Yadav-Brahmin Society Dispute: भिंड में यादव समाज का गुस्सा: ब्राह्मणों को भोज में बुलाने पर परिवार का बहिष्कार, यूपी में कथावाचक की चोटी काटने का बदला लिया!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 18 Jul 2025, 12:00 AM | Updated: 18 Jul 2025, 12:00 AM

Yadav-Brahmin Society Dispute: उत्तर प्रदेश के इटावा और मध्यप्रदेश के भिंड जिले में हाल ही में यादव और ब्राह्मण समाज के बीच एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसका असर दोनों समुदायों में तनाव की स्थिति को जन्म दे रहा है। विवाद की शुरुआत 21 जून को इटावा में भागवत कथा के दौरान हुई, जब यह जानकारी सामने आई कि कथावाचक ब्राह्मण नहीं, बल्कि यादव समाज से हैं। इस बात को लेकर हंगामा हो गया और कथावाचक को न केवल मारा-पीटा गया, बल्कि उनकी चोटी काट दी गई और सिर भी मुंडवा दिया गया। इस दौरान कथावाचक के खिलाफ अपमानजनक हरकतें की गईं, जिसमें एक महिला के पैरों में नाक रगड़वाने की भी घटना शामिल थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

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मध्यप्रदेश में बढ़ता विरोध- Yadav-Brahmin Society Dispute

यह घटना मध्यप्रदेश के भिंड जिले में भी गरमा गई। यादव समाज ने इस घटना के खिलाफ विरोध जताते हुए निर्णय लिया कि वे ब्राह्मणों से कर्मकांड नहीं कराएंगे। पंचायत के फैसले के अनुसार, अगर कोई यादव परिवार ब्राह्मणों से पूजा या कर्मकांड कराएगा, तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। यह फैसला 13 जुलाई को एक पंचायत में लिया गया, जहां यह तय हुआ कि अब समाज के युवा ही उनके कर्मकांड करेंगे, और ब्राह्मणों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा।

कमल यादव का भोज और समाज का बहिष्कार

इसी बीच, भिंड जिले के एक गांव में कमल यादव के परिवार ने 16 जुलाई को शांति भोज का आयोजन किया। इसमें 13 ब्राह्मणों को आमंत्रित किया गया था। भोज की तैयारी पहले से हो चुकी थी, लेकिन पंचायत के फैसले के बाद समाज के कुछ लोग इस भोज का विरोध करने पहुंचे और ब्राह्मणों को न बुलाने का दबाव डाला। कमल यादव ने समाज के फैसले को मानने से इंकार करते हुए कहा, “मैंने भोज की तैयारी पहले ही कर ली थी और मुझे एक दिन पहले इस फैसले के बारे में जानकारी दी गई।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा कुल पुरोहित से ही कर्मकांड कराए हैं और इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई।

पंचायत की भूमिका और विवाद की जड़

भिंड के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद यादव ने इस विवाद में अपनी बात रखते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज ने यादव कथावाचकों का अपमान किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 4 जुलाई को भिंड के बड़ेरा गांव में राधा यादव की भागवत कथा आयोजित होनी थी, लेकिन स्थानीय ब्राह्मणों ने इसका विरोध किया और उसे रद्द करवा दिया। इस पर यादव समाज ने 13 जुलाई को टीकरी हनुमान मंदिर में पंचायत की बैठक आयोजित की और निर्णय लिया कि अब ब्राह्मणों को समाज के कार्यों से बाहर रखा जाएगा। पंचायत ने यह फैसला भी सुनाया कि कमल यादव को यह निर्णय पहले ही बता दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया और भोज को लेकर समाज के फैसले का उल्लंघन किया, जिसके कारण उनका भोज बहिष्कार किया गया।

सामाजिक तनाव और भविष्य की दिशा

यह विवाद दोनों समुदायों के बीच गहरे मतभेदों को उजागर कर रहा है, और सामाजिक तनाव को बढ़ा रहा है। जहां यादव समाज ने ब्राह्मणों के अपमान का मुद्दा उठाया, वहीं ब्राह्मण समाज भी अपनी इज्जत और परंपराओं को लेकर खड़ा हुआ है। यह घटनाएं समाज के भीतर बढ़ते हुए विभाजन और विवाद को स्पष्ट करती हैं, और यह सवाल उठाती हैं कि क्या समाज में आपसी सम्मान और समझदारी से इस विवाद को सुलझाया जा सकता है।

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