WhatsApp Privacy controversy: व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय यूजर्स का डेटा मेटा के साथ साझा करना देश में निजता के अधिकार का उल्लंघन है। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप को निर्देश दिया, “हम आपको मेटा के साथ कोई भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे। इस देश की प्राइवेसी नीतियों के साथ खेलने की इजाजत कतई नहीं है।”
तीन अपीलें और कानूनी पहलू (WhatsApp Privacy controversy)
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में तीन अपीलें दर्ज हैं मेटा, व्हाट्सएप और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की ओर से। इन अपीलों का पक्ष सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने रखा। सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने अदालत को बताया कि 213 करोड़ रुपये का जुर्माना पहले ही जमा कर दिया गया है। वहीं, CCI ने एनसीएलएटी (NCLAT) के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई।
प्राइवेसी पॉलिसी पर तीखे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। CJI ने कहा कि पॉलिसी इतनी जटिल और चालाकी से बनाई गई है कि आम नागरिक इसे समझ ही नहीं पाएंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर या छोटे विक्रेता इस नीति को समझ सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐप की आदत डालकर यूजर्स को मजबूर किया जा रहा है और उनकी मजबूरी का व्यावसायिक फायदा उठाया जा रहा है।
डेटा का गलत इस्तेमाल और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों के डेटा का गलत इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है। लाखों यूजर्स के डेटा का पहले ही दुरुपयोग हो चुका है। मेटा के वकील अखिल सिबल ने तर्क दिया कि सीमित डेटा शेयरिंग की अनुमति है, लेकिन CJI ने कहा, “यदि आपको डेटा का कोई हिस्सा बेचने लायक लगेगा, तो आप बेच देंगे। सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता मूक हैं, उन्हें शिकार नहीं बनाया जा सकता।”
यूजर्स को दो विकल्प ही दिए जा रहे हैं
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि व्हाट्सएप यूजर्स के सामने केवल दो विकल्प हैं या तो पॉलिसी स्वीकार करें या ऐप बंद कर दें। कोर्ट ने इस पर चिंता जताई कि देश के दूरदराज इलाकों और गांवों में रहने वाले लोग, जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती, नीति के खतरनाक प्रभाव को समझ ही नहीं पाएंगे।
डेटा शेयरिंग की अनुमति से साफ इनकार
CJI ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक व्हाट्सएप यह साबित नहीं करता कि उसे डेटा शेयर करने का कोई दैवीय अधिकार हासिल है, तब तक उसे डेटा शेयर करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब इन अपीलों पर विस्तृत सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच के सामने होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि एनसीएलएटी के जनवरी 2025 के आदेश की स्थिति अभी भी अहम है। इस फैसले से भारत में डिजिटल प्राइवेसी और बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही तय होगी।
