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अंबेडकर की संकल्प भूमि और गुजरात चुनाव का है गहरा रिस्ता, जानिए क्या है संकल्प भूमि

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मध्य गुजरात से होकर जाता है राज्य मुख्यमंत्री का रास्ता

गुजरात में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की हवा तेज़ हो रही है, नेताओं की जुबान से संकल्प भूमि की चर्चा उतनी ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। संकल्प का महत्व हमारे इतिहास से ही जुड़ा है, तो आज के राजनेता अंबेडकर के संकल्प और उनके संकल्प भूमि को कैसे छोड़ सकते हैं। गुजरात की राजनीति में हमेशा से मध्य गुजरात की बहुत ज्यादा अहमियत रही है। कहा जाता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री पद का रास्ता मध्य गुजरात से ही होकर जाता है। मध्य गुजरात में अहमदाबाद, दाहोद, खेड़ा, आणंद, नर्मदा, पंचमहल, वडोदरा जिले आते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में संकल्प भूमि की भी महत्त्वता  चुनाव के समय बढ़ जाती है।

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क्या है संकल्प भूमि की महत्त्वता  ?

गुजरात चुनाव में संकल्प भूमि की महत्त्वता समझने से पहले आप ये समझ ले कि संकल्प भूमि है क्या? संकल्प भूमि को बाबा साहेब डॉ भीम राव अंबेडकर की संकल्प भूमि कहते हैं। जब बाबा साहेब लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी करके आएं थे, तो अपने कर्ज को उतारने के लिए वडोदरा में उन्हें नौकरी करनी पड़ी थी। राज परिवार ने उन्हें नौकरी तो दे दी थी, पर रहने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं कराई थी। अंबेडकर पूरी वडोदरा घूम गए पर उनकी जाति के कारण किसी ने उन्हें रहने के लिए मकान नहीं दिया, जिस कारण उन्हें मुंबई जाना पड़ा। वडोदरा से उनकी ट्रेन रात को थी जिस वजह से उन्हें वहीँ स्टेशन के पास एक पार्क में रुकना पड़ा। उसी पार्क में अंबेडकर ने सोचा की जब मेरे जैसे पढ़े-लिखे इंसान को जाति के नाम पर इस तरह बहिष्कृत किया जा रहा है तो मेरे समाज के अनपढ़ लोगों की क्या हालत होगी। अम्बेडकर ने उसी समय संकल्प लिया कि सारे शोषित लोग आज से मेरे परिवार होंगे और मै इनके लिए और इनके न्याय के लिए लडूंगा।

मोदी से लेकर राहुल तक संकल्प भूमि से फूंकते है चुनावी बिगुल

अंबेडकर के इस संकल्प के कारण वडोदरा की वो जगह संकल्प भूमि के नाम से प्रसिद्ध हुई । आजकल के चुनाव में अंबेडकर के संकल्प को और उनकी संकल्प भूमि को राजनेता लोग सियासी फायदे के लिए  खूब भुनाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक बाबा साहेब और उनकी संकल्प भूमि के बिना गुजरात चुनाव का बिगुल नहीं फूंकते। जहां भाजपा मध्य गुजरात के शहरी वोटरों के भरोसे है, वहीं राहुल इस इलाके की ग्रामीण आबादी खासकर दलितों-आदिवासियों को लुभाने में लगी हुई है, इसी वजह से राहुल गांधी अक्टूबर में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की संकल्प भूमि भी गए थे। दूसरी तरफ मोदी भी संसद से लेकर अपनी रैलियों तक बाबा साहेब और उनके संकल्प की चर्चा करते रहते हैं।

मध्य गुजरात में शुरू से ही रही है भाजपा की पकड़

गुजरात की कुल 182 विधानसभा सीटों में से 63 सीटें मध्य गुजरात से आती हैं और यह 63 सीटें गुजरात राज्य में बहुत मायने रखती है। पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो मध्य गुजरात में भी भाजपा का डंका बजता रहा है। इसके पहले भी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ही मध्य गुजरात में अपना झंडा लहराया था। अहमदाबाद और वडोदरा को छोड़ दिया जाए तो मध्य गुजरात के ग्रामीण इलाके वाला क्षेत्र कांग्रेस के दबदबे वाला माना जाता है।

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