अंबेडकर ने भारत की आजादी का श्रेय सिर्फ सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज को क्यों दिया?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 Mar 2023, 12:00 AM | Updated: 23 Mar 2023, 12:00 AM

बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर जिन्होंने देश में बहुजन समाज और उच्च जाति के बीच पैदा हुए भेदभाव को खत्म करने का काम किया जिसकी वजह से उन्हें बहुजन समाज का नायक कहा गया तो वहीं एक ऐसे ही एक शख्स थे जिन्होंने भारत को आज़ादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई और वो नायक थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस. जहाँ भारत को आज़ादी दिलाने को लेकर कई महात्मा लोगों का नाम लिया जाता है तो वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर का नाम सिर्फ किताबों में हैं. जहाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जाति को कोई बड़ी समस्या नहीं बताया तो वहीं बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने भारत की आज़ादी का का श्रेय नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज को दिया था और ये बात उन्होंने ये इंटरव्यू के दौरान कही थी.  

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सिर्फ 1 बार हुई इन दिग्गजों की मुलाकात 

नेताजी सुभाष चंद्र बॉस और बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर अपने समय के दिग्गज नेता थे. दोनों ही विदेश में पढ़े थे और इन दोनों नेताओं ने आजादी से पहले के भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष किया. जहाँ इन दोनों के विचार अलग थे तो वहीं ये दोनों नेता दूरदर्शी भी थे और दोनों एक दूसरे के प्रशंसक भी. इन दिगगज नेताओं की सिर्फ 1 बार मुलाकात हुई और वो तारिख थी 22 जुलाई 1940, जब ये नेता एक-दूसरे मिले इन दोनों के बीच फेडरेशन को लेकर बहुत सी बातें हुईं. इसी दौरान अंबेडकर ने बोस से अनुसूचित जातियों को लेकर एक सवाल पूछा, जिसका जवाब उन्हें बहुत संतुष्टदायक नहीं लगा और जिक्र नेताजी सुभाष चंद्र बोस के एक भाषण में किया.

जाति को लेकर क्या थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचार 

अपने एक भाषण में जाति को लेकर नेताजी में कहा कि जहां तक जाति का सवाल है, हमारे लिए ये आज कोई समस्या नहीं है, क्योंकि प्राचीन काल में जिस तरह की जाति थी, वो आज नहीं है. अब जाति, व्यवस्था का क्या अर्थ है. जाति  व्यवस्था का अर्थ है कि समाज पेशागत आधार पर कुछ समूहों में बंटा है और शादियां उन समूहों के अंदर होती हैं. आधुनिक काल में भारत में जाति के आधार पर किसी प्रकार का कोई अंतर नहीं है. किसी भी जाति का व्यक्ति कोई भी पेशा अपनाने को आजाद है. तो इस अर्थ में आज हमारे यहां जाति व्यवस्था नहीं है. फिर सवाल विवाह का रह जाता है. पुराने समय में ये प्रथा थी कि लोग अपनी जाति में विवाह करते थे. आज अंतरजातीय विवाह आम है. जाति का तेजी से लोप हो रहा है. सच्चाई तो ये है कि राष्ट्रीय आंदोलन में हम किसी व्यक्ति की जाति कभी नहीं पूछते और अपने कुछ निकटतम सहयोगियों की तो जाति भी नहीं जानते. 

बाबा साहेब ने दिया नेताजी को भारत की आजादी का श्रेय 

जहाँ जाति को लेकर सुभाष कुछ संतुष्टजनक बात नहीं कह पाए तो वहीं बाबा साहब अंबेडकर  फरवरी 1955 में फ्रांसिस वॉटसन के एक इंटरव्यू में ये साफ कहा कि भारत को आजादी शायद सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज और उनके व्यापक असर की वजह से मिली. फ्रांसिस वॉटसन से इस इंटरव्यू में बाबा साहब अंबेडकर ने कहा, ‘अंग्रेज मान कर चल रहे थे कि ब्रिटिश फौज में शामिल हिंदुस्तानी कभी भी उनके प्रति अपनी वफादारी नहीं बदलेंगे. यह अलग बात है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आईएनए के पराक्रम के किस्से सुनने के बाद ब्रिटिश फौज में शामिल भारतीय सैनिकों के मन में भी विद्रोह के स्वर फूटने लगे थे. इसके अलावा आईएनए के 40 हजार सैनिकों के भारत आने की खबर ने भी अंग्रेजों को महसूस करा दिया कि इस देश में अब उनका राज करना मुश्किल है. ये देश बदलने लगा है.

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