Supreme Court SIR Hearing: पश्चिम बंगाल की राजनीति अब सड़क और विधानसभा से निकलकर सुप्रीम कोर्ट के भीतर संवैधानिक बहस का रूप ले चुकी है। वोटर लिस्ट रिवीजन यानी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर मचे विवाद की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहीं। कोर्ट नंबर-1 में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, माहौल गंभीर और संवेदनशील नजर आया। इस मामले को लेकर न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी से बढ़ा मामले का सियासी वजन (Supreme Court SIR Hearing)
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह अपने आवास से सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हुईं और करीब 10:30 बजे कोर्ट नंबर-1 में पहुंचीं। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान मौजूद थे, जबकि राज्य सरकार की ओर से कपिल सिब्बल पहले ही कोर्ट में दलीलें रख चुके हैं। कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था और सियासी हलकों में इस सुनवाई को लेकर काफी हलचल देखी गई।
ममता बनर्जी का आरोप: सिर्फ बंगाल को बनाया जा रहा निशाना
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया के जरिए केवल पश्चिम बंगाल को टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब असम और अन्य उत्तरी राज्यों में भी चुनाव होने वाले हैं, तो वहां इस तरह का स्पेशल रिवीजन क्यों नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगती है और इसका सीधा असर आम मतदाताओं पर पड़ रहा है।
दस्तावेजों को लेकर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने अदालत को बताया कि SIR के तहत मतदाताओं से आधार कार्ड के साथ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में निवास प्रमाण पत्र या जाति प्रमाण पत्र तक को मान्य नहीं किया जा रहा, जबकि दूसरे राज्यों में ऐसी सख्ती नजर नहीं आती। मुख्यमंत्री ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी प्रक्रिया लागू करना संदेह पैदा करता है।
‘न्याय दरवाजे के पीछे रोता हुआ लगता है’- ममता
मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा कि कई बार उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने कई बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। ममता बनर्जी ने साफ किया कि वह किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपने राज्य के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट आई हैं।
CJI का हस्तक्षेप, संतुलन बनाने की कोशिश
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री की बात के बीच हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने विधिवत याचिका दायर की है और उसकी ओर से देश के शीर्ष वकील कोर्ट में दलीलें रख रहे हैं। CJI ने दोहराया कि अदालत का उद्देश्य किसी भी वैध मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से बाहर होने से रोकना है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान संभव है और कोर्ट इसी दिशा में काम कर रही है।
कपिल सिब्बल की दलीलों का जिक्र
CJI ने यह भी याद दिलाया कि 19 जनवरी को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट के सामने SIR प्रक्रिया से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों और वास्तविक आशंकाओं को विस्तार से रखा था। खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया था कि कहीं वैध निवासियों के नाम वोटर लिस्ट से न कट जाएं। अदालत ने कहा कि वह इन चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।
अंतरिम आदेश की मांग, समय की कमी का हवाला
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कोर्ट से तत्काल अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की। उन्होंने बताया कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं और सुनवाई पूरी करने के लिए महज चार दिन का समय शेष है। दीवान ने आंकड़ों के जरिए बताया कि अब तक करीब 32 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ के रूप में चिन्हित किया जा चुका है।
आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि एलडी पोस्ट ड्राफ्ट रोल में 1.36 करोड़ नाम शामिल हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है। 16 दिसंबर 2025 से अब तक करीब 88 लाख सुनवाइयां हो चुकी हैं, जिनकी औसत दर 1.8 लाख प्रतिदिन रही। वहीं अब भी करीब 63 लाख सुनवाइयां लंबित हैं, जिन्हें समय पर पूरा करने के लिए रोजाना 15.5 लाख मामलों की सुनवाई जरूरी होगी। उन्होंने बिना वैधानिक आधार के 8,300 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए जाने पर भी सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच और माहौल
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नियमित बेंच कर रही है, जिसमें जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं। सुनवाई से पहले कुछ देर तक कोर्ट में बेंच के बैठने का इंतजार भी करना पड़ा, जिस दौरान कोर्ट रूम में हलचल बनी रही।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल
न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, इस मामले ने सियासी गलियारों में हलचल और तेज कर दी है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि SIR प्रक्रिया के जरिए लाखों मतदाताओं के वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप भी लगाया है।
फैसले पर टिकी देश की नजर
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही है। माना जा रहा है कि इस केस का फैसला सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि देशभर की चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े नियमों पर भी गहरा असर डाल सकता है। ऐसे में इस सुनवाई को भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
