लालू की संपत्ति और राजनीतिक विरासत का वारिस बन सकते हैं तेजस्वी तो कुकर्मों का वारिस बनने में क्या दिक्कत?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 28 Jul 2021, 12:00 AM

बिहार की सियासत में इन दिनों बयानबाजियों का दौर जारी है। सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे को निशाने पर ले रहे हैं। तो वहीं, कई मौकों पर दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेता भी आमने-सामने दिख रहे है। 

जदयू-बीजेपी के बीच कथित तौर पर जारी कलह बिहार की सियासत को किस आयाम तक पहुंचाती है इस पर सभी की नजरें टिकी हुई है। बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की ओर से लगातार दावा किया जाता रहा है कि नीतीश सरकार चंद महीनों की मेहमान है। 

इसी बीच नीतीश सरकार के पूर्व मंत्री और जदयू नेता नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने लालू यादव के घोटाले और राजनीतिक विरासत को लेकर तेजस्वी यादव को लपेटे में लिया है।

परिवार की विकास पर रहा लालू का पूरा ध्यान

जदयू नेता नीरज कुमार का कहना है कि तेजस्वी अपने पिता लालू यादव की संपत्ति का वारिस बन सकते हैं, उनकी राजनीतिक विरासत का वारिस बन सकते हैं तो उनके कुकर्मों का वारिस बनने में उन्हेंं क्या दिक्कत है। 

उन्होंने कहा कि पिता के घोटाले, जनता के साथ किए गए छल और बिहार को गर्त में धकेलने के प्रयासों का वारिस बनने में उन्हें शर्म क्यों आती है? जदूय नेता ने कहा, लालू प्रसाद का पूरा ध्यान परिवार के विकास पर रहा, जबकि नीतीश कुमार न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर चल रहे हैं।

‘राजद के 15 साल में सिर्फ 30 हजार शिक्षकों की भर्ती’

नीरज कुमार ने लालू यादव के कार्यकाल में चरवाहा विद्यालय खोलने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में कुव्यवस्था पर नीति आयोग ने टिप्पणी की थी। जदयू नेता ने कहा, बिहार की शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने में लालू का बड़ा योगदान रहा। राजद के 15 साल के कार्यकाल में केवल 30 हजार शिक्षक भर्ती हुए, जबकि नीतीश सरकार में अब तक चार लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली हो चुकी है।

मानव विकास सूचकांक में अंतिम पायदान पर था बिहार

जदयू प्रवक्ता ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव विकास सूचकांक-1991 में लक्ष्य तय किया। भारत में नई आर्थिक नीति लागू होने के बाद मानव विकास सूचकांक के लिए पहली योजना मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल सन् 2000 में आया। साल 2005 में मानव विकास सूचकांक में बिहार देश में सबसे अंतिम पायदान पर था।

उन्होंने कहा, नीतीश कुमार के शासन संभालते ही स्थिति सुधरी। साल 2010 में मानव विकास सूचकांक की गणना विधि में बदलाव किया गया। मानव विकास सूचकांक के नए लक्ष्य निर्धारित किए गए। 

नीरज कुमार ने कहा, नीतीश कुमार के लगातार प्रयासों से महाराष्ट्र के बाद दूसरा राज्य बिहार बना, जिसने मानव विकास मिशन स्थापित किया। इस मिशन में न केवल मानव विकास सूचकांक के अंतरराष्ट्रीय मानक का ध्या न रखा, बल्कि बिहार के सामाजिक हालत को देखते हुए तीन मानक शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ आय में समानता को तय किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इसी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।

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