बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर (Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar) की ज़िंदगी की ऐसी बातें (Facts), जो हर किसी को जाननी चाहिए!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 27 Jul 2022, 12:00 AM | Updated: 27 Jul 2022, 12:00 AM

आज हम आपको महान समाज सुधारक, हमारे देश के संविधान रचयिता , एक निपुण और कुशल राजनेता बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर (Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar) के बारे में कुछ ऐसी बातें बताएंगे , जिनको सभी भारतीय को आवश्य जाननी चाहिए। क्यूंकि अगर आप एक भारतीय हो और आपको हमारे बाबा साहेब की महानता , उदारता , कड़े संघर्ष,  अपार पीड़ा के बारे में नहीं पता तो आप सिर्फ भारतीय कहलाने मात्र हो, लेकिन भारतीयता को समझने और महसूस करने के काबिल नहीं है। 

बाबा साहेब के ज़िंदगी से जुड़े कुछ अद्भुत तथ्य (Facts)

बाबा साहेब एक हिन्दू महार जाति में पैदा हुए थे , जिसे समाज में अछूत माना जाता था। बाबा साहेब अपनी माता – पिता की आखरी और 14वीं संतान थे। 

बाबा साहेब के पास 32 डिग्रीयां थी और वो 9 भाषा के जानकार थे। 

बाबा साहेब ने भले ही जन्म एक हिन्दू धर्म में लिया था लेकिन उन्होनें हिन्दू धर्म में हो रहें जातिप्रथा के नाम पर भेदभाव और ऊंच-नीच के कारण 14 ऑक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म अपना लिया था। 

बाबा साहेब देश में लागू धारा 370 के सख्त खिलाफ थे, बाबा साहेब जम्मू-कश्मीर राज्य को एक विशेष राज्य का दर्जा देने के पक्ष में नहीं थे। 

  बाबा साहेब ने बेहतर विकास के लिए 50 के दशक में मध्य प्रदेश और बिहार के विभाजन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाबा साहेब का ये प्रस्ताव सन 2000 में जाकर ही पूरा हुआ। क्यूंकि 2000 में मध्यप्रदेश से अलग हो कर छत्तीसगढ़ और बिहार से अलग हो कर झारखण्ड राज्यों का गठन हुआ था।

हमारे तिरंगे में जो अशोक चक्र दिया गया है , वो भी बाबा साहेब अम्बेडकर की देन है। इसी चिन्ह की वजह से ही महाराजा अशोक महान की अमर कीर्ती जीवीत है।

बाबा साहेब 1947 में हमारे देश के पहले कानून मंत्री थे , कानून मंत्री को मिलाकर वो हमारे देश के चार मंत्रालयों के मंत्री भी रहें। 

बाबा साहेब ने महात्मा गांधी और कांग्रेस का दलित समाज के प्रति भेदभाव वाले रवैये के विरोध करते हुए 1945 में ‘What Congress and Gandhi have done to the untouchables’ नामक किताब लिखी। जिसका हिंदी रूपांतरण ‘कांग्रेस और गाँधी ने समाज के अछूतों के लिए क्या किया’ है। 

बाबा साहेब एक ऐसे भारतीय हैं , जिनकी प्रतिमा लन्दन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है।

बाबासाहेब विदेश जाकर अर्थशास्त्र डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे।

बाबा साहेब Viceroy’s Executive Council के सदस्य थे और बाबा साहेब की वजह से ही फैक्ट्रियों में 12-14 घंटे काम करने के नियम को बदल कर सिर्फ 8 घंटे तक का कर दिया था।

वो बाबा साहेब ही थे जिन्होंने महिलाओं के लिए 26 हफ़्तों की मैटरनिटी लीव यानि मातृत्व अवकाश देने की पहल करवाई थी। महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी बाबा साहेब की देन है। 

बाबा साहब को मरणोपरांत 31 मार्च, 1990 को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। बाबा साहेब को भारत रत्न उनके  देश और समाज के प्रति अमूल्य योगदान के लिए दिया गया था। 

बाबा साहेब एक राजनेता, समाज सुधारक, राष्ट्र निर्माता के अलावा पेशे से एक वकील भी थे। बाबा साहेब ने सिविल सर्वेंट की नौकरी भी की थी। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि बाबा साहेब एक बड़े अर्थशास्त्री भी थे। 

देश का संविधान लिखने के लिए एक ड्राफ्टिंग कमेटी यानि मसौदा समिति बनाई गयी थी , जिसके अध्यक्ष बाबा साहेब थे। 

बाबा साहेब के जन्मदिन के उपलक्ष में प्रति वर्ष 14 अप्रैल को पूरा देश अम्बेडकर जयंती मनाता है। 

उपयुर्क्त लिखी गई सभी बातें बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर (Baba saheb bhim rao ambedkar) की ज़िंदगी (Life) से जुडी कुछ ऐसी बातें (Facts) हैं , जो बाबा साहेब को सबसे अलग बनाती है और हमारे समाज में एक सर्वोत्तम महा मानव का दर्जा देती है।  

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