क्या पेगासस के जरिए पाकिस्तान पीएम इमरान खान की भी "जासूसी" की गई?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 20 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 20 Jul 2021, 12:00 AM

भारत का कोई मुद्दा और उसमें पाकिस्तान टांग ना अंड़ाए, ऐसा कम ही होता है। भारत के हर आंतरिक मुद्दे में पाकिस्तान कूद पड़ता है। चाहे वो जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का या फिर राम मंदिर का मसला, पाक किसी भी मसले पर भारत के खिलाफ बोलने का मौका नहीं छोड़ता। 

पेगासस विवाद में कूदा पाकिस्तान

फिलहाल देश में पेगासस जासूसी मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है। अब इस मामले में पाकिस्तान ने भी एंट्री मार ली है। पाकिस्तान ने एक नया राग छेड़ते हुए आरोप लगाया कि उनके प्रधानमंत्री इमरान खान का भी फोन है हैक करने की कोशिश भारत ने की। 

पाकिस्तान के आरोपों के मुताबिक इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए पीएम इमरान खान की भी जासूसी की बात सामने आई है। इसका आरोप उसने भारत पर मढ़ा है। साथ ही उसने ये भी कहा कि इस मुद्दे को बड़े मंचों पर उठाएगा। 

इमरान खान का फोन हैक करने का लगाया आरोप

इसके बारे में पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि हैकिंग को लेकर हम और ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिशों में जुटे हैं। एक बार जानकारी मिल जाएं, तो हम इस मुद्दे को हर जरूरी मंच पर उठाएंगे। 

वहीं इससे पहले पाकिस्तानी मंत्री ने पेगासस विवाद को लेकर एक ट्वीट भी किया और भारतीय पत्रकारों और नेताओं की कथित हैकिंग पर चिंता भी व्यक्त की। 

दरअसल, पाकिस्तान की मीडिया की तरफ से ये दावा किया जा रहा है कि हैक किए फोन में पीएम इमरान खान का भी एक नंबर शामिल है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की खबर के अनुसार भारत में करीबन एक हजार नंबर सर्विलांस लिस्ट में थे, जिनमें कई सौ नंबर पाकिस्तान के भी शामिल हैं। इनमें से ही एक नंबर ऐसा था, जिसका इस्तेमाल इमरान खान ने किया। हालांकि, पोस्ट ने साफ तौर पर ये नहीं बताया गया कि इमरान के नंबर को हैक करने की कोशिश सफल हुई या फिर नहीं। लेकिन इसमें इमरान खान का नाम आने से पाकिस्तान इस पर भड़क जरूर रहा है। 

पेगासस विवाद को लेकर सियासी बवाल

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रविवार को एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें ये दावा किया गया कि पेगासस स्पाइवेयर के जरिए भारत के 300 से भी ज्यादा फोन हैक किए गए। जिसमें नेताओं से लेकर भारतीय पत्रकारों, एक्टिविस्ट समेत कई जाने माने लोगों के नाम शामिल हैं। हालांकि सरकार की तरफ से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया। सरकार इसे देश को बदनाम करने के लिए साजिश का हिस्सा बता रही है। केंद्र सरकार इस रिपोर्ट की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। 

हालांकि इस पूरे मामले को लेकर देश की राजनीति गरमाई हुई। मॉनसून सत्र में जासूसी के इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है और जमकर घेर रहा है। विपक्ष की मांग है कि सरकार इन आरोपों की जांच कराएं। 

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