India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े ट्रेड डील को फाइनल किए जाने के बाद, राजनीतिक माहौल गरमा गया है, और सरकार इसे एक डिप्लोमैटिक जीत बता रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है। समझौते के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने संसद परिसर में NDA संसदीय दल की बैठक की, जहाँ उन्होंने इस डील के असर पर चर्चा की और सांसदों को खास ज़िम्मेदारी सौंपी।
पीएम मोदी ने सांसदों से क्या कहा?
काफी समय से भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील को लेकर विवाद चल रहा था, जिस पर ट्रंप ने कई नीतियां अपनाईं। उन्होंने भारतीय सामानों पर टैरिफ भी 50% बढ़ा दिया था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच एक ट्रेड डील फाइनल हो गई है, इस बात की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। वही इस बात को लेकर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने संसदीय बैठक के दौरान कहा कि दुनिया की व्यवस्था (World Order) बदल रही है और कोरोना के बाद यह बदलाव साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अब भारत के पक्ष में मुड़ रहा है। अमेरिका के साथ हुई यह ट्रेड डील उसी का उदाहरण है।
पीएम मोदी ने सांसदों से कहा कि संसद में पूरी उपस्थिति रखें, हर विधायी बहस में सक्रिय भाग लें, सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं। अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर बजट और इस ट्रेड डील के फायदे समझाएं। उन्होंने कहा कि यह बजट अगले 25 साल को ध्यान में रखकर बनाया गया है, इसलिए सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे इसे लोगों तक सही तरीके से पहुंचाएं।
हर जिले में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने एक अहम सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि हर जिले की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का सम्मेलन कराया जाना चाहिए, ताकि उद्योगों को इस ट्रेड डील का फायदा उठाने के लिए प्रेरित किया जा सके। उनका मानना है कि इससे देश में क्वालिटी प्रोडक्ट बनेंगे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी।
ट्रेड डील से क्या होगा फायदा?
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को 25% से घटाकर 18% कर दिया है, जो तुरंत लागू होगा। इसका सीधा फायदा यह होगा भारतीय सामान अमेरिका में सस्ते पड़ेंगे, एक्सपोर्ट बढ़ेगा, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के मौके बढ़ेंगे, भारत की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी, सरकार इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए “मील का पत्थर” बता रही है।
विपक्ष का विरोध और संसद में हंगामा
इस डील को लेकर विपक्ष ने संसद में विरोध भी किया जिसके कारण लोकसभा स्थगित हो गई। बता दें कि लोकसभा स्थगित होने के बाद विपक्षी सांसदों ने परिसर में प्रदर्शन किया, जबकि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद वॉकआउट कर गए। वहीं विपक्ष ये सवाल उठा रहा है कि इस डील की शर्तें क्या हैं और इससे भारत को असल में कितना फायदा होगा।
जेपी नड्डा का कांग्रेस पर हमला
नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष को आड़े हाथ लिया, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “जब टैरिफ बढ़ा था तब भी विपक्ष सवाल कर रहा था कि सरकार क्या कर रही है। अब टैरिफ घट गया है तो भी इन्हें दिक्कत है।” उन्होंने आगे ये भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में स्टेटमेंट देगी और पूरी चर्चा के लिए भी तैयार है।
आखिर क्या होती है ट्रेड डील?
ट्रेड डील यानी व्यापार समझौता, दो या दो से ज्यादा देशों के बीच होता है, जिसमें तय किया जाता है कि वे एक-दूसरे के साथ व्यापार कैसे करेंगे। इसमे आम तौर पर टैरिफ और कस्टम ड्यूटी कम करना, बाजार तक आसान पहुंच और निवेश और बौद्धिक संपदा (IPR) के नियम तय करना, सेवाओं के व्यापार के नियम बनाना शामिल है।
ट्रेड डील के प्रकार होते हैं:
• द्विपक्षीय (Bilateral) – दो देशों के बीच
• बहुपक्षीय (Multilateral) – कई देशों के बीच
• FTA (Free Trade Agreement) – जहां व्यापारिक बाधाएं लगभग खत्म कर दी जाती हैं
क्या है सरकार की रणनीति?
पीएम मोदी ने साफ कहा है कि सांसद अपने क्षेत्र में जाएं और लोगों को बताएं बजट कैसे उनके भविष्य से जुड़ा है। ट्रेड डील से देश और स्थानीय उद्योग को क्या फायदा होगा, विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दें। यानी सरकार अब इस डील को सिर्फ कूटनीतिक जीत नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक उपलब्धि के रूप में भी जनता तक ले जाने की तैयारी में है। कुल मिलाकर यह ट्रेड डील सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत की बदलती वैश्विक स्थिति, मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस और आने वाले वर्षों की आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जमीन पर इसका असर कितना और कितनी जल्दी दिखता है।
