SC warns Meta-WhatsApp: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta (फेसबुक, इंस्टाग्राम) को लेकर बहुत सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि भारत के कानून मानो, नहीं तो देश छोड़कर जाओ। कोर्ट ने यह भी कहा कि नागरिकों की निजता (Privacy) सबसे ऊपर है। साइबर कानून विशेषज्ञ और वकील विराग गुप्ता के मुताबिक बताया जा रहा है कि यह मामला सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं है, बल्कि Meta की तीनों बड़ी कंपनियों WhatsApp, Facebook और Instagram के डेटा इस्तेमाल करने के तरीके पर सवाल है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है मेटा पर क्या आरोप है और ये मामला कब शुरू हुआ।
Meta पर आरोप क्या हैं?
विराग गुप्ता के अनुसार, Meta तीन तरीकों से यूज़र्स का डेटा इस्तेमाल किया जाता है।
1. आपस में डेटा शेयरिंग: WhatsApp, Facebook और Instagram आपस में यूज़र की जानकारी साझा करते हैं।
2. डेटा विदेश भेजना: भारतीय यूज़र्स का डेटा भारत से बाहर सर्वरों पर भेजा जाता है।
3. बाजार में एकाधिकार (Monopoly): CCI (Competition Commission of India) ने कहा कि विज्ञापन और OTT मार्केट में Meta का दबदबा बढ़ रहा है, जो प्रतिस्पर्धा के लिए खतरा है।
डेटा से सरकार का खजाना कैसे भर सकता है?
एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में डेटा कारोबार पर अभी GST नहीं लगता। अगर डेटा के वैध कारोबार पर टैक्स लगाया जाए तो सरकार की कमाई बढ़ेगी, कंपनियां कानून के दायरे में आएंगी, डेटा का गलत इस्तेमाल कम होगा, साइबर फ्रॉड पर रोक लगेगी। वही आपको बता दें, इस मामले में की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच कर रही है, और WhatsApp केस की अगुवाई भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत कर रहे हैं। इस बेंच में तीन सदस्य हैं: चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.एम. पंचोली।
WhatsApp का पुराना बयान
कुछ महीने पहले WhatsApp ने कोर्ट में कहा था कि अगर उससे End-to-End Encryption (E2EE) हटाने को कहा गया, तो वह भारत से बाहर जाने पर मजबूर हो जाएगा। क्योंकि E2EE WhatsApp की सबसे बड़ी सुरक्षा विशेषता है।
E2EE का मतलब है कि मैसेज सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के बीच पढ़ा जा सकता है, तीसरा कोई नहीं। लेकिन समस्या यहां से शुरू होती है।
क्या है असली विवाद / मैसेज नहीं, मेटाडेटा
WhatsApp यह कहता है कि मैसेज सुरक्षित हैं, लेकिन उसकी नई पॉलिसी में यह साफ है कि वह मेटाडेटा शेयर करता है, जैसे किससे बात हुई, कितनी बार बात हुई, कब बात हुई, डिवाइस की जानकारी, लोकेशन और टेक्निकल डिटेल्स ये सारी जानकारी सांझा होती है। यही जानकारी Facebook और Instagram के साथ शेयर की जा सकती है। भारत सरकार का साफ स्टैंड है, भारतीय यूजर्स का डेटा भारत में ही रहना चाहिए और भारतीय कानून के तहत इस्तेमाल होना चाहिए।
यह मामला कब शुरू हुआ?
यह विवाद नया नहीं है, इसकी जड़ें 10 साल पुरानी हैं।
अनुक्रमांक साल क्या हुआ
1 2014 Facebook ने WhatsApp खरीदा
2 2016 पहली बार डेटा Facebook से शेयर करने की पॉलिसी आई, कोर्ट में चुनौती
3 2021 नई प्राइवेसी पॉलिसी, “मानो या छोड़ो” — देशभर में विरोध
4 2021 CCI ने जांच शुरू की
5 2024 – 25 CCI ने 213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया
6 2026 मामला सुप्रीम कोर्ट में, सख्त टिप्पणी
फरवरी 2026 में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसे “निजी जानकारी की चोरी” तक कह दिया। 10 फरवरी 2026 को इस पर बड़ा आदेश आ सकता है।
नए SIM Binding नियम क्या हैं?
सरकार अब WhatsApp अकाउंट को आपके SIM से जोड़ने की तैयारी में है। इसका सीधा असर यूजर्स पर पड़ेगा। सबसे पहले जान लेते है क्या बदल जाएगा?
1. SIM और WhatsApp का सीधा कनेक्शन: जिस SIM से WhatsApp रजिस्टर है, अगर वह फोन से निकाला — WhatsApp तुरंत बंद।
2. WhatsApp Web पर सख्ती: अब WhatsApp Web हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा। दोबारा QR स्कैन करना होगा।
3. फोन बदलना हुआ मुश्किल: नए फोन में WhatsApp चलाने के लिए एक्टिव SIM जरूरी होगा।
4. डेटा शेयरिंग पर रोक: अब बिना आपकी साफ अनुमति, आपका डेटा Meta के दूसरे ऐप्स के साथ विज्ञापनों के लिए शेयर नहीं किया जा सकेगा।
यह सब ‘Ghost Pairing’ और ‘Identity Theft’ जैसे साइबर अपराध रोकने के लिए किया जा रहा है। तो बहुत जरूरी बात कि अपने WhatsApp को सुरक्षित कैसे रखें?
सबसे पहले Two-Step Verification (2FA) ऑन करें, WhatsApp खोलें → Settings, Account → Two-step verification, 6 अंकों का PIN सेट करें, एक रिकवरी ईमेल जरूर जोड़ें।
Privacy Settings अपडेट करें
पहले Settings में जाए फिर Privacy, उसके बाद Fingerprint Lock / Face ID ऑन करें, Advanced में जाकर Protect IP address in calls ऑन करें जिससे कॉल के दौरान आपकी लोकेशन छिपी रहे। और ध्यान रखें कि अपना PIN किसी को भी न बताएं। यह मामला सिर्फ Meta बनाम सरकार नहीं है, बल्कि आपकी Privacy बनाम टेक कंपनियों के डेटा कारोबार का है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख 10 फ़रवरी को आने वाला जिसके बात पता चलेगा कि WhatsApp भारत में किस शर्त पर काम करेगा — और आपके डेटा पर असली मालिकाना हक किसका होगा आपका या कंपनी का।
