Green Revolution in Punjab: कैसे बना पंजाब ‘अन्न भंडार’? आधुनिक खेती और 1960 के दशक का वो क्रांतिकारी बदलाव

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 21 Mar 2026, 07:53 AM | Updated: 21 Mar 2026, 07:53 AM

Green Revolution in Punjab: हमारा भारत जब आजाद हुआ था तब उसने केवल बंटवारे का ही दंश नहीं झेला था बल्कि पाकिस्तान को एक अच्छी खासी रकम भी भारक को चुकानी पड़ी थी, ताकि नये बने देश के विकास में काम किया जा सकें.. उस वक्त भारत की संपत्ति का करीब  17.5 फीसदी हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया गया था, इतना ही नहीं 200 सालो तक भारत को लूटने वाले अंग्रेजो ने भारत को आजादी के वक्त 400 करोड़ रूपय दिये थे, लेकिन भारत को उस वक्त 75 करोड़ रूपय दिये गए साथ ही अलग से 20 करोड़ रूपय प्रशासनिक कामो के लिए दिया गया था।

भारत गरीबी और भूखमरी से उबरने की कोशिश कर ही रहा था कि एक तरफ से 1962 में चीन और दूसरी तरफ से 1965 में पाकिस्तान ने दो तरफा वार करके भारत को युद्ध की आग में धकेल दिया… जिससे खाद्य संकट और ज्यादा गहरा गया। हालांकि 1959 में अमेरिका के साथ हुआ खाद्य आपूर्ति समझौता के तहत 4 सालो से तक अनाज की कमी को पूरा करने का कोशिश तो की गई लेकिन चीन और पाकिस्तान की दो तरफा मार ने उसे बुरी तरह से प्रभावित किया.. जिसके कारण ही हरित क्रांति की नींव भारत में भी रखी गई।

क्या था पीएल 480 समझौता

पीएल 480 समझौता असल में अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर और तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच मई 1960 में दोनों देशों के बीच एक 4 साल के लिए एक खाद्यान आपूर्ति समझौते पर साइन किया गया था जिसे पी.एल.480  नाम दिया गया था। जिसके तहत अमेरिका ने भारत को पर्याप्त मात्रा में खाद्यान पदार्थ की पूर्ति करने का आश्वासन दिया था। लेकिन वॉर के कारण इसमें कई बार बाधाये आई। तब तक भारत में आधुनिक खेती की तकनीको को नहीं अपनाया गया था, इसलिए 60 के दशक में ही एम एस स्वामीनाथन ने पहली बार खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके अनाज आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला किया गया गया।

जिसे हरित क्रांति कहा गया। जिसका मुख्य उद्देश्य खेती के लिए उन्नत किस्म के बीजों का बंदोबस्त कर उगाई की जाये, सिंचाई के सुचारू प्रबंध करके और बेहतर उर्वरकों का इस्तेमाल करके कृषि उत्पादन में तेजी के बढ़ौतरी की जायें, जिसमें ज्यादा फोकस गेहूँ और चावल की उपज पर किया जायें। एम एस स्वामीनाथन के दिशा निर्देश पर भारत के कई राज्यों जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तप प्रदेश में उपजाऊ भूमि का इस्तेमाल करके यहां खेती बढ़ाई गई।

कैसे बना पंजाब ब्रेड बास्केट

पंजाब एक ऐसा राज्य है जहां पांच नदियां है, जिसके कारण पूरे भारत में पजाब की भूमि सबसे उपजाई भूमि मानी जाती है। 60 के दशक में जब हरित क्रांति की शुरुआत की गई तो सबसे पहले पंजाब के ही किसानों ने खाद्य की कमी को खत्म करने के लिए हरित क्रांति के तहत बताये गए दिशा निर्देशों का पालन करना शुरू किया था।

जिसे तहत पंजाब में सबसे पहले नई तकनीको का उपयोग करके ज्यादा उपज देने वाले बीजो का इस्तेमाल किया गया, बेहत उवर्रक डाले गये और सिचाई का बेहतर प्रबंध होने के कारण फसलो को समय पर पानी और उपयोगी उवर्रकता मिली..जिसका फायदा जल्द ही देखने को मिला..और पंजाब के फसलों ने कमाल कर दिया.. नतीजा ये हुआ कि पंजाब से पूरे भारत का करीब 18 से 20 प्रतिशत गेहूं जाने लगा।

भारत का ब्रेड बास्केट PUNJAB

करीब 12 प्रतिशत चावल पंजाब अकेले पूरा करता है..जिसमें कल्याण सोना, सोनोरा 64 जैसे चावल के छोटे बीजो के उगाने के कारण उत्पादन दुगुना हो गया। पंजाब भारत की खाद्य सुरक्षा को पूरा करने में सबसे अहम रोल प्ले कर रहा है.. जिसका क्रेडिट पंजाब में हरित क्रांति का दिल खोल कर स्वागत करने वाले मेहनती किसानों को भी जाता है। हरित क्रांति के कारण पंजाब धीरे धीरे भारत का ब्रेड बास्केट यानि की अन्न भंडार बन गया है। पंजाब के लिए हमेशा से खेती वहां की शान रही थी।

आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल

इसलिए खेती को मजबूत बनाने के लिए किसानों से जो बन पड़ा उन्होंने वो किया..इसके लिए उन्होंने नहर, ट्यूबबेल और पंपिक सेटो का विस्तार किया साथ ही आधुनिकता को तेजी से स्वीकार करते हुए किसानों ने ट्रेक्टर, हार्वेस्टर, और थ्रेशर मशीनों जैसी उन्नत आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल तेजी सीखा भी और किया भी। पंजाब के किसानों को न्यूनतम मसर्थन मूल्य होने के कारण खेती में उन्हें सबसे ज्यादा फायदा नजर आया और उन लोगो ने खुद को खेती बाड़ी में झोंक दिया।

जो देश कभी खाद्य पदार्थ बाहरी देशों से मंगाता था वो पंजाब की बदौलत दूसरे देशों में आयात करने लगा.. हरित क्रांति को सफल बनाने में सहीं मायने में पंजाब का योगदान हमेशा अविस्मरनीय है…पंजाब की भारत के विकास के लिए, हर भारतीय का पेट भरने के लिए.. उनके योगदान के लिए हमेशा देश शुक्रगुजार रहेगा।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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