Punjab Flood: अब तक की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा पंजाब, 1300 गांवों में कहर, अब तक 30 मौतें

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 02 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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Punjab Flood: पंजाब इन दिनों अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। बीते एक महीने से लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान के चलते राज्य के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 2.56 लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे “हाल के दशकों की सबसे गंभीर त्रासदी” बताया है।

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कौन-कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित? Punjab Flood

राज्य के कई ज़िलों में हालात बेहद खराब हैं, लेकिन सबसे ज्यादा असर अमृतसर जिले में देखने को मिला है, जहां अकेले 35,000 लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। इसके बाद फिरोजपुर (24,015), फाजिल्का (21,562), पठानकोट (15,053), और गुरदासपुर (14,500) जैसे जिलों में हजारों लोग संकट में हैं।

1300 से ज्यादा गांवों में पानी घुस चुका है, और अब तक 15,688 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। गुरदासपुर, फाजिल्का, फिरोजपुर और अमृतसर में सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्यों में जुटी हैं।

कहां हुईं सबसे ज्यादा मौतें?

पठानकोट जिले में सबसे ज्यादा 6 मौतें हुई हैं। इसके अलावा अमृतसर, बरनाला, होशियारपुर, लुधियाना, मानसा और रूपनगर में 3-3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई जिलों में लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है।

बाढ़ के पीछे की वजह क्या है?

खबरों की मानें तो, बाढ़ की सबसे बड़ी वजह बनी हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, जिससे सतलुज, ब्यास और रावी जैसी बड़ी नदियों में जलस्तर अचानक काफी बढ़ गया। साथ ही, कई जगहों पर मौसमी नाले भी उफान पर आ गए, जिससे खेतों से लेकर रिहायशी इलाकों तक सब जलमग्न हो गए।

स्वास्थ्य सेवाओं की हालत

हालात को देखते हुए फिरोजपुर में 400 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जहां 8,700 से ज्यादा लोगों का इलाज किया जा चुका है। मोबाइल टीमें गांव-गांव जाकर दवाइयां और जरूरी मेडिकल सहायता पहुंचा रही हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों की खास देखभाल की जा रही है।

स्कूल-कॉलेज बंद, चेतावनी जारी

चंडीगढ़ और पंजाब के अन्य जिलों में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को 3 सितंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। प्रशासन ने सभी निचले इलाकों को सतर्क रहने और समय पर अलर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं।

सेटेलाइट से नजर: रावी नदी 10 गुना चौड़ी हो गई

Copernicus Sentinel-1 सेटेलाइट से मिली तस्वीरों के अनुसार, रावी नदी अपनी सामान्य चौड़ाई से 10 गुना ज्यादा फैल चुकी है, जिससे हज़ारों घर, खेत और सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं।

राज्यपाल और सीएम का रुख

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया 2 से 4 सितंबर तक बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने फिरोजपुर से दौरे की शुरुआत की है। वहीं, सीएम भगवंत मान ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर केंद्र के पास फंसे 60,000 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है, ताकि राहत कार्यों को तेज़ किया जा सके।

सीएम मान का कहना है कि सरकार हर ज़रूरतमंद तक राहत पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रही है और जलस्तर कम होते ही नुकसान का सटीक आंकलन किया जाएगा।

खेती, मवेशी और इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी भारी नुकसान

अब तक 96,000 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि बाढ़ में डूब चुकी है। किसानों को फसलें बर्बाद होने का भारी नुकसान हुआ है। मवेशी भी बह गए या बीमार हो गए हैं, जिसका असर आने वाले समय में डेयरी और कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

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