Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद की खबरों में कानून, अपराध, शहर का विकास, सेहत और हमारी खोती हुई विरासत से जुड़े कई बड़े अपडेट्स सामने आए हैं। सबसे पहले बात करेंगे दिल्ली यूनिवर्सिटी के PhD छात्र वैभव सिंह मौत मामले की, जिसमें घटना के 11 दिन बाद एक बड़ा मोड़ आया है और पुलिस ने छात्र की गर्लफ्रेंड समेत दो पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।वहीं, यातायात को लेकर नोएडा प्राधिकरण और परिवहन निगम ने बड़ा फैसला लिया है।
नोएडा से गाजियाबाद चलने वाली 26 इलेक्ट्रिक बसों का रूट अब बदल दिया गया है।इसी के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की एक कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाते हुए ‘निजता के अधिकार’ और ‘वैज्ञानिक जांच’ के संतुलन पर एक बेहद अहम टिप्पणी की है, जिसमें पुलिस कमिश्नर से हलफनामा भी मांगा गया है। स्वाइन फ्लू के बीच जिले में डेंगू का खतरा तेजी से मंडरा रहा है,
और चौंकाने वाली बात यह है कि इसका सबसे ज्यादा लार्वा शहर के पॉश इलाकों में मिल रहा है। और आखिर में प्रशासन की उस बड़ी लापरवाही की, जिसके कारण पुराने गाजियाबाद के दो ऐतिहासिक दरवाजे गायब हो चुके हैं और एक साल बाद भी जांच रिपोर्ट पेंडिंग है। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी खबरों को विस्तार से जानते हैं।
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PHD छात्र की मौत के मामले में 11 दिन बाद गर्लफ्रेंड पर FIR
गाजियाबाद की पहली खबर सिद्धार्थ विहार से जहां प्रतीक ग्रैंड सिटी सोसाइटी में 27वीं मंजिल से गिरकर हुई पीएचडी छात्र वैभव सिंह की मौत के मामले में एक नया मोड़ आया है। घटना के 11 दिन बाद पुलिस ने छात्र की गर्लफ्रेंड रितिका शाह और उसकी दोस्त दिव्यांशी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) का मुकदमा दर्ज किया है। मृतक के फूफा ने दोनों युवतियों पर शक जताते हुए गाजियाबाद के विजयनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने यह कानूनी कार्रवाई की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि राजस्थान के जोधपुर निवासी 23 वर्षीय वैभव सिंह। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज से पीएचडी (PhD) की पढ़ाई कर रहे थे। यह दुखद घटना 25 अगस्त 2026 की शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच प्रतीक ग्रैंड सिटी सोसाइटी के टावर सी-4 में हुई थी। वैभव पिछले एक सप्ताह से वहां अपनी बुआ-फूफा के घर रह रहे थे।
शुरुआती जांच के दौरान पुलिस को सीसीटीवी कैमरों में वैभव अकेले ही सीढ़ियों और लिफ्ट के जरिए 27वीं मंजिल की तरफ जाते हुए दिखाई दिए थे। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था। पहले पुलिस इसे शुरुआती तौर पर आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही थी, लेकिन परिवार की शिकायत और गर्लफ्रेंड व उसकी दोस्त पर शक के बाद अब पुलिस इस नए एंगल (आत्महत्या के लिए उकसाने) से मामले की गहन छानबीन कर रही है।
नोएडा-गाजियाबाद रूट की 26 इलेक्ट्रिक बसों का बदला रूट (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की दूसरी खबर इलेक्ट्रिक बसों को लेकर है, जहां नोएडा से गाजियाबाद रूट पर चलने वाली 26 ई-सिटी (इलेक्ट्रिक) बसों को लेकर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने एक बड़ा फैसला किया है। अब ये बसें गाजियाबाद नहीं जाएंगी, बल्कि इनका संचालन ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना अथॉरिटी (YEIDA) के विभिन्न आंतरिक रूटों पर किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बदलाव के पीछे मुख्य कारण कासना सहित गौतमबुद्ध नगर जिले में ही पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकसित होना है। पहले इन बसों को चार्जिंग आवश्यकताओं के कारण गाजियाबाद रूट पर भेजना पड़ता था।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि कुल 26 ई-सिटी बसें प्रभावित हुई हैं, जो पहले नोएडा के सेक्टर-90 डिपो से गाजियाबाद के बीच चलती थीं। इन बसों को अब ग्रेटर नोएडा के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों, नोएडा के बाहरी सेक्टर्स और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (यीडा) के अंतर्गत आने वाले रूटों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) वर्तमान में इन बसों के सुचारू संचालन के लिए नए रूट तैयार कर रहा है। यह विस्तृत रूट प्लान जल्द ही परिवहन निगम को सौंप दिया जाएगा, जिसके बाद नए रूटों पर यात्रा शुरू हो जाएगी। इस फैसले से नोएडा-ग्रेटर नोएडा के उन अंदरूनी इलाकों और गांवों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जहां अभी तक सिटी बसों की कमी थी।
पुराने शहर के दो ऐतिहासिक दरवाजे गायब (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की तीसरी खबर पुराने शहर की पहचान और इतिहास का हिस्सा रहे दो ऐतिहासिक दरवाजे (गेट) समय के साथ पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन ऐतिहासिक धरोहरों के गायब होने की शिकायत पर जिला प्रशासन ने जांच तो बैठाई, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है। इस लापरवाही की वजह से ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाने वाले भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुराने गाजियाबाद की सीमा तय करने वाले चार ऐतिहासिक गेटों में से सिहानी गेट और शाही गेट का वजूद अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। जहां पहले सिहानी गेट हुआ करता था वहां आज कपूर बेकरी है, और चौपला मंदिर के आगे भोलानाथ पंसारी की दुकान के सामने शाही गेट की स्थिति थी। इतिहासकार एस.एन. शर्मा के अनुसार, गाजियाबाद साल 1975 तक मेरठ की एक तहसील हुआ करता था। उस समय तक ये चारों दरवाजे सुरक्षित और मौजूद थे।
पूरा शहर इन्हीं चार द्वारों के भीतर ही बसता था। वर्तमान में घंटाघर के पश्चिम में दिल्ली गेट और पूर्व में रमतेराम रोड पर स्थित डासना गेट ही किसी तरह बचे हुए हैं, हालांकि दिल्ली गेट के फाटक भी अब बेहद जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। पिछले साल इन दोनों ऐतिहासिक दरवाजों के गायब होने और उन पर हुए अवैध निर्माण व अतिक्रमण की शिकायत तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट (DM) से की गई थी। डीएम ने इस गंभीर मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी थी, लेकिन एक साल बाद भी इसकी रिपोर्ट पेंडिंग है।
स्वाइन फ्लू के बीच डेंगू का बढ़ता खतरा (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की चौथी खबर स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर है। जहां स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच बारिश के बाद डेंगू का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए जा रहे सर्वे में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि डेंगू का सबसे अधिक लार्वा शहर के पॉश इलाकों और हाईराइज सोसायटियों में मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घरों और आसपास के स्थानों की जांच कर रही हैं, जिसमें अब तक सैकड़ों स्थानों पर लार्वा की पुष्टि हो चुकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में लोहियानगर, राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक, वसुंधरा, वैशाली और कौशांबी जैसे वीआईपी और पॉश इलाकों में सबसे ज्यादा डेंगू का लार्वा पाया गया है। जिले में अब तक डेंगू के 10 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। पिछले एक महीने में 4,500 से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच की जा चुकी है और रोजाना 500 से 600 लोगों का टेस्ट किया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा के अनुसार, डेंगू के लार्वा की जांच और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की 40 टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। इन टीमों ने अब तक 865 से अधिक स्थानों पर लार्वा खोजा है, जहां युद्धस्तर पर एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि “बारिश के बाद घरों के आसपास पानी जमा होने से डेंगू का लार्वा पनपने का खतरा बढ़ जाता है। कूलर, गमले, छत और अन्य स्थानों पर पानी जमा न होने दें। पॉश इलाकों में घरों के अंदर रखे मनी प्लांट के गमलों, फ्रिज की ट्रे और छतों पर जमा साफ पानी में यह लार्वा पनप रहा है।
पत्रकार मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की पांचवी खबर आपराधिक मामलों के लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की। अदालत ने साफ कहा कि वैज्ञानिक जांच (Scientific Investigation) और नागरिक के निजता के अधिकार (Right to Privacy) के बीच एक संवैधानिक संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। डिजिटल युग में अत्यधिक और मनमानी निगरानी को रोकने के लिए अदालत का यह रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह टिप्पणी सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने टिप्पणी की कि तकनीक के विकास ने आपराधिक जांच को जटिल बना दिया है। अदालत ने कहा, “एक तरफ अगर एजेंसियां वैज्ञानिक तरीके से जांच नहीं करती हैं तो उन्हें कोर्ट और पीड़ित की फटकार सुननी पड़ती है और दूसरी तरफ अगर वे ऐसा करती हैं तो उन पर प्राइवेसी के उल्लंघन का आरोप लगता है। यह पूरा मामला स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि गाजियाबाद पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज एक मामूली रोड रेज के मामले को बहाना बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ से उनके पिछले कई महीनों के डिजिटल फुटप्रिंट्स (IMEI नंबर और सोशल मीडिया रिकॉर्ड) मांग लिए हैं, ताकि उनके खोजी पत्रकारिता के स्रोतों (Sources) का पता लगाया जा सके।
अदालत ने गाजियाबाद पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ा सवाल उठाया और पूछा कि “एक रोड रेज के मामले में आपको आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट्स की आवश्यकता क्यों होगी? सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर जांच के लिए ‘X’ से किस तरह की और क्यों जानकारी मांगी गई है। साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक आरोपी की किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक न किया जाए।
