Israel America Relations: मिडिल ईस्ट में अचानक भड़की जंग, जब दो मुस्लिम देशों ने इज़रायल पर किया हमला, अमेरिका को करना पड़ा हस्तक्षेप

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 30 जून 2025, 05:30 AM Updated: 30 जून 2025, 05:30 AM
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Israel America Relations: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष में एक बार फिर अमेरिका ने खुलकर इजरायल का साथ दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके बाद ईरान ने पलटवार शुरू किया। इस पर अमेरिका ने इजरायल की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर हमले किए और लाखों डॉलर खर्च किए। अमेरिका ने इस दौरान इजरायल के लिए आधुनिक एंटी-मिसाइल सिस्टम्स में से लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया, जिसमें THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) सिस्टम भी शामिल है, जिसे इजरायल में इंस्टॉल किया गया है।

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इजरायल की सुरक्षा में अमेरिका का खुला समर्थन- Israel America Relations

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षा के लिए इस तरह खुलकर समर्थन दिया है। एक ऐतिहासिक उदाहरण के रूप में, अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षा के लिए अपनी भी परवाह नहीं की थी, जिससे न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका को भी बड़ा ऊर्जा संकट झेलना पड़ा था। 1967 में हुए छह दिन के युद्ध के बाद इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा, सिनाई और गोलान हाइट्स पर कब्जा कर लिया था। इसने अरब देशों, विशेषकर मिस्र और सीरिया के साथ तनाव को बढ़ा दिया था। हालांकि, ईरान और तुर्की ने उस समय इजरायल को राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी थी, जिससे इजरायल की स्थिति में सुधार आया था।

1973 का योम किप्पुर युद्ध

इजरायल के कैलेंडर में ‘योम किप्पुर’ सबसे पवित्र दिन माना जाता है, और यह दिन 1973 में इजरायल के लिए एक काले दिन के रूप में सामने आया। इस दिन अचानक मिस्र और सीरिया ने इजरायल पर हमला किया। इस हमले के लिए इजरायल तैयार नहीं था। तुरंत इजरायल ने अमेरिका से मदद मांगी, और अमेरिका ने बिना कोई देरी किए सैन्य सहायता भेजी। इस युद्ध को ‘योम किप्पुर युद्ध’ के नाम से जाना जाता है, जो 6 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 1973 तक चला।

युद्ध के दौरान की स्थिति

इस युद्ध की शुरुआत में मिस्र और सीरिया की सेनाओं ने गोलान हाइट्स और सिनाई में तेजी से बढ़त बना ली थी। युद्ध की दिशा इस तरह से बदल रही थी कि ऐसा लग रहा था कि अरब देशों को जीत मिल सकती है। लेकिन फिर अचानक इजरायल ने दोनों देशों की सेनाओं को पीछे धकेलते हुए उन्हें रोका और दमिश्क पर गोलाबारी की। इस सफलता का श्रेय अमेरिका को जाता है, जिसने इजरायल को रणनीतिक मदद मुहैया कराई। इजरायल की यह सफलता अमेरिकी सैन्य मदद के बिना संभव नहीं हो सकती थी।

संकट का सामना करने वाला अमेरिका

हालांकि युद्ध के बाद इजरायल ने विजय प्राप्त की, लेकिन अमेरिका के लिए भी इस संघर्ष के परिणाम गंभीर थे। अमेरिका, जो इजरायल के समर्थन में था, को भी इससे जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। युद्ध के बाद अरब देशों ने अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों को तेल निर्यात करना बंद कर दिया। इस फैसले के बाद अमेरिका को तेल संकट का सामना करना पड़ा, और यह संकट वैश्विक स्तर पर महसूस किया गया।

परमाणु युद्ध की संभावना

1973 का योम किप्पुर युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह परमाणु युद्ध तक भी पहुंचने की स्थिति में था। अमेरिका और सोवियत संघ, दोनों देशों ने अपनी-अपनी सेनाओं को इस युद्ध में घसीट लिया था। युद्ध के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की संभावना उत्पन्न हुई। हालांकि, अंत में दोनों पक्षों ने सीजफायर पर सहमति व्यक्त की और युद्ध का अंत हुआ।

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