Pakistan Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध का असर अब पूरे क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। खास तौर पर तब हालात और गंभीर हो गए जब ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले Strait of Hormuz को बंद कर दिया। इस मार्ग के बंद होते ही वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई और कच्चे तेल की कीमतों में करीब 15 फीसदी तक उछाल देखने को मिला है। जानकारों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए ऊर्जा सप्लाई का एक अहम रास्ता है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी मार्ग से होती है। कई देशों के लिए तो यह रास्ता ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पूरा आधार है। ऐसे में इसके बंद होने से सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ रहा है जो पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर हैं।
पाकिस्तान में मचा हड़कंप (Pakistan Crisis)
इस स्थिति से पड़ोसी देश पाकिस्तान में खासा तनाव देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रही है और अब तेल सप्लाई पर खतरे ने उसकी चिंता और बढ़ा दी है। सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में जुट गई है और साथ ही घरेलू स्तर पर ऊर्जा बचाने के लिए कई कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
लोगों से फ्यूल बचाने की अपील
ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है। साथ ही कई संस्थानों और कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने का सुझाव दिया गया है ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। सरकार का मानना है कि अगर अभी से खपत पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इसके अलावा सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की हर हफ्ते समीक्षा करने की योजना बना रही है। तेल कंपनियों को बढ़े हुए इंश्योरेंस और इंपोर्ट प्रीमियम की लागत का मुआवजा देने पर भी विचार किया जा रहा है। इन कदमों का मकसद यह है कि बाजार में लिक्विडिटी बनी रहे और अचानक से तेल की कमी जैसी स्थिति पैदा न हो।
पाकिस्तान के पास कितना है तेल भंडार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान के पास इस समय कच्चे तेल का भंडार बेहद सीमित है। देश में लगभग 10 दिनों के लिए ही कच्चा तेल उपलब्ध है, जबकि पेट्रोलियम उत्पाद करीब 28 दिनों तक चल सकते हैं। इसके अलावा एलपीजी का स्टॉक भी लगभग 15 दिनों का ही बचा है।
ऐसे में अगर लंबे समय तक होर्मुज मार्ग बंद रहता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो पाकिस्तान को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
कहां से आता है पाकिस्तान का तेल
पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। देश का अधिकांश कच्चा तेल खाड़ी देशों से आता है। इसमें मुख्य रूप से Saudi Arabia, United Arab Emirates, Kuwait और Nigeria शामिल हैं।
लेकिन मौजूदा युद्ध और होर्मुज मार्ग के बंद होने से इन देशों से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में पाकिस्तान अब वैकल्पिक स्रोतों की ओर भी देख रहा है। खास तौर पर Russia से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
आगे और मुश्किलें बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा, तो इसका असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह ऊर्जा आपूर्ति को कैसे स्थिर रखे और संभावित संकट से अपने देश को बचा सके।
