देश की आजादी के 75 साल पूरे लेकिन आज भी महिलाएं नहीं है सुरक्षित, जानें क्या कहते हैं आंकड़े?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 Aug 2021, 12:00 AM | Updated: 12 Aug 2021, 12:00 AM

इस स्वतंत्रता दिवस के दिन देश की आजादी के 75 साल पूरे हो जाएंगे। इसे यादगार बनाने के लिए सरकार की ओर से तरह-तरह की तैयारियां की जा रही है। विपक्षी पार्टियों ने भी इसके लिए अपने कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है। 

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में आजादी के 75 साल और संविधान लागू हुए 73 साल हो गए लेकिन अगर हालात की बात करें तो स्थिति अभी भी कुछ ठीक नहीं है। देश का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है।  देश की आजादी के 75 साल पूरे लेकिन आज भी महिलाएं नहीं है सुरक्षित, जानें क्या कहते हैं आंकड़े?

लेकिन जमीनी स्तर पर समानता अभी भी दूर-दूर तक नहीं है। इससे इतर देश में आज भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। आजादी के 75 साल होने के बावजूद हम और हमारी सरकार आज तक देश की महिलाओं को सुरक्षित रख पाने में या फिर सुरक्षित महसूस करा पाने में नाकाम रही है।

देश में हर रोज औसतन 87 रेप

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक देश में हर रोज औसतन 87 रेप के मामले सामने आ रहे हैं। 2018 की तुलना में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में 7 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में प्रति एक लाख महिला आबादी पर 62.4 फीसदी केस रजिस्टर्ड हुए हैं, जो साल 2018 में 58.8 फीसदी थे।

NCRB की ओर से जारी डाटा के मुताबिक साल 2019 में रेप के कुल मामले 32,033 थे। वहीं, साल 2018 में रेप के कुल 33,356 मामले रिकार्ड हुए थे। साल 2017 में यह आंकड़ा 32,559 था। वहीं, अगर हम महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात करें तो साल 2018 में यह आंकड़ा 3,78,236 था। जो 2019 में बढ़कर 4,05,861 तक पहुंच गया।

गांवो में घर चलाने तक सीमित हैं महिलाएं

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में ज्यादातर पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामले है। इसके साथ ही महिलाओं पर हमले और उनके अपहरण को लेकर भी लाखों मामले हर साल दर्ज हो रहे हैं।

इससे अलग हटकर अगर हम समाज की बात करें तो देश के लगभग सभी घरों में आज भी फैसला घर का पुरुष ही लेता है। अगर गांव के इलाकों में देखें तो महिलाओं का काम सिर्फ घर चलाने तक सीमित है। ऐसे में संविधान में उल्लेखित समान अधिकार की बात का कोई मतलब ही नहीं है। जब तक समाज और देश में इसका इंप्लीमेंट न हो तब तक तो समान अधिकार की बात करना तो सिर्फ सुनने में ही अच्छा लगता है।

महिलाएं खुशी मनाए या गम

बताते चले कि भारत में महिला सुरक्षा को लेकर काफी पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा समय में अब देश की महिलाएं 75वें स्वतंत्रता दिवस की खुशी मनाएं या फिर अपनी स्वतंत्रता का हनन होता देख दु:ख मनाए…इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आज के समय़ में भी देश के कई हिस्सों में स्थिति ऐसी है कि महिलाएं दिन में भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करा पाती। 

कई जगहों पर तो शाम होने के बाद लड़कियां या महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलना चाहती। आखिर स्थिति कब तक सामान्य होगी, कब महिलाओं को पूर्ण रुप से बराबरी का अधिकार मिलेगा। इसका जवाब न समाज के पास और न ही हमारी सरकार के पास…

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