Pakistan Indian Spy Search Operation| पाकिस्तान में भिखारियों के खिलाफ चल रहा बड़ा पुलिस ऑपरेशन इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। हालांकि, इस चर्चा की वजह सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि इसे एक फिल्म से जोड़कर फैलाया जा रहा दावा है, जो जांच में गलत साबित हुआ है।
फिल्म ‘धुरंधर’ से जोड़ा गया ऑपरेशन | Pakistan Indian Spy Search Operation
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे दावों में कहा गया कि भारतीय फिल्म धुरंधर में रणवीर सिंह के किरदार ‘हमजा’ के खुलासे के बाद पाकिस्तान में भिखारियों के खिलाफ स्पेशल सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इतना ही नहीं, कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि पुलिस भिखारियों के भेष में छिपे रॉ के जासूसों की तलाश कर रही है। लेकिन फैक्ट चेक में यह दावा पूरी तरह गलत निकला। किसी भी आधिकारिक एजेंसी या सरकारी बयान में फिल्म और इस ऑपरेशन के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है।
2025 से चल रहा है ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में यह अभियान साल 2025 से ही जारी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़कों, रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट तक कार्रवाई कर रही हैं। अब तक करीब 66,000 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इसके अलावा हजारों पासपोर्ट सस्पेंड किए गए हैं और कई लोगों को खाड़ी देशों से डिपोर्ट भी किया गया है।
संगठित गैंग का खुलासा
जांच में यह सामने आया है कि भिखारियों के पीछे संगठित नेटवर्क सक्रिय हैं। ये गिरोह बच्चों और महिलाओं का इस्तेमाल कर भीख मंगवाते हैं और बड़े स्तर पर पैसा कमाते हैं। कुछ मामलों में इन नेटवर्क्स का संबंध चोरी और ड्रग्स जैसे अपराधों से भी जुड़ा पाया गया है। यही वजह है कि अब कार्रवाई का फोकस सिर्फ भिखारियों पर नहीं, बल्कि इन गिरोहों को चलाने वाले लोगों पर है।
वीडियो वायरल, लेकिन कहानी अलग
इस ऑपरेशन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें पुलिस टीमों को भिखारियों और संदिग्ध लोगों को पकड़ते हुए देखा जा सकता है। इन्हीं वीडियो को फिल्म ‘धुरंधर’ से जोड़कर एक अलग नैरेटिव बनाया गया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, यह सिर्फ सोशल मीडिया की बनाई कहानी निकली, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
सरकार का मकसद और आगे की योजना
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहरों को भिखारी-मुक्त बनाना, मानव तस्करी पर रोक लगाना और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को बेहतर करना है। इसके लिए इंटेलिजेंस सिस्टम और सेफ सिटी कैमरों की मदद से इन नेटवर्क्स को ट्रैक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके पीछे की असली वजह गरीबी और बेरोजगारी है, जिसे दूर किए बिना इस तरह के अभियान लंबे समय तक असरदार नहीं रहेंगे। इसलिए, पुनर्वास और सामाजिक सहायता के कदम भी उतने ही जरूरी हैं, जितना कि सख्त कार्रवाई।





























