कभी सड़क किनारे किताबें बेचता था ये लड़का आज है 22 शेल्टर होम का सहारा| Tarun Mishra Biography

Nandani | Nedrick News Published: 13 Apr 2026, 11:34 AM | Updated: 13 Apr 2026, 11:34 AM

Tarun Mishra Biography: कुछ कहानियां सिर्फ सुनने के लिए नहीं होतीं, बल्कि दिल में उतर जाती हैं और सोच बदल देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है तरुण मिश्रा की, जिन्होंने बचपन की मुश्किलों को अपनी ताकत बनाया और आज सैकड़ों बेसहारा लोगों के लिए उम्मीद बन चुके हैं। तरुण मिश्रा पिछले कई सालों से समाज सेवा में लगे हुए हैं। उनका सफर आसान नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल को एक सीख की तरह लिया और आगे बढ़ते रहे।

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बचपन की मुश्किलों ने बदली सोच | Tarun Mishra Biography

तरुण बताते हैं कि उनका बचपन दिल्ली के सरोजनी नगर इलाके में बीता। उनके पिता एक केमिस्ट की दुकान पर काम करते थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जब वह छठी कक्षा में थे, तभी उनके पिता की नौकरी चली गई। घर की आर्थिक हालत अचानक बिगड़ गई। ऐसे में छोटी उम्र में ही तरुण को जिम्मेदारी समझ आ गई। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने सरोजनी नगर मार्केट में हनुमान मंदिर के सामने किताबें बेचना शुरू कर दिया। यहीं से उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया। सड़क पर रहने वाले, भीख मांगने वाले और बेसहारा लोगों को देखकर उनका मन विचलित होने लगा। उन्होंने तय कर लिया कि एक दिन वह इन लोगों के लिए कुछ जरूर करेंगे।

गांव में संघर्ष और पढ़ाई का जुनून

करीब एक साल तक किताब बेचने के बाद तरुण ने यह काम अपने पिता को सौंप दिया और खुद बिहार के समस्तीपुर में अपने नाना के घर चले गए। गांव का जीवन उनके लिए नया और चुनौतीपूर्ण था। बिजली की कमी के कारण उन्हें दीये की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती थी। साथ ही खेती-बाड़ी में भी हाथ बंटाना पड़ता था। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें और मजबूत बना दिया। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से ही पूरी की और अपने लक्ष्य पर डटे रहे।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई और नई चुनौतियां

12वीं पास करने के बाद तरुण दिल्ली लौटे और इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम पास कर बीटेक में दाखिला लिया। लेकिन यहां भी आर्थिक तंगी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। किराया देने में असमर्थ होने के कारण वह एक शेल्टर होम में रहने लगे और वहीं काम भी करने लगे। जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आ रही थी, लेकिन तभी एक और बड़ा झटका लगा। इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर में उनके पिता का निधन हो गया और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।

पढ़ाई छोड़ काम की तलाश

परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए तरुण को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। वह काम की तलाश में गुजरात चले गए, जहां उन्होंने घर-घर जाकर सामान बेचा। हालांकि इस दौरान भी उन्होंने समाज सेवा का काम नहीं छोड़ा। वह एक एनजीओ से जुड़कर लोगों की मदद करते रहे और धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर काम का अनुभव हासिल करते गए।

2018 में शुरू हुआ पहला शेल्टर होम

तरुण के जीवन का असली मोड़ साल 2018 में आया, जब उन्होंने सूरत नगरपालिका से संपर्क कर अपना पहला शेल्टर होम शुरू किया। नगरपालिका ने उनके काम को देखते हुए एक छोटी सी जगह उपलब्ध कराई। यह पहल सफल रही और लोगों का भरोसा भी बढ़ने लगा। उनकी मेहनत और ईमानदारी को देखते हुए सरकार और समाज दोनों का सहयोग मिलने लगा।

आज 22 शेल्टर होम का नेटवर्क

लगातार मेहनत का ही नतीजा है कि आज तरुण मिश्रा ‘हेल्प ड्राइव फाउंडेशन’ के जरिए मुंबई और गुजरात में कुल 22 शेल्टर होम चला रहे हैं। इन शेल्टर होम्स में सैकड़ों जरूरतमंद और बेसहारा लोगों को रहने, खाने और नई जिंदगी शुरू करने का मौका मिल रहा है। 2021-22 के दौरान जब उन्होंने कई गुमशुदा लोगों को उनके परिवार से मिलवाया, तो उनकी पहल सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गई। आज इंस्टाग्राम पर उनके 1.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

समाज को जोड़कर करते हैं मदद

तरुण की खास बात यह है कि उन्होंने कभी सीधे तौर पर दान नहीं मांगा। उन्होंने लोगों को जोड़ने का काम किया। कोई छात्र बच्चों को पढ़ा देता है, तो कोई शादी या अन्य मौके पर खाने का इंतजाम कर देता है। इस तरह आज उनकी टीम में करीब 150 लोग जुड़े हुए हैं।

सिर्फ सहारा नहीं, आत्मनिर्भरता भी

तरुण सिर्फ लोगों को शेल्टर ही नहीं देते, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर देते हैं। किसी के लिए छोटी दुकान खुलवा देते हैं, तो किसी को काम दिलाने में मदद करते हैं। साथ ही शेल्टर होम के बच्चों की पढ़ाई पर भी खास ध्यान दिया जाता है। उनका मानना है कि अगर परिवार का एक बच्चा भी पढ़-लिख जाए, तो वह पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल सकता है।

एक इंसान, कई जिंदगियों की उम्मीद

तरुण मिश्रा की कहानी इस बात का सबूत है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, रास्ता खुद बन जाता है। आज वह उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जिनके पास ना घर है, ना सहारा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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