Gurudwaras in Ahmedabad: ये लेख एक सवाल से शुरु करते है, क्या आप जानते है कि भारत का वो कौन सा शहर है, जिसे यूनेस्को ने पहली बार वर्ल्ड हैरीटेज सीटी की सूचि में शामिल किया था… वो शहर जो करीब 600 साल से भी पुराना है, और आज अपने राज्य की आर्थिक राजधानी भी है.. ये राज्य है गुजरात का शहर अहमदाबाद। 1960 में जब बॉम्बे राज्य से अलग होकर गुजरात राज्य बना तब अहमदाबाद को ही गुजरात की राजधानी चुना गया था, लेकिन 1970 में गाँधी नगर को बनाया गया और अहमदाबाद गुजरात की आर्थिक राजधानी बनी.. लेकिन अहमदाबाद केवल अपनी आर्थिक मजबूती के लिए ही जाना नहीं जाता है, बल्कि धार्मिक सास्कृति का आपको एक अनूठा संगम भी देखने को मिलेगा.. मंदिर हो, मस्जिद हो या गुरुद्वारे.. धार्मिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण पेश करते है.. खासकर यहां बने हुए गुरुद्वारे.. जो यहां रहने वाले सिखों के अटूट विश्वास की कहानी कहते है। अपने इस लेख में हम अहमदाबाद के 5 गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे।
गुरुद्वारा श्री गुरुनानक दरबार – Gurdwara Shri Guru Nanak Darbar
सिखो के पहले गुरु गुरु नानकदेव जी को समर्पित गुरुद्वारा श्री गुरुनानक दरबार अहमदाबाद के सबसे पुराने और फेमस गुरुद्वारा है। यह अहमदाबाद के ओधव रोड पर स्थित एक सफेद गुबंदो वाला विशाल गुरुद्वारा है। इस गुरुद्वारे की स्थापना अहमदाबाद में रहने वाले सिख संगतो ने साल 1908 में करवाया था, जब वो सूती कपड़ा मिल में भारी संख्या में काम करने के लिए अहमदाबाद आये थे। ये गुरुद्वारा सातो दिन खुलता है, संगते सुबह 4 बजे से रात को 10 बजे तक मत्था टेक सकते है। हर रविवार को सजने वाला दीवान काफी फेमस है।
गुरुद्वारा प्रेमसभा अकाली दल – Gurdwara Prem Sabha Akali Dal
अहमदाबाद के सरसपुर में स्थिति गुरुद्वारा प्रेमसभा अकाली दल भी शहर के पुराने और ऐतिहासिक गुरुद्वारों की सूचि में शामिल है। इसे सरसपुर गुरुद्वारा भी कहा जाता है। ये गुरुद्वारा 1920 से 1930 के बीच में शिरोमणि अकाली दल के सक्रिय होने और गुरुद्वारों पर अकाली दल के अधिपत्य होने के बाद बनाया गया था। वही अकाली आंदोलन से प्रेरित होकर गुरुद्वारे का नाम रखा गया था। ये रोजाना सुबह 4.30 बजे खुलता है और रात को 9.30 बजे बंद होता है। यहां भक्तो के लिए ठहरने के विशेष व्यव्स्था है।
गुरुद्वारा श्री दशमेश दरबार – Gurdwara Sri Dashmesh Darbar
सिखो के दसवे गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित गुरुद्वारा श्री दशमेश दरबार अहमदाबाद के ईसनपुर क्षेत्र में है। इस गुरुद्वारे का निर्माण यहां रहने वाले सिख व्यापारियों ने ने 1980 के अंत में करवाया था। ये गुरुद्वारा भी सफेद पत्थरो से बनाया गया है, जिसपर नक्काशी और सिख वास्तुकला की भव्यता दिखती है। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 5 बजे खुलता है और रात को 8 बजे बंद होता है।
सिख गुरुद्वारा साबरमति – Sikh Gurudwara Sabarmati
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के साबरमति आश्रम से मात्र 5 किलोमीटर दूर स्थित सिख गुरुद्वारा साबरमति अहमदाबाद में शांति और स्वच्छता का प्रतीक है। ये गुरुद्वारा 1950 से लेकर 1960 के बीच में बनाया गया था। जैसे जैसे साबरमति का विस्तार हो रहा था, सिख परिवार यहां आकर बसने लगे, जिसके बाद उन्होंने ही यहां गुरुद्वारे का निर्माण करवाया था। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 5 बजे खुलता है और और पात को 9.30 बजे बंद होता है।
गुरुद्वारा गोविंद धाम – Gurudwara Govind Dham
अहमदाबाद के थलतेज इलाके के सरखेज गांधीनगर हाइवे पर स्थिति गुरुद्वारा गोबिंद धाम दसवे गुरु गुरू गोबिंद सिंह को समर्पित है। ये बेहद ही विशाल और भव्य गुरुद्वारा है, जिसे सबसे द्यादा पर्यटक देखने और मत्था टेकने आते है। इस गुरुद्वारे को साल 1994 में बनाया गया था। जो कि संगत का, संगत के लिए, संगत द्वारा के सिद्धांत पर आधारित है। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 4 बजे खुलता है और रात को 10 बजे बंद होता है। यहां होने वाला लंगर, पूरे गुजरात का सबसे बड़ा लंगर माना जाता है। दूसरे स्थानो से आने वाले भक्तो के लिए यहां रहने की भी व्यवस्था है। ये है अहमदाबाद के 5 प्रमुख गुरुद्वारे, जो सिक्खी की परंपरा को बखूबी निभा रहे है।













































