UP Manjha Ban: लखनऊ के दुबग्गा निवासी 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब की बुधवार को हुई दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया। दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (MR) के रूप में काम करने वाले शोएब अपनी स्कूटी से जा रहे थे, तभी हैदरगंज-तालकटोरा फ्लाईओवर पर अचानक पतंग का चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में फंस गया। इतनी गंभीर चोट के कारण उन्हें मौके पर ही मृत घोषित कर दिया गया। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि चाइनीज मांझे की खतरनाक प्रकृति और प्रशासन की सख्ती की आवश्यकता को भी उजागर करती है।
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मुख्यमंत्री का कड़ा रुख (UP Manjha Ban)
इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुःख जताया और पुलिस महानिदेशक (DGP) तथा गृह विभाग को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एनजीटी और अदालतों द्वारा प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का बाजार में उपलब्ध होना गंभीर चूक है। सीएम ने स्पष्ट किया कि अब से चाइनीज मांझे के कारण होने वाली किसी भी मौत को ‘हत्या’ की श्रेणी में रखा जाएगा और दोषियों के खिलाफ उसी के अनुरूप कार्रवाई होगी।
यूपी | लखनऊ में चाइनीज मांझे ने 33 साल के मोहम्मद शोएब की जान ले ली। वो बाइक से जा रहे थे। गले में मांझा उलझ गया। खून की धार बह निकली। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के डेढ़ घंटे बाद ही शोएब की मौत हो गई।
महत्वपूर्ण बात :– UP में कागजों में चाइनीज मांझा बैन है !! pic.twitter.com/6cv0h1tF6s
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) February 5, 2026
प्रदेश भर में छापेमारी और अलर्ट
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस अलर्ट मोड में है। थानों को आदेश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी पतंग और मांझे की दुकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाएं। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि अगर किसी इलाके में प्रतिबंधित मांझा मिलता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
चाइनीज मांझा क्यों इतना खतरनाक है?
चाइनीज मांझा पारंपरिक सूती धागे से बिल्कुल अलग है। इसे नायलॉन या पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक मटेरियल से बनाया जाता है और इसमें एल्युमिनियम, स्टील या टंगस्टन कार्बाइड जैसे धातु के पाउडर और बारीक कांच के कण मिलाए जाते हैं। इसका धागा इतना तेज और मजबूत होता है कि यह हाथ से खींचने पर नहीं टूटता, बल्कि इंसानी मांस और नसों को आसानी से काट सकता है। यही कारण है कि यह सिर्फ खतरनाक नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित होता है।
कानूनी कार्रवाई और जुर्माना
चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986) की धारा 15 के तहत प्रतिबंधित है। इसके उल्लंघन पर 5 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी के नए निर्देश के बाद, अब इस तरह की दुर्घटना में हत्या से जुड़ी धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया जाएगा, जिससे कार्रवाई और भी कड़ी हो गई है।
सुरक्षा और जागरूकता जरूरी
शोएब की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाइनीज मांझे न केवल कानून की अनदेखी का परिणाम हैं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्रतिबंध से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। लोग किसी भी प्रकार का तेज मांझा या प्रतिबंधित पतंग देखकर प्रशासन को सूचना दें और बच्चों व स्कूटी/बाइक चालकों को सावधानी बरतने के लिए लगातार चेताया जाए।
इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से चाइनीज मांझे की खतरनाक प्रकृति पर सवाल खड़ा कर दिया है और यह भी दिखाया कि सुरक्षा और सख्ती के बिना युवा और आम नागरिक खतरे में हैं।






























