Indus Valley Civilization in Punjab: जब आप पंजाब की धरती का इतिहास उठाते हैं तो आपको ये जानकर बेहद गर्व महसूस होगा कि पंजाब की धरती ने केवल वीर सपूतों को ही जन्म नहीं दिया बल्कि ये वो धरती है जहाँ पहली बार शहरी और सबसे संपन्न हड़प्पा सभ्यता जन्मी और फली फूली थी। आज भले ही हड़प्पा सभ्यता का स्थान सिंधु घाटी पाकिस्तान का हिस्सा हो लेकिन भारतीय पंजाब के रोपड़ जिसे आज रूपनगर कहा जाता है, वहां तक हड़प्पा सभ्यता के निशान मिले हैं। अपने इस लेख में पंजाब के रोपड़ से सबसे मजबूत सभ्यता का कैसे कनेक्शन है इसके बारे मे जानेंगे साथ ही क्यों हड़प्पा सभ्यता को रावी नदी के किनारे पंजाब में ही विकसित किया गया होगा।
हड़प्पा सभ्यता का उदय
हड़प्पा सभ्यता पहले शहरी और पूर्ण विकसित सभ्यता मानी जाती है जिसका केंद्र भारत के पंजाब का सिंधु घाटी था, जो कि रावी नदी के किनारे में स्थित थी। हड़प्पा सभ्यता जिसे सिंधु घाटी सभ्यता भी कहा जाता है, वो भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। हड़प्पा सभ्यता 3300 से लेकर 1700 ईसा पूर्व में विकसित हुई थी। हड़प्पा सभ्यता कांस्ययुगीन सभ्यता भी कहलाती है, जो कि एक पूर्ण विकसित शहरी सभ्यता थी। पक्के मकान, जल निकासी के साधन, व्यापार में कौशल होना इस सभ्यता की पहचान थी। हड़प्पा सभ्यता की खोज पहली बार साल 1921 में दयाराम साहनी ने की थी।
इस सभ्यता के लोगों ने कृषि को बढ़ावा दिया था और गेहूं, जौ, कपास की फसलें उगाते थे साथ ही तांबे, कांसा, शंख और पकी मिट्टी (टेराकोटा) से बनी मूर्तियां, मुहरें और मनके के इस्तेमाल होने लगे थे। हड़प्पा सभ्यता सिंधु घाटी में रावी नदी के किनारे स्थापित हुई थी जिसके पंजाब के रोपड़ जिले में सतलुज नदी तक फैली होने के साक्ष्य मिले है। हड़प्पा सभ्यता लगभग 1.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला था जिसमें उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान का हिस्सा, पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैला हुआ था। ये कई नदियों में घग्गर, हकरा, सिंधु, रावी सतलुज से लेकर गुजरात के दैमाबाद या खंभात की खाड़ी क्षेत्र तक फैला हुई थी।
रोपड़ से हड़प्पा सभ्यता का रिश्ता
दरअसल 1921 के बाद हड़प्पा सभ्यता पर काफी रिसर्च की जा रही है। इसी दौरान पहले बाद सिंधु घाटी के अलावा पंजाब के रोपड़ जिले जिसे अब रूप नगर के नाम से जाना जाता है, वहां पर 1950 में बी.बी. लाल ने खुदाई के दौरान हड़प्पा सभ्यता से जुड़े अवशेष प्राप्त किये थे। जिसके बाद 1953-55 में यज्ञदत्त शर्मा उर्फ वाई.डी. शर्मा ने फिर से उत्खनन शुरू किया, जिसमें एक कब्र मिली है जिसमें एक शव k कंकाल के साथ एक कुत्ते का भी कंकाल मिला है, साथ ही तांबे/कांसे के औजार, मनके, और सेलखड़ी के मोहरे, जैसी कई और वस्तुएं भी मिली थी, जो हड़प्पा सभ्यता के समय के ही साक्ष्य है।
पंजाब का ज्यादातर हिस्सा पाकिस्तान
हड़प्पा का मुख्य केंद्र सिंध, बलूचिस्तान और पंजाब था। यानी कि पंजाब का एक बड़ा हिस्सा इस उन्नत सभ्यता का साक्षी बना था। पंजाब की भूमि ने अहम भूमिका निभाई थी। भले ही अभी पंजाब का ज्यादातर हिस्सा पाकिस्तान के पास है लेकिन वहीं रोपड़ भारतीय पंजाब का वो हिस्सा बन गया जहां दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता के निशान मिले। हालांकि ये भी विडंबना है कि कंकाल के साथ कुत्ते का कंकाल का मिलना असल में प्रथम नव पाषाण युग में कश्मीर के बुर्जहोम में प्रचलित थे। इसलिए यहां की निशानियों के हड़प्पा के साथ साथ नव पाषाण युग से भी जोड़ कर देखा जाता है। हालांकि हड़प्पा सभ्यता में लोग खेतीबाड़ी करने, पशुपालन करने, व्यापार और हस्तकला में निपुण होने के साथ साथ सामाजिक रूप से संगठित और समृद्ध होते थे।
मानव आपदाओं के कारण सभ्यता समाप्त हो गई
कैसे हुआ होगा पतन- पुरातत्वविद मानते है कि ये सभ्यतायें नदियो के किनारे बसी थी, और समय के साथ नदियों ने अपनी दिशा बदली होगी, जिससे बाढ़ और खेतो के नष्ट जैसी स्थिति उत्तपन्न हुई होगी, जिससे लोगो ने पलायन किया होगा। साथ ही प्राकृति और मानव आपदाओं के कारण सभ्यता समाप्त हो गई होगी.. हडप्पा सभ्यता से जुड़े कई रहस्यो से तो पर्दा उठ गया लेकिन तमाम कोशिशो के बाद भी इसकी लिपि को आज तक पढ़ा नहीं जा सका है, इसलिए इस सभ्यता से जुड़े कई बातें है, कई रहस्य है जिनसे पर्दा नहीं उठ सका है। रोपड़ में अब हडप्पा को और ज्यादा जानने की कोशिश की जा रही है.. लेकिन रोपड़ में मिले अवशेष भारतीय धरोहर का हिस्सा बन गया है। इसके कारण रोपड़ एक प्रमुख और विशेष नगर बन गया है। अब देखना ये होगा कि रोपड़ की धरती से और क्या क्या धरोहर सामने आते है।
