देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने वाली द्रौपदी मुर्मू की संघर्ष भरी कहानी, जानिए कैसे तय किया टीचर से राष्ट्रपति बनने तक का सफर

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 25 Jul 2022, 12:00 AM | Updated: 25 Jul 2022, 12:00 AM

द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई यानी की सोमवार को देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। द्रोपदी मुर्मू देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति हैं। द्रौपदी मुर्मू को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एन.वी. रमणा ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। आईए जानते है कि देश की 15वीं राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाली पहली आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू कौन है। 

देश की राष्ट्रपति पद पर काबिज होने वाली द्रौपदी मुर्मू दूसरी महिला बन गई है। इससे पहले प्रतिभा पाटिल देश की 12वीं राष्ट्रपति बन चुकी है। द्रौपदी मुर्मू को ऐसा गौरव मिलना हर महिला के लिए प्रेरणा का श्रोत है। द्रौपदी मुर्मू के जीवन की संघर्ष भरी कहानी क्या है। कैसे उन्होंने इतना लंबा सफर तय कर राष्ट्रपति पद की कमान हासिल की।

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राष्ट्रपति पद के लिए NDA की तरफ से द्रौपदी मुर्मू का नाम दिया गया

गौरतलब है कि द्रौपदी मुर्मू ने बीते महिने 20 जून को ही अपना जन्मदिन मनाया। लेकिन आनेवाला समय उन्हें राष्ट्रपति बनने का तोहफा देगा इसकी कामना शायद ही उन्होंने की होगी। जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद ही यानि की 21 जून को राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू का नाम दिया गया था। 

आजादी के बाद पैदा हुई पहली राष्ट्रपति

द्रौपदी मुर्मू ऐसी पहली राष्ट्रपति है जो आजादी के बाद पैदा हुई है। इसके साथ ही वे राष्ट्रपति बनने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत बनी। द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था। द्रौपदी मुर्मू ने रायरंगपुर के श्री अरबिंदो इंटग्रेटेल एजुकेशन एंड रिसर्च में 1994 से 1997 के बीच एक टीचर के तौर पर काम किया। साथ ही उन्होंने बतौर टीचर प्राथमिक स्कूलों में अलग-अलग विषयों को पढ़ाया। इसके बाद 1997 में उन्होंने अधिसूचित क्षेत्र परिषद में एक निर्दलीय के रुप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 

द्रौपदी मुर्मू कौन है

द्रौपदी मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ। उनके पिता का नाम बैरंची नारायण टुडू है। वे एक आदिवासी संथाली परिवार से है। द्रौपदी मुर्मू ने अपनी पढ़ाई कुसुमी तहसील के छोटे से गांव उपरबेड़ा में बसे एक छोटे से स्कूल से की। वहीं उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री रामादेवी महिला महाविधायक भुवनेश्वर से हासिल की। 

मुर्मू ने अपना परिवार खोया

द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई, जिनसे उन्हें दो बेटे और एक बेटी हुई। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने अपने दोनों बेटे और पति को खो दिया। पति और बच्चों की मौत के बाद द्रौपदी मुर्मू टूट चुकी थी। जिसके बाद उन्होंने अपने घर को एक बोर्डिंग स्कूल में तब्दील कर दिया। आज भी वहां बोर्डिंग स्कूल चलाया जाता है। 

क्लर्क पद पर की नौकरी 

द्रौपदी मुर्मू ने फिर से अपने करियर की शुरुआत की और उन्होंने ओडिशा के सिंचाई डिपार्टमेंट में क्लर्क पद पर नौकरी की। इस दौरान मिले वेतन से उन्होंने अपना घर संभाला और अपनी बेटी इति मुर्मू को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया। कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद बेटी ने भी एक बैंक में नौकरी की। इति मुर्मू की शादी गणेश से हो चुकी है और वे फिलहाल रांची में रहती है। दोनों की एक बेटी आद्धाश्री है। 

कैसे की अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत

द्रौपदी मुर्मू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2000 में की। ओडिशा के मयूरभंज जिले की रायरंगपुर सीट से 2000 से 2009 के बीच बीजेपी के टिकट से दो बार विधायक चुनी गई। वहीं बीजू जनता दल और बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार में 2000 से 2004 के बीच कई मंत्री पदों पर कार्यभार संभाला। इसके बाद 2014 में उन्होंने रायरंगपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 

2015 में द्रौपदी मुर्मू बनी झारखंड की राज्यपाल

द्रौपदी मुर्मू ने 2015 में झारखंड की 9वीं राज्यपाल की कमान संभाली। इस दौरान झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का खिताब भी उन्हें मिला। इसके साथ ही वे झारखंड की लंबे समय तक राज्यपाल बने रहने की लिस्ट में भी शामिल रही। साथ ही भारत के राज्य में पहला आदिवासी राज्यपाल के तौर पर भी उनका नाम दर्ज किया गया। इसके बाद वहां अपना कार्यभार संभालने और पूरा करने के बाद वे अपने पैतृक घर लौट आई और सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही। 

द्रौपदी मुर्मू ने रचा इतिहास

वहीं आज यानि की 25 जुलाई को द्रौपदी मुर्मू ने देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बन इतिहास रचा। साथ ही देश की पहली आदिवासी और सबसे कब उम्र की राष्ट्रपति बनने का खिताब भी अपने नाम किया। इसके अलावा द्रौपदी मुर्मू स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति भी है। 

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