सिख धर्म में शराब और धूम्रपान है निषेध, फिर पंजाब कैसे नशाखोरी की चपेट में आया..क्यों पंजाब में तेजी से फैला नशे का जाल- Punjab

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 08 Apr 2026, 06:04 AM | Updated: 08 Apr 2026, 06:04 AM

Punjab: साल 2025 में पंजाब के बजट को पेश करने के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक घोषणा की थी। पंजाब की सरकार अब पंजाब ने एक ऐसी जनगणना कराने की तैयारी कर रही जिसमें वो पंजाब में नशेबाजों का सटीक आंकड़ा सामने आ सके। वैसे नशे के मामले में पंजाब में हाल के सालों में हेरोइन का नशा बढ़ा रहा है। जिससे यहां चित्ता के नाम जानते है, यानि की अगर आप पजांब में है और चित्ता नाम सुनते है तो समझ जाइये कि वो हेरोइन के नशे की बात कर रहे है। आकड़ो की माने तो पंजाब में नशे की लच का स्तर करीब 70 प्रतिशत घरो को अपनी चपेट में लिये हुए है।

पंजाब की बर्बादी के असली कारण?

पंजाब में नशामुक्ति केंद्र के आकड़ो के आधार पर घरेलू संर्वेक्षण से पता चला कि माझां और दोआबा क्षेत्र को मिला कर करीब 65 प्रतिशत परिवार और मालना के 64 प्रतिशत परिवार में कम से कम एक व्यक्ति इस नशे के जाल में फँसा हुआ है…ये आकड़े आपके रोंगटे जरूर खड़े कर सकते है लेकिन सबसे ज्यादा पता है शॉकिंग क्या है पंजाब में सिखों का आबादी का होना और उनका नशे के जाल में फंसना। सिख धर्म के नियमों के अनुसार सिख धर्म में धूम्रपान, या नशा करना प्रतिबंधित है, लेकिन फिर भी पंजाब नशे के जाल में फंसता चला गया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब सिख धर्म में धूम्रपान निषेध है तो फिर पंजाब कैसे नशेखोरी के गहरे कुएं में गिरता चला गया.. जानेंगे क्या है सबसे बड़ा कारण और कौन है जिम्मेदार पंजाब के युवाओ की इस हालात का।

साल 2016 में शाहिद कपूर और आलिया भट्ट की एक फिल्म आई थी उड़ता पंजाब.. इससे पहले पंजाब में नशेखोरी की दबी दबी आवाज में चर्चा होती थी लेकिन इस विवादित फिल्म ने पंजाब के असली रूप को दुनिया के सामने उजागर कर दिया.. मामलू से अफीम के नशे से शुरु पंजाब का नशा का खेल आज हेरोईन, कोकिन, स्मैक, सिंथेटिक ड्रग्स का सबसे बड़ा गढ़ बन गया।

पंजाब में कहा से आता है नशा?

पंजाब एक ऐसा राज्य है जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे इस्लामिक देशो के सबसे ज्यादा निशाने पर रहता है। क्योंकि पंजाब की सीमा इन देशों से लगती है। पाकिस्तान तो कभी पंजाब का हितैषी था ही नहीं.. कई अवसरो पर भारत से मुंह की खाने वाले पाकिस्तान ने पंजाब के युवाओं को ही निशाना बनाना शुरु कर दिया। पंजाब में नशा का ये जगह इरान, अफगानिस्तान, और पाकिस्तान से सबसे ज्यादा सफ्लाई होता है। पंजाब के ड्रग्स पैडलर ड्रग्स के सप्लाई के लिए गोल्डन क्रिसेंट रूट का इस्तेमाल करते है और ईरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान से सीधे बॉर्डर के जरिये ड्रग्स मंगा लेते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों में ड्रस्क की तस्करी के राष्ट्रीय मुद्दा बनने के कारण सुरक्षा पुख्ता की गई है।

पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी

इसलिए अब इन्हें राजस्थान और अमृतसर बॉर्डर के जरिए भेजा जाता है। जिसमें ड्रोन का इस्लेमाल सबसे ज्यादा तेजी से होने लगा। शायद आपको ये पता न हो … भले ही भारत अफगानिस्तान से काफी मैत्रीपूर्ण संबंध रखता है लेकिन 90 प्रतिशत अफीम अफगानिस्तान में ही उगते है और यहीं से भारत के हिस्से में भेजे भी जाते है। अफीम की खेती बैन होने के बाद भीव पंजाब में आखिर हर साल 7500 करोड़ रूपय के अफीन कहां से आते है, जवाब आप खुद समझ गऐ होंगे।

पंजाब में नशे का खेल शुरु करने में पाकिस्तान का अहम रोल रहा। खासकर पंजाब के वो क्षेत्र जो पाकिस्तान से लगते है, जहां से पाकिस्तान के जरिए नशीली पदार्थों की तस्करी होती है.. पंजाब और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा जिसे रेडक्लिफ लाइन भी कहा जाता है.. करीब 547 किलोमीटर से लेकर 553 किलोमीटर के आसपास है। ये सीमा पंजाब के चार मुख्य राज्य जिसमें अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर और तरनतारन शामिल है। इसमे तरणतारण जिला इस वक्त सबसे ज्यादा नशा करने वाला जिला कहलाता है।

बेरोजगारी के कारण पंजाब की स्थिति काफी खराब

पंजाब में नशे का खेल फैलाने के लिए सबसे पहले हाई स्कूल और सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ रहे छोटे बच्चो को इसका कम दामों में, मुफ्त में देकर पहले तो आदी बनाया गया.,.और फिर उनसे रकम वसूली जाती है.. वहीं एक बड़ा कारण बेरोजगारी भी है। जो नशा करते है उनके लिए भी और जो नशे का व्यापार करने है उनके लिए भी। बेरोजगारी के कारण पंजाब की स्थिति काफी खराब हुई है। लेविश लाइफ जीने के लिए कम उम्र के जवान भी नशे का व्यापार करते है.. ड्रग्स पैडलर बच्चों को निशाना बनाते है ताकि वो दूसरो को निशाना बना सकें, और कोई उन पर शक भी नहीं करेगा।

सोर्सेज की माने तो सीमा पार से नशीले पदार्थों के सेवन में बीएसएफ के हवलदार और इंस्पेक्टर रैंक के कई अधिकारियों की भी मिली भगत रहती है.. वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में सरकार की अनदेखी ने भी युवाओं को इस दलदल में धकेला है। जिनके पास काम नहीं है, खाने के पैसे नहीं है,  उनके लिए तो सबसे पहली प्रायोरिटी ही पेट भरना होगा..उसके लिए सही काम नही मिला तो गलत काम ही सही।

पाकिस्तान से हेरोइन, हथियार व जाली करेंसी की तस्करी

आपको जानकर शायद झटका लगे कि सीमावर्ती इलाकों में जो गांव है, वहां के लोग भी ड्रग्स पैडलर की मदद करते है, वो नशीली पदार्थों का सेवन करने के अलावा पैसो के लिए  पाकिस्तान से हेरोइन, हथियार व जाली करेंसी की तस्करी करते हैं.. जिससे उनकी लाइफ अच्छी कटती है। इसके अलावा नदियों के जरिए भी ड्रग्स की तस्करी की जाती है। दुख की बात तो ये है कि हमारे सुरक्षा जवान हर स्थान पर चौकसी नहीं रख सकते है। इतनी ही नहीं पंजाब में सुरक्षा पुख्ता किये तो राजस्थान के बार्डर से भी चूरापोस्त और अफीम आने लगे।

कानून भी अगर अपराधियों के नाक में नकेल करने की कोशिश भी करती है तो राजनीतिक संरक्षण ने उनके हाथ बांधे हुए है। फिरोजपुर का ग्वांल मंडी एक ऐसा क्षेत्र है जहां से सबसे ज्यादा व्यापार होता है नशे का, लेकिन पुलिस की हिम्मत तक नहीं है कि वो वहां जा सकें.. क्योंकि राजनीति संरक्षण प्राप्त है। जिसके कारण पुलिस इन लोगो से भिड़ने से दूर रहती है।

हालांकि 2024 में पंजाब के सीएम भगवंत मान ने ऐलान किया था कि वो पंजाह को नशे के दलदल से निकाल कर नशा मुक्त पंजाब बनायेंगे, लेकिन आज भी स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं हुई है। हां, पुलिस की चौकसी और बढ़ गई है। कई ड्रग्स पैडलर के धरो पर बुल्डोजर चले है. कार्यवाई तेज हो रही है.. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये ही है कि नशा कोई करता ही क्यों क्यों है। अगर उनके पास काम होगा.. वो रोजगार पायेंगे तो उनका ध्यान खुद ही बदल जायेगा। जब तक युवाओं के रोजगार के लिए कोई सटीक उपाय नहीं होता तब तक ये खेल जारी रहेगा। आप क्या सोचते है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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