कस्टडी में बर्बरता पड़ी भारी! बाप-बेटे की जान लेने वाले 9 पुलिसकर्मियों को होगी फांसी | Sathankulam Custodial Death

Nandani | Nedrick News Published: 07 Apr 2026, 09:18 AM | Updated: 07 Apr 2026, 09:18 AM

Sathankulam Custodial Death: तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में साल 2020 में हुए चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल किलिंग मामले में आखिरकार न्याय मिल गया है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” यानी बेहद जघन्य अपराध मानते हुए दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। करीब छह साल तक चले लंबे और जटिल ट्रायल के बाद यह ऐतिहासिक फैसला सामने आया है, जिसे देशभर में न्याय की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी | Sathankulam Custodial Death

पूरी घटना 19 जून 2020 की है, जब कारोबारी पी जयराज और उनके बेटे जे बेन्निक्स को कोविड-19 लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप था कि दोनों ने अपनी मोबाइल एक्सेसरी की दुकान तय समय के बाद भी खुली रखी थी। लेकिन यह मामूली आरोप आगे चलकर एक दर्दनाक घटना में बदल गया।

हिरासत में बेरहमी से की गई पिटाई

जांच में सामने आया कि पुलिस हिरासत में दोनों के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया गया। सीबीआई और अदालत में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, पिता-पुत्र को पूरी रात लगातार पीटा गया। उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिनमें ब्लंट फोर्स ट्रॉमा और भारी रक्तस्राव शामिल था। यही उनकी मौत का कारण बना।

चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों को अंडरवियर में मेज पर झुकाकर उनके हाथ-पैर बांध दिए गए थे, ताकि वे हिल न सकें। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने लगातार डंडों से मारपीट की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 18 से ज्यादा गंभीर चोटों का जिक्र किया गया, जो इस यातना की भयावहता को दिखाती हैं।

बेटे ने किया विरोध तो दोनों बने निशाना

जानकारी के अनुसार, जयराज को शाम करीब साढ़े सात बजे कामराजर चौक से उठाया गया था। जब उनके बेटे बेन्निक्स को इस बात की जानकारी मिली, तो वह तुरंत थाने पहुंचा। वहां उसने अपने पिता को पिटते देखा और इसका विरोध किया। इसी के बाद पुलिसकर्मी और भड़क गए और दोनों को घंटों तक प्रताड़ित किया गया।

जांच में सामने आए पुख्ता सबूत

सीबीआई जांच ने इस पूरे मामले की परतें खोल दीं। थाने की दीवारों, टॉयलेट और एसएचओ के कमरे से लिए गए डीएनए सैंपल पीड़ितों से मेल खाते पाए गए। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यह अत्याचार अचानक नहीं, बल्कि सोची-समझी कार्रवाई थी, जो पूरी रात चली।

अदालत का सख्त रुख

इस केस में कुल 10 पुलिसकर्मी आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से एक की कोविड-19 के दौरान मौत हो गई थी। फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जी मुथुकुमारन की अदालत ने बाकी 9 आरोपियों को हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि इसमें पुलिस द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग और अमानवीय क्रूरता दिखाई गई है। इसी आधार पर इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए मौत की सजा सुनाई गई।

देशभर में गूंजा था मामला

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल बन गया था। लोगों ने पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा पर गंभीर सवाल उठाए थे। अब इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय और कानून के राज की जीत के रूप में देखा जा रहा है।

उठे कई बड़े सवाल

हालांकि इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि पुलिस हिरासत में लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। सथानकुलम कांड ने यह साफ कर दिया कि अगर शक्तियों का दुरुपयोग हो, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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