर | US-Iran War effect on India
भारत और ईरान के बीच कारोबार मुख्य रूप से दवाओं और फलों तक सीमित है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार $168 करोड़ रहा, जो भारत के कुल द्विपक्षीय व्यापार $1.74 लाख करोड़ का केवल 0.01% है। तुलना करें तो 2018-19 में यह आंकड़ा $1703 करोड़ था। गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से कच्चे तेल के आयात में भारी कमी रही है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान से $44 करोड़ का माल आयात किया, जबकि $124 करोड़ का सामान ईरान को निर्यात किया गया। भारत से ईरान को मुख्य रूप से बासमती चावल, चाय, चीनी, ताजे फल और दवाइयां भेजी गईं, जबकि वहां से सेब, पिस्ता, खजूर और कीवी भारत आए। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान तनाव से भारत-ईरान के इस सीमित व्यापार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
इजरायल के साथ व्यापार पर पड़ सकता है असर
हालांकि ईरान से व्यापार सुरक्षित दिखता है, लेकिन इजरायल के साथ बढ़ते संबंधों पर असर पड़ सकता है। पिछले दशक में डिफेंस और हाई-टेक इक्विपमेंट की शिपमेंट के चलते भारत का इजरायल निर्यात 21% बढ़ा है। उदाहरण के लिए, 2013 में हथियार और गोला-बारूद का निर्यात $10 लाख था, जो 2024 में बढ़कर $10.4 करोड़ हो गया। वहीं, इजरायल से विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जों का आयात $3.18 करोड़ से बढ़कर $19.3 करोड़ हो गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ कार्रवाई से भारत-इजरायल रणनीतिक सहयोग पर अस्थायी दबाव पड़ सकता है।
ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है। एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले अहम मार्ग, जैसे रेड सी कोरिडोर, प्रभावित हो सकते हैं। इससे माल ढुलाई की लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं।
सबसे बड़ा खतरा होमुर्ज जलडमरूमध्य से जुड़ा है। भारत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है। अगर यह मार्ग बंद होता है, तो भारत की ऊर्जा लागत बढ़ सकती है और पश्चिमी देशों को निर्यात भी प्रभावित हो सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित है, लेकिन वैश्विक तेल और लॉजिस्टिक्स कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में भारत को रणनीतिक और वैकल्पिक आपूर्ति रास्तों पर ध्यान देना होगा।
ईरान और इजरायल के बीच जंग से भारत पर प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव फिलहाल बहुत बड़ा नहीं है, क्योंकि भारत-ईरान व्यापार सीमित है। हालांकि, इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य और हाई-टेक व्यापार पर अप्रत्यक्ष असर दिख सकता है। साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा, माल ढुलाई और बीमा लागत जैसी वैश्विक लॉजिस्टिक्स चुनौतियां भारत को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक परिदृश्य देखते हुए, भारत को अपने रणनीतिक विकल्पों पर सतर्क रहना होगा।
