SIP Investment Trend India: भारत में निवेश का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। कभी बैंक एफडी, रिकरिंग डिपॉजिट और सोने में पैसा लगाना सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय विकल्प माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर अलग दिख रही है। बड़ी संख्या में लोग सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP को अपना रहे हैं। खास बात यह है कि अब लोग महीने के आखिर में बची रकम निवेश नहीं कर रहे, बल्कि महीने की शुरुआत में ही अपनी आय का एक तय हिस्सा निवेश के लिए अलग रख रहे हैं और बाकी पैसों से खर्च चला रहे हैं।
सिर्फ बचत नहीं, अब ग्रोथ भी जरूरी (SIP Investment Trend India)
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 5 से 7 वर्षों में आम लोगों की वित्तीय प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। पहले लोग पैसा सुरक्षित रखने पर ज्यादा ध्यान देते थे, लेकिन अब वे चाहते हैं कि उनकी रकम बढ़े भी। यही वजह है कि पारंपरिक निवेश साधनों से आगे बढ़कर लोग इक्विटी और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों की ओर देख रहे हैं।
MIRA Money के को-फाउंडर आनंद के. राठी का मानना है कि यह केवल निवेश का ट्रेंड नहीं, बल्कि लोगों की मानसिकता में आया बदलाव है। अब निवेश को भविष्य की जरूरतों और आर्थिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने किया रास्ता आसान
एक बड़ा कारण डिजिटल सुविधा भी है। पहले निवेश करना आसान नहीं था। बैंक या एजेंट के पास जाना, फॉर्म भरना और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई बार जानकारी की कमी भी लोगों को पीछे रोक देती थी।
अब मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। कुछ ही क्लिक में SIP शुरू की जा सकती है। निवेश की ट्रैकिंग, स्टेटमेंट और कैलकुलेशन सब कुछ मोबाइल पर उपलब्ध है। इस आसान प्रक्रिया ने नए निवेशकों को भी बाजार से जोड़ दिया है।
महंगाई ने बदला नजरिया
महंगाई भी इस बदलाव की एक बड़ी वजह है। पहले 5-6 फीसदी ब्याज दर वाली एफडी को संतोषजनक माना जाता था। लेकिन जब रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं, तो लोगों को एहसास हुआ कि सिर्फ सुरक्षित रिटर्न काफी नहीं है। अगर महंगाई दर ज्यादा है, तो कम रिटर्न असल में पूंजी की वास्तविक वृद्धि नहीं कर पाता।
इसी सोच ने निवेशकों को ऐसे विकल्पों की तलाश में लगाया, जो लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकें। SIP इसी तलाश का एक परिणाम बनकर उभरी।
कंपाउंडिंग की ताकत समझने लगे लोग
सोशल मीडिया, फाइनेंशियल ब्लॉग्स और ऑनलाइन SIP कैलकुलेटर ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। अब लोग समझ रहे हैं कि छोटी-छोटी रकम भी लंबे समय में बड़ा फंड बना सकती है। चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग का असर धीरे-धीरे दिखता है, लेकिन समय के साथ इसका परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है।
जब निवेशक यह देखते हैं कि नियमित और अनुशासित निवेश से उनकी पूंजी कैसे बढ़ती है, तो वे लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता देने लगते हैं। यही कारण है कि SIP अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आदत बनती जा रही है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। यहां दी गई सामग्री निवेश की सलाह नहीं है।




























