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SC on Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष, कहा– कानून के तहत हुआ हर कदम

Nandani | Nedrick News Published: 04 Feb 2026, 08:50 AM | Updated: 04 Feb 2026, 10:47 AM

SC on Sonam Wangchuk: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत को लेकर केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। सरकार ने अदालत को बताया कि वांगचुक के साथ कानून के दायरे में रहकर उचित और निष्पक्ष व्यवहार किया गया है और हिरासत के दौरान सभी जरूरी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया।

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याचिका का किया गया विरोध (SC on Sonam Wangchuk)

यह दलील केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के सामने रखी। उन्होंने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने किसी भी तरह से कानून का उल्लंघन नहीं किया है। तुषार मेहता ने साफ किया कि रासुका जैसे कानूनों में प्रशासन को कुछ हद तक विवेकाधिकार दिया गया है, लेकिन इसका मतलब मनमानी नहीं है।

केंद्र का दावा: लोगों को भड़काने का खतरा था

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक के बयान और गतिविधियां संवेदनशील सीमा क्षेत्र में अशांति फैलाने वाली हो सकती थीं। सरकार का कहना है कि वांगचुक पाकिस्तान से सटे लद्दाख जैसे इलाके में लोगों को भड़काने का काम कर रहे थे, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। इसी वजह से उन्हें हिरासत में लेना जरूरी समझा गया।

नेपाल-बांग्लादेश जैसी स्थिति का हवाला

केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने याचिका के जवाब में यह भी कहा कि वांगचुक के बयानों से क्षेत्र में नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि कुछ भाषणों में ऐसे संकेत मिले, जो अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने वाले माने जा सकते हैं। सरकार का दावा है कि इन परिस्थितियों को नजरअंदाज करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं होता।

सितंबर 2025 के प्रदर्शनों से जोड़ा मामला

अदालत को यह भी बताया गया कि सितंबर 2025 में लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। केंद्र के अनुसार, इन प्रदर्शनों के बाद वांगचुक की गतिविधियों पर प्रशासन की नजर गई और हालात को देखते हुए उन्हें रासुका के तहत हिरासत में लिया गया।

‘कानून नहीं तोड़ा, सुरक्षा प्राथमिकता’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दो टूक कहा कि सरकार ने कोई नियम नहीं तोड़ा है और पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार अपनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन का मकसद किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।

अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर अदालत का रुख क्या रहता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह मामला न सिर्फ लद्दाख बल्कि देशभर में राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के इस्तेमाल और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक अहम बहस का रूप ले चुका है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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