Punjab News: पंजाब के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब पंजाब पुलिस की वेबसाइट से FIR (एफआईआर) डाउनलोड करना पूरी तरह मुफ्त होगा। पंजाब सरकार ने अपने पिछले फैसले पर ‘यू-टर्न’ लेते हुए 80 रुपये के सेवा शुल्क (Service Fee) को खत्म कर दिया है। पहले लोगों को डिजिटल कॉपी के लिए भी पैसे देने पड़ते थे, लेकिन अब सरकार के इस फैसले से न्याय की प्रक्रिया आम आदमी के लिए और भी सुलभ हो जाएगी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
दरअसल, इस फैसले का चौतरफा विरोध हो रहा था। वकीलों ने इसे जनहित याचिका (PIL) के जरिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है, जिसे प्राप्त करना नागरिक का मौलिक अधिकार है। वकीलों ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का हवाला दिया, जिसमें FIR को मुफ्त उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी बताया गया है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि सरकार ने अब साफ कर दिया है कि एफआईआर की डिजिटल कॉपी सांझ पोर्टल से बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड की जा सकेगी। इतना ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति हार्ड कॉपी लेना चाहता है तो वह राज्य के सांझ केंद्रों से भी बिना किसी शुल्क के इसे प्राप्त कर सकता है।
ऑनलाइन डाउनलोड करें FIR कॉपी
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इसे ‘प्रेस की आजादी पर हमला’ करार दिया था। चारों तरफ से बढ़ते कानूनी और सामाजिक दबाव को देखते हुए सरकार को आखिरकार अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
यानी जो 80 रुपये पहले देने पड़ते थे, अब वो पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं और ये नया नियम तुरंत लागू भी हो गया है। अब पंजाब में FIR की कॉपी लेने के लिए आपको एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा चाहे आप इसे ऑनलाइन डाउनलोड करें या केंद्र से प्रिंट निकलवाएं।
लगभग सभी राज्यों में मुफ्त है FIR की कॉपी
भारत के लगभग सभी राज्यों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु में FIR की कॉपी ऑनलाइन डाउनलोड करना पूरी तरह से मुफ्त है। राष्ट्रीय सरकारी सेवा पोर्टल National Government Services Portal के माध्यम से भी विभिन्न राज्यों की FIR प्रतियाँ बिना किसी शुल्क के प्राप्त की जा सकती हैं।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
कानूनी विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(2) के तहत शिकायतकर्ता को एफआईआर की प्रति मुफ्त देना अनिवार्य है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के ‘यूथ बार एसोसिएशन’ मामले के निर्देशों के अनुसार, एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है जिसे बिना किसी बाधा या शुल्क के ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।































