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जानिए क्यों सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को दी चेतवानी, 1 करोड़ रुपए जुर्माना लगाने का सुनाया फैसला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 23 Nov 2023, 12:00 AM | Updated: 23 Nov 2023, 12:00 AM

बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी चेतावनी दी है और इस  चेतवानी एक तहत पतंजलि कंपनी पर 1 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता हैं. दरअसल, मंगलवार (21 नवंबर) को बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को फटकार लगाई है. मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम यानी आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ भ्रामक दावे और विज्ञापन पब्लिश करने को लेकर ये फटकार लगाई गई है.

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कोर्ट ने लगाई पतंजलि आयुर्वेद को फटकार 

जानकारी के अनुसार, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका दायर की थी और इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा- पतंजलि आयुर्वेद को सभी झूठे और भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों को तुरंत बंद करना होगा. कोर्ट ऐसे किसी भी उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लेगा और हर एक प्रोडक्ट के झूठे दावे पर 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी लगा सकता है.

इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि पतंजलि आयुर्वेद भविष्य में ऐसा कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेगा और यह भी सुनिश्चित करेगा कि प्रेस में उसकी ओर से इस तरह के कैज़ुअल स्टेटमेंट न दिए जाएं. बेंच ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को ‘एलोपैथी बनाम आयुर्वेद’ की बहस नहीं बनाना चाहती बल्कि भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों की समस्या का वास्तविक समाधान ढूंढना चाहती है.

5 फरवरी 2024 को होगी अगली सुनवाई

इसी के सतह बेंच ने भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि केंद्र सरकार को समस्या से निपटने के लिए एक व्यवहारपूर्ण समाधान ढूंढना होगा. कोर्ट ने सरकार से कंसल्टेशन के बाद कोर्ट में आने को कहा है. इस मामले पर अगली सुनवाई 5 फरवरी 2024 को होगी

पतंजलि आयुर्वेद ने दी मामले पर सफाई 

वहीँ अब इस मामले पर पतंजलि आयुर्वेद ने कहा कि उसके पास ‘एक करोड़ से अधिक लोगों का रिकॉर्ड है, जिसमें दुनिया भर के वास्तविक साक्ष्य’ मौजूद हैं. कंपनी ने कहा कि वह अदालत का सम्मान करती है और “अगर हमारे विज्ञापन झूठे पाए जाते हैं तो माननीय अदालत हमारे ऊपर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाए या फिर मौत की सजा भी दे, हमें कोई आपत्ति नहीं होगी.” वहीं रामदेव ने कहा कि अगर उच्चतम न्यायालय उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देता तो वह स्वयं अपने दावों के समर्थन में अदालत के सामने पूरे तथ्यों, क्लिनिकल साक्ष्य और वैज्ञानिक शोध पेपर के साथ पेश होने को तैयार थे. इसी के साथ उन्होंने कहा कि वह आयुर्वेद ओर योग के द्वारा गंभीर रोगों को पूरी तरह से ठीक करने के अपने दावे पर आज भी अडिग हैं.

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